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संकट में हजारों छात्रों का भविष्य: पंजाब पर पीयू के स्कॉलरशिप के 29.63 करोड़ बकाया, बच्चों से मांगी जा रही फीस

Wed, 10 Jul 2024 03:00 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रियंका ठाकुर, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रियंका ठाकुर, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 10 Jul 2024 03:00 PM IST
सार

सत्र 2022-23 के 4121 विद्यार्थियों में से कुछ को स्कॉलरशिप के 40 प्रतिशत पैसे मिले हैं और कुछ को कोई अमाउंट नहीं मिला है। वहीं सत्र 2020-21 और 2022-23 के लिए पंजाब सरकार ने पीयू को बताया है कि वह स्कॉलरशिप के पैसे विद्यार्थियों के खाते में डाल चुके हैं। 

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Punjab government owes 29 crore rupess for post-matric scholarship to Panjab University
पंजाब यूनिवर्सिटी - फोटो : फाइल

विस्तार

एक तरफ पंजाब सरकार द्वारा शिक्षा को प्राथमिकता देने के तमाम दावे किए जा रहे हैं और दूसरी ओर वह आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप के पैसे नहीं दिए जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार के पंजाब विश्विविद्यालय को पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के 29 करोड़ 63 लाख 12 हजार 234 रुपये बकाया है।

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सत्र 2019-20 तक पंजाब सरकार स्कॉलरशिप के पैसे सीधा पीयू को देती थी और सत्र 2020-21 से डायरेक्ट बेनिशिफिश्यरी ट्रांसफर योजना आने से विद्यार्थियों के खाते में डालने लगी। पंजाब सरकार ने 2019-20 तक के 17.67 करोड़ रुपये पीयू को नहीं दिए हैं। इसके अलावा सत्र 2020-21 के बाद से सरकार द्वारा लगातार विद्यार्थयों को स्कॉलरशिप के पैसे देने में कोताही बरती गई है। 
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पीयू को कुल पीएमएस स्कॉलरशिप के जरिए पंजाब सरकार और विद्यार्थियों से 36.98 करोड़ रुपये फीस का नहीं मिला है। पिछले तीन सत्रों में पंजाब के एससी श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर 10971 विद्यार्थियों ने पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के जरिए पंजाब विश्वविद्यालय और उसके कांस्टिट्यूएंट कॉलेजों में दाखिला लिया जो अभी संस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से सत्र 2023-24 के 3220 में से एक विद्यार्थी के खाते में भी स्कॉलरशिप के पैसे नहीं आए हैं जिसमें 1187 पीयू कैंपस के हैं और 2033 कांस्टिट्यूऐंट कॉलेजों के। 
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सत्र 2022-23 के 4121 विद्यार्थियों में से कुछ को स्कॉलरशिप के 40 प्रतिशत पैसे मिले हैं और कुछ को कोई अमाउंट नहीं मिला है। वहीं सत्र 2020-21 और 2022-23 के लिए पंजाब सरकार ने पीयू को बताया है कि वह स्कॉलरशिप के पैसे विद्यार्थियों के खाते में डाल चुके हैं। 

हालांकि कई विद्यार्थियों का कहना है कि उनके खाते में पैसे नहीं आए हैं। सत्र 2023-24 तक विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप के पैसे न मिलने तक फीस भरने के लिए मजबूर नहीं किया जाता था लेकिन इस सत्र से पीयू उन्हें पहले फीस जमा करने के लिए कह रही है। ऐसे में विद्यार्थियों पर दोनों ओर से गाज गिर रही है, पीयू फीस जमा करने के लिए कह रही है और पंजाब सरकार पैसे नहीं दे रही। इसे लेकर विद्यार्थी सोमवार से कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन पर बैठे हैं। 

अंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन से गौतम ने कहा कि जिन बच्चों को स्कॉलरशिप के पैसे मिल गए हैं और वह फीस जमा नहीं कर रहे उन पर कानून कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन जिन बच्चों को पैसे नहीं मिले हैं उन्हें फीस भरना अनिवार्य नहीं करना चाहिए। पीयू स्कॉलरशिप के पैसे आने से पूर्व फीस भरने के निर्णय पर गठित समिति द्वारा विचार किया जा रहा है और अभी कई कोर्स की फीस जमा करवाने की डेडलाइन 10 जुलाई है।


11 सालों में सरकारें आईं-गई, नहीं दिए शिक्षा के लिए पैसे 
पिछले 11 सालों में अकाली दल और कांग्रेस की सरकारें बनीं लेकिन किसी ने शिक्षा को त्वज्जो नहीं दिया और साल दर साल स्कॉलरशिप को पेंडिंग पैसा बढ़ता गया। सत्र 2016-17 को पीयू के लिए इतना खराब रहा कि बादल सरकार ने पीयू कैंपस और रीजनल सेंटर को स्कॉलरशिप के 2.31 करोड़ रुपये में से एक पैसा तक नहीं दिया। स्काॅलरशिप के पैसे न मिलने से कई विद्यार्थियों की डिग्री तो पूरी हो गई है लेकिन उन्हें डिग्री मिली नहीं है क्योंकि स्कॉलरशिप के पैसे नहीं मिले और न ही फीस भरी गई। स्काॅलरशिप के साल 2013 से 2017-18 तक पहले बादल सरकार और 2018-19 से 2021-22 तक कैप्टन अमृंदर सिंह ने कभी स्कॉलरशिप के पूरे पैसे पंजाब विश्वविद्यालय को नहीं दिए। वर्तमान सरकार द्वारा भी पिछला बकाया तो दूर वर्तमान के पैसे तक नहीं दिए जा रहे।

 

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