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‘गाशा’ में दो दोस्तों की जिंदगी से कश्मीर के हालात को दर्शाया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 03 Apr 2017 09:16 AM IST
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पंजाब कला भवन में नाटक ‘गाशा’ का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कला भवन में अलंकार थिएटर चंडीगढ़ और रिटेलियर ग्रुप दिल्ली की ओर से आयोजित दो दिवसीय थिएटर फेस्टिवल का रविवार को समापन हुआ। थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन नाटक ‘गाशा’ का मंचन किया हैं। इसे दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स के स्टूडेंट्स की ओर से पेश किया गया। इरावती देवी के लिखित नाटक ‘गाशा’ को राहुल तिवारी ने निर्देशित किया।
नाटक कश्मीर में पहले और आज के हालत पर आधारित रहा। यह दो दोस्ताें की कहानी है कि जोकि बचपन के काफी दिनाें के बाद एक दूसरे से मिलते है। इस बीच कश्मीर में किस तरह से हालात बदले और जीवन में दोनाें ने क्या कुछ खोया और पाया उसे बताया गया।
कहानी में मुख्य भूमिका दो दोस्तों की है जोकि कश्मीर में रहा करते थे। दोनों बचपन में एक दूसरे के जिगरी दोस्त थे। इनमें एक कश्मीरी पंडित और दूसरा कश्मीरी मुस्लिम होता हैं। समय के साथ हालात बदलते है और दोनों एक दूसरे से जुदा हो जाते हैं। काफी समय बाद जब वह दोनों एक-दूसरे से मिलते है तब तक हालात बहुत बदल चुके होते हैं। इसके बावजूद वो अपने पुराने दिनाें को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं और जब वर्तमान स्थिति के बारे में चर्चा करते है तो उनका मन काफी दुखी हो जाता है।
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इन कलाकाराें ने किया एक्ट
मयंक कौशिक ने गाशा, मयंक वशिष्ठ ने नासिर, सोनाक्षी रैना ने मामी, महक महाजन ने मां, जोआ खांडे ने दादी, संचिता चावला ने बॉस का और वैभव कौशिक ने कश्मीरी पंडित कर किरदार निभाया। इसके अलावा लाइट पर महिंदर और साउंड पर रवि रहे।
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नाटक कश्मीर में पहले और आज के हालत पर आधारित रहा। यह दो दोस्ताें की कहानी है कि जोकि बचपन के काफी दिनाें के बाद एक दूसरे से मिलते है। इस बीच कश्मीर में किस तरह से हालात बदले और जीवन में दोनाें ने क्या कुछ खोया और पाया उसे बताया गया।
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कहानी में मुख्य भूमिका दो दोस्तों की है जोकि कश्मीर में रहा करते थे। दोनों बचपन में एक दूसरे के जिगरी दोस्त थे। इनमें एक कश्मीरी पंडित और दूसरा कश्मीरी मुस्लिम होता हैं। समय के साथ हालात बदलते है और दोनों एक दूसरे से जुदा हो जाते हैं। काफी समय बाद जब वह दोनों एक-दूसरे से मिलते है तब तक हालात बहुत बदल चुके होते हैं। इसके बावजूद वो अपने पुराने दिनाें को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं और जब वर्तमान स्थिति के बारे में चर्चा करते है तो उनका मन काफी दुखी हो जाता है।
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इन कलाकाराें ने किया एक्ट
मयंक कौशिक ने गाशा, मयंक वशिष्ठ ने नासिर, सोनाक्षी रैना ने मामी, महक महाजन ने मां, जोआ खांडे ने दादी, संचिता चावला ने बॉस का और वैभव कौशिक ने कश्मीरी पंडित कर किरदार निभाया। इसके अलावा लाइट पर महिंदर और साउंड पर रवि रहे।