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नौकरी के लिए अपनों से दूर रहने का दंश, 'मैं सेट हां' नाटक का मंचन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 22 Mar 2017 10:09 AM IST
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पंजाब कला भवन में हुण मैं सेट हां नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब संगीत नाटक अकादमी की ओर से पंजाब कला भवन में आयोजित दो दिवसीय थिएटर फेस्टिवल के आखिरी दिन ‘हुण मैं सेट हां’ नाटक का मंचन किया गया। इंपैक्ट आर्ट्स थिएटर ग्रुप की ओर से प्रदर्शित किए गए इस नाटक का लेखन वीना शर्मा और निर्देशन बनिंदर जीत सिंह बन्नी ने किया है।
नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि पंजाब के एक स्कूल के प्रिंसिपल पाखर सिंह सरकार की ओर से एक सेमिनार में भाग लेने कनाडा जाते हैं। वहां की बेहतरीन व्यवस्था देखने के बाद वह अपने बच्चे नवदीप गोगी को कनाडा पढ़ने भेज देते हैं। इसके लिए वीजा पास करवाकर वह बैंक से 25 लाख रुपये लोन लेते हैं। कनाडा के जिस कॉलेज में उनके बेटे का दाखिला कराया जाता है वहां पर कोई हॉस्टल नहीं होता है। उन्हें धोखा दे दिया जाता है। इसकेे बाद वह महंगे होटल में रुकता है।
इसकेे बाद नवदीप के पैसे खत्म होने लगते हैं तो वह घर वापस आने की बात कहने लगता है। वह यह बात अपने पिता को बताता है। उसके पिता उसे पैसे भेजते हुए कहते है कि अगर वह घर वापस आएगा तो वह बहुत बेइज्जत होंगे। उन्होंने उसके कनाडा जाने से पहले पूरे गांव में पार्टी दी थी। वहीं नवदीप की मां भी उसे समझाती है। वह कनाडा में चार महीने के बाद भी रोजगार नहीं पाता है। इस कारण उसे परेशानी होती है। इसके बाद वह एक जगह नौकरी करने लग जाता है। वहां उससे टॉयलेट साफ करवाते हैं तो वह नौकरी छोड़ देता है।
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इसके बाद से वह नशे में रहने लगता है। कनाडा में नवदीप को एक दिन उसकी मौसी मिलती है। वह अपने पति से कहकर उसे नौकरी दिलवा देती है। उसके बाद एक साल तक घर वालों से बातचीत नहीं होती है। धीरे धीरे नवदीप माता-पिता सहित सभी रिश्तेदारों को भूल जाता है। वह गम में शराब भी पीने लगता है। नाटक के अंत में कलाकारों ने दिखाया कि वह पढ़ाई कर नौकरी हासिल कर लेता है, लेकिन शराब के नशे में डूब जाता है और सभी रिश्तों को भूल जाता है।
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नाटक में कलाकारों ने दर्शाया कि पंजाब के एक स्कूल के प्रिंसिपल पाखर सिंह सरकार की ओर से एक सेमिनार में भाग लेने कनाडा जाते हैं। वहां की बेहतरीन व्यवस्था देखने के बाद वह अपने बच्चे नवदीप गोगी को कनाडा पढ़ने भेज देते हैं। इसके लिए वीजा पास करवाकर वह बैंक से 25 लाख रुपये लोन लेते हैं। कनाडा के जिस कॉलेज में उनके बेटे का दाखिला कराया जाता है वहां पर कोई हॉस्टल नहीं होता है। उन्हें धोखा दे दिया जाता है। इसकेे बाद वह महंगे होटल में रुकता है।
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इसकेे बाद नवदीप के पैसे खत्म होने लगते हैं तो वह घर वापस आने की बात कहने लगता है। वह यह बात अपने पिता को बताता है। उसके पिता उसे पैसे भेजते हुए कहते है कि अगर वह घर वापस आएगा तो वह बहुत बेइज्जत होंगे। उन्होंने उसके कनाडा जाने से पहले पूरे गांव में पार्टी दी थी। वहीं नवदीप की मां भी उसे समझाती है। वह कनाडा में चार महीने के बाद भी रोजगार नहीं पाता है। इस कारण उसे परेशानी होती है। इसके बाद वह एक जगह नौकरी करने लग जाता है। वहां उससे टॉयलेट साफ करवाते हैं तो वह नौकरी छोड़ देता है।
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इसके बाद से वह नशे में रहने लगता है। कनाडा में नवदीप को एक दिन उसकी मौसी मिलती है। वह अपने पति से कहकर उसे नौकरी दिलवा देती है। उसके बाद एक साल तक घर वालों से बातचीत नहीं होती है। धीरे धीरे नवदीप माता-पिता सहित सभी रिश्तेदारों को भूल जाता है। वह गम में शराब भी पीने लगता है। नाटक के अंत में कलाकारों ने दिखाया कि वह पढ़ाई कर नौकरी हासिल कर लेता है, लेकिन शराब के नशे में डूब जाता है और सभी रिश्तों को भूल जाता है।