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पंजाब, हरियाणा के हर थाने और लॉकअप पर होगी 'तीसरी नजर'

Tue, 11 Jul 2017 09:24 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 11 Jul 2017 09:24 AM IST
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Punjab, Haryana Police stations will be monitored from cctv cameras
पंजाब पुलिस - फोटो : File Photo
पंजाब, हरियाणा के हर थाने के प्रवेश और निकास द्वार के साथ ही लॉकअप पर तीसरी आंख से निगरानी होगी। लोगों को अवैध हिरासत में रखने के बढ़ते मामलों वाली याचिका पर संज्ञान लेते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह आदेश दिए। 
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अवैध हिरासत संबंधी मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अमोल रत्न सिंह की बेंच ने हरियाणा और पंजाब के डीजीपी को आदेश दिए कि सीसीटीवी लगाने को लेकर वे अपनी स्टेटस रिपोर्ट अगली सुनवाई के दौरान पेश करें। इससे पहले हरियाणा सरकार की ओर से बताया गया कि उन्होंने हार्टोन को सीसीटीवी इंस्टॉल करने का एस्टीमेट बनाने के लिए पत्र लिखा है और इसके लिए फंड आदि की मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही इन्हें लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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वहीं, पंजाब सरकार की ओर से बताया गया कि सीसीटीवी खरीदने का फैसला कर लिया है और जल्द ही आदेशों का पालन किया जाएगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश कहा कि व्यवस्था इस तरह की होनी चाहिए कि किसी के साथ भी अन्याय न होने पाए। 
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जांच अधिकारी करे वीडियो रिकार्डिंग

Punjab, Haryana Police stations will be monitored from cctv cameras
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
जांच अधिकारी करे वीडियो रिकार्डिंग
हाईकोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी जब बयान दर्ज करे तो उसकी वीडियो रिकार्डिंग की जाए। इससे कोर्ट के सामने बयान पेश करने और वहां पर आरोपों को साबित करने में आसानी हो और यह भी सुनिश्चित हो कि दबाव में कोई बयान न हो। वहीं, जिन मामलों में घटनास्थल से आरोपी भागे हैं, उनकी रिकार्डिंग अनिवार्य रूप से की जाए। खास तौर पर एनडीपीएस मामलों में इसका पालन किया जाना चाहिए।

मोबाइल पेट्रोल यूनिट करे वीडियो रिकार्डिंग
हाईकोर्ट ने कहा कि मोबाइल पेट्रोल यूनिट वीडियो रिकार्डिंग करे। इससे वहां की जो सटीक स्थिति है, वह रिकार्ड हो सके। इससे ऐसे मामलों में कमी आएगी, जिसमें किसी को गिरफ्तार कहीं ओर से किया जाता है और गिरफ्तारी कहीं ओर से दिखाई जाती है। ऐेसे मामलों में फोन की लोकेशन से मिलान कर सही स्थिति कोर्ट के समक्ष रखी जा सकेगी। खास तौर पर जिन मामलों में सजा 10 साल से अधिक की है, उसमें यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित हो।
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