पंजाब: एनआरआई की संपत्ति, वित्तीय व अन्य समस्याओं का समय पर होगा निपटारा, सरकार ने तैयार किया खाका
चुनाव से पहले एनआरआई की समस्याओं को पंजाब सरकार ने निपटाने का खाका तैयार किया है। सरकार युवाओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ग्रीष्मकालीन पाठ्यक्रम शुरू करेगी।
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विदेश में रहने वाले पंजाबियों को जायदाद और वित्तीय मामलों में आने वाली कठिनाइयों समेत अन्य समस्याओं को हल करने के लिए पंजाब सरकार ने खाका तैयार कर लिया है। प्रवासी पंजाबियों की नई पीढ़ी को अपनी विरासत और सभ्याचार से जोड़ने के लिए भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
यह जानकारी प्रवासी भारतीय मामलों संबंधी मंत्री परगट सिंह ने मंगलवार को पंजाब भवन में दी। परगट सिंह ने कहा कि प्रवासी भारतीय मामलों संबंधी मंत्री ने कहा कि वह महसूस करते हैं कि प्रवासी पंजाबियों के लिए उपयुक्त बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए। एक प्रभावी शिकायत निवारण और फीडबैक विधि स्थापित की जाएगी।
प्रवासी भारतीयों की सभी शिकायतों को एक ही छत के नीचे लाया जाएगा। प्रवासियों को राज्य में हो रही घटनाओं से अवगत करवाने के लिए वेबसाइट और एप के द्वारा प्रभावशाली संचार चैनल स्थापित किए जाएंगे। इस आनलाइन पोर्टल के जरिये शिकायतों के निपटारे के लिए विभाग पूरी तरह फॉलोअप करता है।
परगट सिंह ने कहा कि प्रवासी पंजाबियों की तरफ से पंजाब के इतिहास, विरासत, पंजाबी भाषा आदि के बारे अपने बच्चों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान जानकारी देने के लिए थोड़े समय के कोर्स करवाने की मांग को पूरा करते हुए पंजाब के विश्वविद्यालयों में थोड़े समय के समर स्कूल कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिससे नई पीढ़ी को पंजाब के सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से अवगत करवाया जा सके और उनको विरासत के नजदीक लाया जा सके। इसके अलावा राज्य के साथ जोड़ने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘होम स्टे’ की सुविधा शुरू की जाएगी।
परगट सिंह ने कहा कि पंजाब के सामाजिक, आर्थिक ढांचे के विकास में प्रवासी पंजाबियों का बहुत योगदान है। पंजाबियों ने सख्त मेहनत और उद्यमी गुणों के कारण दुनिया भर में यश अर्जित किया है। मौजूदा समय पंजाबियों की करीब तीसरी पीढ़ी विश्वभर में रह रही है। सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि नौजवान पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपनी जड़ों से अलग हो रहे हैं।
ज्यादातर प्रवासी भारत में अपनी जायदाद सिर्फ इस कारण बेच रहे हैं, क्योंकि उनकी अगली पीढ़ी पंजाब में नहीं आना चाहती और वह अपने माता-पिता की जायदाद में भी रुचि नहीं रखते। जमीन की बिक्री न सिर्फ पंजाबियों को उनकी मां से छीन लेगी, बल्कि राज्य के सामाजिक-आर्थिक ढांचे पर भी बुरा प्रभाव डालेगी।
यह हमारे लिए सोचने वाली बात है। इन कारणों की आलोचना और इसके हल के लिए उनसे संबंधित पक्षों के साथ विचार करके यह भावी रूपरेखा तैयार की गई है। इस मौके पर एनआरआई कमीशन सदस्य दलजीत सिंह सहोता, प्रवासी भारतीय मामलों संबंधी विभाग के सलाहकार सीए अश्वनी कुमार और गुरपाल सिंह उपस्थित रहे।