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अनाज को सुरक्षित रखने के लिए डाल रहे दवा, खामियाजा भुगत रहा आम आदमी
Fri, 05 Mar 2021 10:36 AM IST
निवेदिता वर्मा
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 05 Mar 2021 10:36 AM IST
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गोदाम में रखे अनाज को सुरक्षित रखने के लिए दवा डाली जाती है।
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब के गोदामों में अनाज को सुरक्षित रखने के लिए उसमें दवाएं डाली जाती हैं, लेकिन खाद्य एवं सिविल सप्लाई विभाग के इंस्पेक्टर गोदाम में रात भर अनाज पर पंपों के जरिए पानी छिड़कते हैं, जिससे कीटनाशक दवाएं घुलकर अनाज में ही चली जाती हैं।
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सूखने के बाद इसी दवायुक्त अनाज को आम लोग खा लेते हैं। यह खुलासा पंजाब विधानसभा के विधायक हरदयाल सिंह कंबोज की अगुवाई में गठित अनुमान कमेटी ने खाद्य, सिविल सप्लाई व उपभोक्ता मामले विभाग की वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट में किया है।
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कमेटी ने सिफारिश की है कि गोदामों में लगे पंप और ट्यूबवेल तुरंत बंद किए जाएं और अनाज की देखभाल के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। गुरुवार को सदन पटल पर रखी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब के किसान सोने जैसी फसल पैदा कर रहे हैं, बावजूद इसके लोग दवायुक्त गेहूं खा रहे हैं।
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कमेटी को विभागीय अधिकारियों से यह जानकारी मिली कि इस समय राज्य के गोदामों में 70 लाख टन गेहूं खुले आकाश के नीचे रखी है। यह अनाज सात-आठ महीने तक ठीक रहता है, लेकिन उसके बाद कठिनाई पैदा होती है। कमेटी ने पाया कि अनाज बचाने के लिए दवाएं डाली जाती हैं। विभाग के इंस्पेक्टर पंपों के जरिए रात भर अनाज पर पानी छिड़क देते हैं। इससे दवा घुलकर अनाज में चली जाती है। इसके बाद जब गेहूं सूखता है तो उसमें दवाओं का सारा असर आ चुका होता है।
कमेटी ने यह भी पाया कि पंजाब के किसान जब एफसीआई के पास धान पहुंचाते हैं तो वे पैसे लेकर इस तरह मिलावट करते हैं कि बाद में धान बिक्री योग्य नहीं रह जाता। ऐसी ही स्थिति गेहूं के मामले में की जाती है। कमेटी ने पाया कि अगर गेहूं और धान को सुरक्षित रखा जाए तो इसकी बिक्री आसानी से हो सकती है, लेकिन दवायुक्त गेहूं आम लोग तो खा ही रहे हैं, अगर यह गेहूं पशुओं को चारे के रूप में दे दिया जाए तो उन पशुओं का दूध भी आखिरकार आम लोग ही पीएंगे। ऐसे हालात में, गोदामों में लगे पंप और ट्यूबवेल तुरंत बंद किए जाने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि अनुमान कमेटी अपनी जांच के दौरान यह भी पता लगाना चाह रही थी कि पंजाब के गोदामों में रखी कितनी गेहूं और धान अब तक खराब हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों ने कमेटी को बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अनाज की बर्बादी रोकने के लिए कदम उठा गए हैं। इसके तहत एफसीआई को अनाज के तुरंत निपटारे के अलावा ढुलाई में भी तेजी लाने को कहा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि धान सौ फीसदी अन्य राज्यों को भेजी जाती है जबकि गेहूं 8.70 लाख टन प्रदेश में ही इस्तेमाल होती है और बाकी गेहूं अन्य राज्यों को भेजी जाती है। अन्य राज्यों को जाने वाले धान का ट्रांसफर पंजाब में ही एफसीआई को कर दिया जाता है, लेकिन गेहूं का स्टाक ट्रांसफर नहीं होता और इसे काफी देर तक पंजाब के गोदामों में रखना पड़ता है।
कमेटी ने यह भी पाया कि पंजाब के किसान जब एफसीआई के पास धान पहुंचाते हैं तो वे पैसे लेकर इस तरह मिलावट करते हैं कि बाद में धान बिक्री योग्य नहीं रह जाता। ऐसी ही स्थिति गेहूं के मामले में की जाती है। कमेटी ने पाया कि अगर गेहूं और धान को सुरक्षित रखा जाए तो इसकी बिक्री आसानी से हो सकती है, लेकिन दवायुक्त गेहूं आम लोग तो खा ही रहे हैं, अगर यह गेहूं पशुओं को चारे के रूप में दे दिया जाए तो उन पशुओं का दूध भी आखिरकार आम लोग ही पीएंगे। ऐसे हालात में, गोदामों में लगे पंप और ट्यूबवेल तुरंत बंद किए जाने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि अनुमान कमेटी अपनी जांच के दौरान यह भी पता लगाना चाह रही थी कि पंजाब के गोदामों में रखी कितनी गेहूं और धान अब तक खराब हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों ने कमेटी को बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अनाज की बर्बादी रोकने के लिए कदम उठा गए हैं। इसके तहत एफसीआई को अनाज के तुरंत निपटारे के अलावा ढुलाई में भी तेजी लाने को कहा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि धान सौ फीसदी अन्य राज्यों को भेजी जाती है जबकि गेहूं 8.70 लाख टन प्रदेश में ही इस्तेमाल होती है और बाकी गेहूं अन्य राज्यों को भेजी जाती है। अन्य राज्यों को जाने वाले धान का ट्रांसफर पंजाब में ही एफसीआई को कर दिया जाता है, लेकिन गेहूं का स्टाक ट्रांसफर नहीं होता और इसे काफी देर तक पंजाब के गोदामों में रखना पड़ता है।