हरियाणाः 25 हजार कर्मचारियों को हाईकोर्ट का बड़ा झटका, सिंगल बेंच के आदेश पर लगाया रोक
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हरियाणा के विभिन्न बोर्डों, कारपोरेशन आदि में काम करने वाले करीब 25 हजार से अधिक कर्मचारियों की नियमित होने की आस को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। सिंगल बेंच ने इन कर्मचारियों को पक्का करने के अगस्त में आदेश जारी किए थे जिसके खिलाफ हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की है। अब खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सिंगल बेंच के सामने याचिकाकर्ता रहे कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हरियाणा के बोर्ड और कारपोरेशन के कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह वर्षों से अस्थायी तौर पर काम कर रहे हैं। कई कर्मी तो 20 से 30 वर्षों से अस्थायी तौर पर कार्यरत हैं, बावजूद उन्हें रेगुलर नहीं किया गया है। हाईकोर्ट को बताया गया था कि सरकार ने वर्ष 2011 में एक पॉलिसी बनाई थी, जिसमें तय किया गया था कि वे कर्मचारी, जो 10 अप्रैल 2006 तक दस वर्षों से कार्यरत हैं, उन्हें रेगुलर किया जाएगा।
बावजूद इसके इन कर्मियों को रेगुलर नहीं किया गया। सरकार ने इन कर्मियों को यह कहते हुए रेगुलर करने से इंकार कर दिया था कि यह कर्मी जिस पद पर रेगुलर होने की मांग कर रहे हैं, उस पद की शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते हैं। सिंगल बेंच ने सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए कहा था कि जो कर्मचारी इतने लंबे समय तक काम कर रहे हैं, उनके अनुभव को ही उनकी योग्यता माना जा सकता है।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के इस विषय के कई फैसलों का हवाला देते हुए सिंगल बेंच ने सभी अस्थायी कर्मियों को 1 फरवरी तक रेगुलर किए जाने के हरियाणा सरकार को आदेश दे दिए थे। सिंगल बेंच ने इन कर्मियों को एक कैडर बना रेगुलर करने के आदेश दिए थे। साथ ही सरकार को चेतावनी भी दी थी कि अगर 1 फरवरी तक सरकार इस आदेश को लागू नहीं करती है तो सरकार को प्रत्येक याचिकाकर्ता को 50-50 हजार रुपये जुर्माना भर इन सभी के खातों में जमा करवाना होगा।
अब हरियाणा सरकार ने 4 अक्तूबर के सिंगल बेंच के इस फैसले के खिलाफ चीफ जस्टिस की डबल बेंच में अपील दायर कर कहा है कि सिंगल बेंच ने जो आदेश दिए हैं वह न सिर्फ याचिकाकर्ताओं बल्कि सभी अस्थायी कर्मियों पर लागू हो जाएंगे और यह आदेश बैक डेट से लागू करने होंगे। इस तरह जो इन कर्मियों से पहले रेगुलर हुए हैं, उनमें से ज्यादातर इनसे जूनियर हो जाएंगे।
डबल बेंच ने सरकार की दलीलें सुनने के बाद सिंगल बेंच के इस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है और सभी याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। एजी बीआर महाजन ने हाईकोर्ट को बताया था कि सिंगल बेंच के फैसले के चलते 25 हजार से अधिक कर्मियों को बैक डेट से रेगुलर करना पड़ता है, जो बेहद मुश्किल है।