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मोहाली: पूर्व डीजीपी सैनी की तलाश में सुबह चंडीगढ़-पंजाब समेत चार राज्यों में छापे
Fri, 28 Aug 2020 01:47 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 28 Aug 2020 01:47 PM IST
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पंजाब पुलिस पहुंची सुमेध सैनी के घर
- फोटो : अमर उजाला
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लगभग 29 साल पुराने वरिष्ठ आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अगवा व हत्या के मामले में पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को शुक्रवार सुबह गिरफ्तार करने के लिए मोहाली पुलिस की टीमों ने अपनी ताकत झोंक दी। चंडीगढ़ समेत पंजाब, हिमाचल प्रदेश व दिल्ली में एक समय में दबिश दी गई लेकिन सैनी हाथ नहीं लग पाए। वहीं, दोपहर में पुलिस को उस समय बड़ा झटका लगा जब जिला अदालत ने सैनी की गिरफ्तारी पर एक सितंबर तक रोक लगा दी।
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एक दिन पहले गुरुवार को जिला अदालत ने पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की जमानत याचिका पर 29 अगस्त तक फैसला सुरक्षित रख लिया था। लेकिन सैनी की गिरफ्तारी संबंधी कोई रोक नहीं लगाई थी। इधर, हाईकोर्ट ने गुरुवार देर रात फैसला लिया था कि कोविड के कारण शनिवार को अदालत बंद रहेगी। इस पर मोहाली पुलिस की टीमों ने शुक्रवार सुबह सैनी के चंडीगढ़ स्थित घर, मोहाली के फार्महाउस, मंडी, होशियारपुर और दिल्ली में दबिश दी। वहां सैनी नहीं मिले और टीमें नौकरों आदि से बात कर लौट आईं।
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इस बीच सैनी के वकीलों ने जिला अदालत में याचिका दायर कर दी। इसमें कहा गया कि पहले सैनी की इसी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी तो गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी जबकि गुरुवार को इस संबंध में कोई आदेश नहीं दिए गए। उन्होंने अदालत से कहा कि जमानत की अर्जी का निपटारा न होने तक सैनी को गिरफ्तारी से छूट दी जाए। इसके बाद अदालत ने तथ्यों को देखते हुए सैनी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी।
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वहीं, विशेष सरकारी वकील सरतेज नरूला ने कहा कि यह अदालत का अपने फैसले पर यूटर्न है। अगर इस केस में कोई एप्लीकेशन लगाई गई थी तो उन्हें नोटिस क्यों नहीं दिया गया।
ये है मामला
मामला साल 1990 के दशक का है, जब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे। 1991 में उन पर एक आतंकी हमला हुआ। उस हमले में सैनी की सुरक्षा में तैनात चार पुलिसकर्मी मारे गए थे, जबकि सैनी खुद भी जख्मी हो गए थे। उस केस के संबंध में पुलिस ने सैनी के आदेश पर पूर्व आईएएस ऑफिसर दर्शन सिंह मुल्तानी के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी को उठा लिया था।
पुलिस ने उसे हिरासत में रखा और फिर बाद में कहा कि वह पुलिस की गिरफ्त से भाग गया जबकि परिजनों का कहना था कि बलवंत की पुलिस के टॉर्चर से मौत हो गई। 2008 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों पर चंडीगढ़ सीबीआई ने इस मामले में जांच शुरू की, जिसके बाद 2008 में सीबीआई ने सैनी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी आधार पर एफआईआर को खारिज कर दिया था, लेकिन अब नए तथ्य पर पंजाब पुलिस ने 7 मई 2020 को सैनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 364 (अपहरण या हत्या के लिए अपहरण), 201 (साक्ष्य मिटाने के कारण), 344 (गलत तरीके से कारावास), 330 और 120बी (आपराधिक साजिश रचना) के तहत केस दर्ज किया है।
पुलिस ने उसे हिरासत में रखा और फिर बाद में कहा कि वह पुलिस की गिरफ्त से भाग गया जबकि परिजनों का कहना था कि बलवंत की पुलिस के टॉर्चर से मौत हो गई। 2008 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों पर चंडीगढ़ सीबीआई ने इस मामले में जांच शुरू की, जिसके बाद 2008 में सीबीआई ने सैनी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी आधार पर एफआईआर को खारिज कर दिया था, लेकिन अब नए तथ्य पर पंजाब पुलिस ने 7 मई 2020 को सैनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 364 (अपहरण या हत्या के लिए अपहरण), 201 (साक्ष्य मिटाने के कारण), 344 (गलत तरीके से कारावास), 330 और 120बी (आपराधिक साजिश रचना) के तहत केस दर्ज किया है।