फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Private Schools Organization against PSEB, Mohali news

PSEB को चेतावनी, बोर्ड कक्षाओं के स्टूडेंट्स को ग्रेस अंक न दिए तो जाएंगे हाईकोर्ट

Wed, 31 May 2017 09:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली Updated Wed, 31 May 2017 09:40 AM IST
विज्ञापन
Punjab Private Schools Organization against PSEB, Mohali news
- फोटो : Demo Pic
10वीं और 12वीं की परीक्षा में विद्यार्थियों को ग्रेस अंक नहीं देने का मामला तूल पकड़ गया है। पंजाब प्राइवेट स्कूल्स ऑर्गेनाइजेशन इसके विरोध में आ गई है। एसोसिएशन ने सरकार व पीएसईबी को चेतावनी दी है कि दोनों कक्षाओं के रिजल्ट को रिव्यू किया जाए। साथ ही विद्यार्थियों को ग्रेस अंक दिए जाएं, ताकि बच्चों का कॅरियर को बचाया जा सके। वरना वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे।
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक, पंजाब प्राइवेट स्कूल्स ऑर्गेनाइजेशन ने मंगलवार को फेज-4 स्थित मोहाली प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस की। इस मौके पर संस्था के महासचिव तेजपाल सिंह ने बताया कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने मार्क्स मॉडरेशन पॉलिसी लागू करके धोखा किया है। सीबीएसई समेत सभी बोर्डों ने बच्चों को ग्रेस अंक दिए है, जबकि पीएसईबी के साथ धोखा किया गया है।
विज्ञापन


बोर्ड ने यह पॉलिसी अपना कर 48 साल बाद पास फार्मूला बदला है। इसके तहत बच्चों को ग्रेस अंक नहीं दिए गए। इसके बाद बोर्ड की दोनों कक्षाओं का रिजल्ट काफी खराब रहा है। दोनों कक्षाओं का रिजल्ट करीब 14 फीसदी गिरा है। जबकि कई बच्चों की कंपार्टमेंट आई थी। संस्था के सदस्यों ने बताया कि रिजल्ट आने के बाद रोजाना पांच-छह विद्यार्थी सुसाइड कर रहे हैं। ऐसे में बोर्ड को इस फैसले को बदलना होगा। उन्होंने बताया कि अगर पॉलिसी को लागू नहीं किया जाता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। इस मौके पर प्रधान दीदार सिंह, हरबंस सिंह बादशाहपुर, देवराज, प्रेम मल्होत्रा, हरमिंदर सिंह गुरैया, करनैल सिंह, जसवंत सिंह राजपुरा, बलजीत सिंह रंधवा, नरिंदर कौर सहोता, संतोख मानसा और डॉ. जसविंद सिंह मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


छोटे स्कूलों को दी जाए राहत
एसोसिएशन के महासचिव ने बताया कि छोटे एफिलिएटेड व एसोसिएटेड स्कूलों की अलग कैटेगरी बनाई जाए। इसे लो कॉस्ट प्राइवेट स्कूल नाम रखा जाएगा। इनमें वालंटियर टीचर रखनेे व उन्हें सैलरी देने के अधिकार दिए जाएं। वहीं, इन स्कूलों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित विभिन्न नियमों में छूट दी जाए, ताकि यह स्कूल बढ़िया तरीके से चल पाए। उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में ऐसे पांच हजार स्कूल हैं। इनमें दस लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed