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पंजाबी लोकगीतों से कुछ यूं महका पंजाब कला भवन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 18 Feb 2014 01:39 PM IST
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डा. एमएस रंधावा की याद में मनाए जा रहे एक महीने के यादगारी उत्सव के तहत पंजाब कला भवन में पंजाबी लोकगीतों का कार्यक्रम हुआ।
कार्यक्रम की शुरूआत मशहूर पंजाबी लोकगीत हीर से हुई जिसे पलमिंदर सिंह ने गाया, इसके बाद छल्ला गाकर पलमिंदर ने सभी दर्शकों को अपने साथ गुनगुनाने में मजबूर कर दिया।
मिलन कौर ने जब अख्यां च तू वस्दा गाया तो लोगों ने झूम कर उसका आनंद लिया। मिलनदीप कौर और निरपाल कौर ने दुल्हें की वार गाए, अंत में डा. निर्मल सिंह निना ने ‘मिट्टी दा बावा’ और ‘माहियां’ गाकर कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया।
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कार्यक्रम की शुरूआत मशहूर पंजाबी लोकगीत हीर से हुई जिसे पलमिंदर सिंह ने गाया, इसके बाद छल्ला गाकर पलमिंदर ने सभी दर्शकों को अपने साथ गुनगुनाने में मजबूर कर दिया।
मिलन कौर ने जब अख्यां च तू वस्दा गाया तो लोगों ने झूम कर उसका आनंद लिया। मिलनदीप कौर और निरपाल कौर ने दुल्हें की वार गाए, अंत में डा. निर्मल सिंह निना ने ‘मिट्टी दा बावा’ और ‘माहियां’ गाकर कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया।
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