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चंडीगढ़ निगम चुनाव को हाईकोर्ट की हरी झंडी, दोनों याचिकाएं भी खारिज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 15 Dec 2016 08:58 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वीरवार को फैसला सुनाते हुए चंडीगढ़ नगर निगम के 18 दिसंबर को तय चुनाव को हरी झंडी दे दी है। हाईकोर्ट ने प्रशासन की ओर से वार्ड को रिजर्व करने के लिए जारी की गई नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इससे अब चुनाव का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस स्नेह पराशर ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसी भी आधार पर इसे स्थगित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा की कोर्ट के समक्ष महज दो सवाल थे, जिसको लेकर फैसला सुनाना था। एक यह की क्या यह याचिका दाखिल की जा सकती है और दूसरा यह कि चुनाव प्रक्रिया शुरू किये जाने के बाद इसे संविधान के अनुच्छेद-234 जेड (जी) के तहत इसे स्थगित किया जा सकता है या नहीं।
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि निगम चुनाव से पहले वार्डों को आरक्षित किये जाने के खिलाफ तभी याचिका दायर की जा सकती है, जब अधिक वार्डों को या गलत तरीके से आरक्षित किया गया हो, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है। याचिका के मेंटेनेबिलिटी या सरल भाषा में कहें कि इस चुनावी प्रक्रिया में हाईकोर्ट के दखल देने का मामला है, तो हाईकोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप लायक कोई भी आधार न होने की बात कही।
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हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट द्वारा इसी प्रकार के मामलों में दिए गए आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि इस याचिका में ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल दे।
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जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस स्नेह पराशर ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसी भी आधार पर इसे स्थगित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा की कोर्ट के समक्ष महज दो सवाल थे, जिसको लेकर फैसला सुनाना था। एक यह की क्या यह याचिका दाखिल की जा सकती है और दूसरा यह कि चुनाव प्रक्रिया शुरू किये जाने के बाद इसे संविधान के अनुच्छेद-234 जेड (जी) के तहत इसे स्थगित किया जा सकता है या नहीं।
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अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि निगम चुनाव से पहले वार्डों को आरक्षित किये जाने के खिलाफ तभी याचिका दायर की जा सकती है, जब अधिक वार्डों को या गलत तरीके से आरक्षित किया गया हो, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है। याचिका के मेंटेनेबिलिटी या सरल भाषा में कहें कि इस चुनावी प्रक्रिया में हाईकोर्ट के दखल देने का मामला है, तो हाईकोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप लायक कोई भी आधार न होने की बात कही।
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हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट द्वारा इसी प्रकार के मामलों में दिए गए आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि इस याचिका में ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल दे।
क्या है मामला
मेयर अरुण सूद
मामले को लेकर रामदरबार के डॉ. सतपाल गोयल ने नगर निगम के वार्डों को आरक्षित किये जाने की नोटिफिकेशन को हाईकोर्ट में चुनती दी थी। कहा था कि वो सामान्य वर्ग से हैं और रामदरबार से नगर निगम पार्षद के पद का चुनाव लड़ना चाहते हैं।
रामदरबार जोकि वार्ड नंबर 23 हैं उसे वर्ष 2006 के निगम चुनाव के समय अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया था। साल 2011 के निगम चुनाव के समय इस वार्ड को महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया।
अब वर्ष 2016 दिसंबर के तीसरे सप्ताह में होने वाले निगम पार्षद के चुनाव के लिए वार्ड नंबर 23 को एक बार फिर अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
याची ने आरोप लगाया था कि यह नोटिफिकेशन पूरी तरह न केवल संविधान के 74 वें संशोधन का उल्लंघन है, बल्कि गैरकानूनी और असंवैधानिक भी है। ऐसे में याची ने इसी आधार पर नोटिफिकेशन को रद्द करने और चुनाव स्थगित करने की हाईकोर्ट से मांग की थी।
रामदरबार जोकि वार्ड नंबर 23 हैं उसे वर्ष 2006 के निगम चुनाव के समय अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया था। साल 2011 के निगम चुनाव के समय इस वार्ड को महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया।
अब वर्ष 2016 दिसंबर के तीसरे सप्ताह में होने वाले निगम पार्षद के चुनाव के लिए वार्ड नंबर 23 को एक बार फिर अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
याची ने आरोप लगाया था कि यह नोटिफिकेशन पूरी तरह न केवल संविधान के 74 वें संशोधन का उल्लंघन है, बल्कि गैरकानूनी और असंवैधानिक भी है। ऐसे में याची ने इसी आधार पर नोटिफिकेशन को रद्द करने और चुनाव स्थगित करने की हाईकोर्ट से मांग की थी।