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सिद्धू का निधन, सूफी गायकी से 'बरकत' खत्म

Mon, 18 Aug 2014 05:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा(पंजाब) Updated Mon, 18 Aug 2014 05:23 PM IST
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Punjabi Sufi singer Barkat Sidhu died

पंजाब की विरासत को कई दशक जीवित रखने वाली फक्कड़ रूह, फक्कड़ सूफी गायक बरकत सिद्धू नहीं रहे। मोगा में दोस्त के घर उन्होंने शनिवार रात 10.45 बजे आखिरी सांस ली। सिद्धू को कैंसर था और वह तीन महीने से बीमार थे।

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बरकत सिद्धू छाती के कैंसर से पीड़ित थे। उनको तकरीबन दो महीने डीएमसी लुधियाना में रखा गया था। उनके इलाज का सारा खर्चा पंजाब सरकार की तरफ से किया जा रहा था लेकिन कमजोर सेहत के कारण डॉक्टरों की सलाह के बाद उनके परिजन 15 दिन पहले उन्हें अपने घर ले आए थे।
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निगाहा रोड स्थित अपने घर की खस्ता हालत के कारण दशमेश नगर में दोस्त के घर उन्होंने जिंदगी के आखिरी पल बिताए।

सदमे ने बनाया बीमार

Punjabi Sufi singer Barkat Sidhu died

बरकत सिद्धू के बेटे लाडी सिद्धू ने बताया कि उनकी सेहत बहुत खराब थी और वह बोल भी नहीं सकते थे। उनको चम्मचों के जरिये तरल पदार्थ दिया जा रहा था। सिद्धू की छाती में रसौली थी और वह निकाल दी गई थी।

उसके बाद उनकी सेहत गिरती ही गई। शनिवार रात करीब 10.45 बजे आखिरी सांस ली। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने 30 मरले का प्लाट 28 लाख में खरीदा लेकिन वह ठगी का शिकार हो गए।

इस सदमे में ही वह बीमार रहने लगे थे। उनके तीन बेटे सुरिंदर सिद्धू, महेंदरपाल सिद्धू और राजिंदरपाल सिद्धू और एक बेटी घुखरी हैं। वह पूरनशाह कोटी के नजदीकी रिश्तेदार थे।

पटियाला घराने से संबंध रखते थे सिद्धू

Punjabi Sufi singer Barkat Sidhu died

पटियाला घराने की गायकी से संबंध रखने वाले बरकत सिद्धू का जन्म 1946 में जालंधर के गांव कन्नियां (शाहकोट) में हुआ था। उनके पिता का नाम लाल चंद और मां का नाम पठानी था।

वह काफी समय से निगाहा रोड, बस्ती मोहन सिंह, मोगा में रह रहे थे। पंजाबी सूफी गायकी के बाबा बोहड़ माने जाते बरकत सिद्धू ने सौ से अधिक कवियों के कलाम पेश किए। वह चाहे आर्थिक तंगी में रहे लेकिन उन्होंने लोक अर्पण वाली, साफ सुथरी सूफी गायकी के साथ कोई समझौता नहीं किया।

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ठुकरा दिया था 60 लाख का ऑफर

Punjabi Sufi singer Barkat Sidhu died

सिद्धू को देशों विदेशों में सूफी गायकी में धाक जमाने के लिए साहित्य सभाओं, संस्थाओं की तरफ से अनेकों मान सम्मान मिले। वह पंजाबी के अजीम गायक ही नहीं बल्कि कलाकार भाईचारे के उस्ताद भी माने जाते थे।

सूफी विरसे की गायकी को जिंदा रखने के लिए ही उन्होंने टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की 60 लाख रुपये में तीन सालों के लिए कामर्शियल गीत गाने की पेशकश ठुकरा दी।

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