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पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के पूर्व चेयरमैन की संपत्ति सील, जानिए क्या है मामला?
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, चंडीगढ़/सोलन
Updated Sun, 05 Mar 2017 11:14 AM IST
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रविंदर पाल सिंह सिद्धू
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पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के पूर्व चेयरमैन रविंद्र पाल सिंह सिद्धू की कसौली में करोड़ों की संपत्ति जब्त कर दी गई है। वे पंजाब में कैश फॉर जॉब स्कैम में सात साल की सजा काट रहे हैं। आरोप था कि कंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में पूर्व अधिकारी ने नियमों को ताक पर रखकर इस कोठी को खरीदा है।
शनिवार को डिफेंस इस्टेट ऑफिस की अंबाला टीम ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर कोठी को जब्त किया। जिला उपायुक्त सोलन डॉय राकेश कंवर ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कसौली कंटोनमेंट के मुख्य क्षेत्र के अंदर कई वर्ष पहले यह कोठी खरीदी गई थी। कैश फॉर जॉब का मामला सामने आने के बाद संपत्तियों की जांच हुई। इसमें यह मामला अंबाला स्थित डिफेंस एस्टेट को जांच के लिए सौंपा।
जांच में पाया गया कि पूर्व अधिकारी ने फर्जीबाड़े से यह प्रापर्टी अपने नाम की है। कसौली में कंटोनमेंट बोर्ड की बेहतरीन जगहों में से यह एक है। शनिवार को डिफेंस के आदेशानुसार संबंधित अधिकारी डीसी सोलन से मिले और टीम गठित करके स्थानीय प्रशासन ने इस कोठी का कब्जा डिफेंस को सौंपा है। पंजाब में कैश फॉर जॉब का मामला सामने आने के बाद उस दौरान हुई करीब 639 नियुक्तियों को रद्द किया था।
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शनिवार को डिफेंस इस्टेट ऑफिस की अंबाला टीम ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर कोठी को जब्त किया। जिला उपायुक्त सोलन डॉय राकेश कंवर ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कसौली कंटोनमेंट के मुख्य क्षेत्र के अंदर कई वर्ष पहले यह कोठी खरीदी गई थी। कैश फॉर जॉब का मामला सामने आने के बाद संपत्तियों की जांच हुई। इसमें यह मामला अंबाला स्थित डिफेंस एस्टेट को जांच के लिए सौंपा।
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जांच में पाया गया कि पूर्व अधिकारी ने फर्जीबाड़े से यह प्रापर्टी अपने नाम की है। कसौली में कंटोनमेंट बोर्ड की बेहतरीन जगहों में से यह एक है। शनिवार को डिफेंस के आदेशानुसार संबंधित अधिकारी डीसी सोलन से मिले और टीम गठित करके स्थानीय प्रशासन ने इस कोठी का कब्जा डिफेंस को सौंपा है। पंजाब में कैश फॉर जॉब का मामला सामने आने के बाद उस दौरान हुई करीब 639 नियुक्तियों को रद्द किया था।
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यह हैं सिद्धू और जॉब फॉर कैश स्कैम
छात्रवृत्ति घोटाला
फार्मर जर्नलिस्ट रविंद्र पाल 1996 में पीपीएससी चेयरमैन बने। बतौर चेयरमैन उन्होंने छह साल कुर्सी पर राज किया। 25 मार्च 2002 में जॉब फॉर कैश स्कैम में उनकी गिरफ्तारी हुई। एक एक्साइज इंस्पेक्टर से पंजाब सिविल सर्विसेज में नौकरी देने के एवज में पांच लाख की रिश्वत लेते उन्हें पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने रंगे हाथों चंडीगढ़ में धरा था।
जांच में सामने आया था कि यह डील 35 लाख में हुई थी। जांच एजेंसियों ने अप्रैल 2002 में ही सिद्धू के बैंक लाकर से 8.26 करोड़ रिकवर किया। इस केस में सबसे बड़ी कार्रवाई तब हुई जब उस समय की करीब 639 नियुक्तियों को पंजाब सरकार ने रद्द कर दिया।
कोर्ट में मार्च 2015 में सुनाई थी सजा
पटियाला कोर्ट के सेशन जज पुष्पेंद्र सिंह की अदालत ने कैश फार जॉब स्कैम में मार्च 2015 में अपना फैसला सुनाया। इसमें पूर्व चेयरमैन समेत पीपीएससी के पूर्व चार को सेक्शन 420, 467, 468, 409, 120 बी और सेक्शन सात, 13(2) प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट के तहत सजाएं सुनाईं।
जांच में सामने आया था कि यह डील 35 लाख में हुई थी। जांच एजेंसियों ने अप्रैल 2002 में ही सिद्धू के बैंक लाकर से 8.26 करोड़ रिकवर किया। इस केस में सबसे बड़ी कार्रवाई तब हुई जब उस समय की करीब 639 नियुक्तियों को पंजाब सरकार ने रद्द कर दिया।
कोर्ट में मार्च 2015 में सुनाई थी सजा
पटियाला कोर्ट के सेशन जज पुष्पेंद्र सिंह की अदालत ने कैश फार जॉब स्कैम में मार्च 2015 में अपना फैसला सुनाया। इसमें पूर्व चेयरमैन समेत पीपीएससी के पूर्व चार को सेक्शन 420, 467, 468, 409, 120 बी और सेक्शन सात, 13(2) प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट के तहत सजाएं सुनाईं।