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Highcourt: प्रेमी जोड़े की तलाश में वकील की पत्नी को बनाया था बंधक, हाईकोर्ट ने SIT को दिए जांच के आदेश
Tue, 07 Mar 2023 11:35 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 07 Mar 2023 11:35 AM IST
सार
हरियाणा पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि टीम के तीन सदस्यों को निलंबित किया जा चुका है। इसके बाद बताया गया कि पुलिस कमिश्नर गुरुग्राम ने सभी तथ्यों, सीसीटीवी फुटेज व बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट में पाया कि वकील की ओर से पुलिस टीम पर लगाए आरोप साबित नहीं होते हैं।
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विस्तार
प्रेमी जोड़े की तलाश में गुरुग्राम पुलिस के बिना वारंट वकील के घर घुसने और उसकी पत्नी को बंधक बनाने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निष्पक्ष व पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का पंजाब पुलिस की एसआईटी को आदेश दिया है। इस दौरान गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर ने बताया कि विभागीय जांच में आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए हैं। हाईकोर्ट ने पीड़ित वकील को विभागीय जांच की रिपोर्ट को चुनौती देने की छूट देते हुए याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी।
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याचिका दाखिल करते हुए गुरुग्राम निवासी प्रेमी जोड़े ने सुरक्षा की मांग की थी। प्रेमी जोड़े की सुरक्षा याचिका दाखिल करने वाले वकील से गुरुग्राम पुलिस ने संपर्क किया था और हाईकोर्ट में आकर मुलाकात की थी। पुलिस टीम ने प्रेमी जोड़े का पता बताने पर 10 लाख रुपये की रिश्वत की पेशकश भी की थी। इसके बाद पुलिस टीम वकील के घर पहुंची और वकील की पत्नी को बंधक बनाकर फोन भी छीन लिया। इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर छापा मारने वाली टीम को याचिका में प्रतिवादी बना लिया था।
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हरियाणा पुलिस ने बताया था कि टीम के तीन सदस्यों को निलंबित किया जा चुका है। इसके बाद बताया गया कि पुलिस कमिश्नर गुरुग्राम ने सभी तथ्यों, सीसीटीवी फुटेज व बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट में पाया कि वकील की ओर से पुलिस टीम पर लगाए आरोप साबित नहीं होते हैं। सुनवाई के दौरान पंजाब पुलिस के डीएसपी क्राइम अगेंस्ट वुमन जतिंदर पाल सिंह ने बताया कि इस मामले में नयागांव में दर्ज एफआईआर की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है। एसआईटी के प्रमुख आईपीएस दर्पण आहलुवालिया बनाए गए हैं। हाईकोर्ट ने इस पर संतुष्टि जताते हुए कहा कि हमें विश्वास है कि एसआईटी जल्द ही कानून के अनुरूप अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। वहीं हरियाणा के पुलिस अधिकारियों को विभागीय जांच में क्लीन चिट का विरोध करने पर हाईकोर्ट ने एडवोकेट को छूट दी कि यदि वह चाहे तो इस रिपोर्ट को कानून के अनुरूप चुनौती दे सकते हैं।
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