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Punjab: 8000 अफसरों को फील्ड में उतारा, पराली जलाने के केसों को 50 फीसदी कम नहीं कर पाई मान सरकार

Thu, 23 Nov 2023 01:54 PM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 23 Nov 2023 01:54 PM IST
सार

भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा कि पंजाब में 70 फीसदी छोटे व गरीब किसान हैं। सरकार दावों के विपरीत इन सभी किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनें उपलब्ध नहीं करा सकी। जिनको मिली भी, वह इन मशीनों को चलाने के लिए बड़े ट्रैक्टर महंगे किराये पर कहां से लाते।

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Punjab government failed to achieve target of 50 percent reduction in stubble burning cases
पंजाब में जल रही पराली। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट से दो बार फटकार के बावजूद पंजाब सरकार इस बार पराली जलाने के मामलों में बीते साल के मुकाबले 50 फीसदी की कमी का तय लक्ष्य पाने में फेल साबित हुई है। पंजाब पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को लेकर आए साल दिल्ली व केंद्र सरकार के निशाने पर रहता है। 

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इससे बचने को मान सरकार ने इस बार पराली जलाने के मामलों में 50 फीसदी कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन सरकार तकरीबन 30 फीसदी तक की कमी ही कर सकी है। हालांकि इसे पाने के लिए सरकार ने पूरी ताकत व मशीनरी भी झोंक दी थी। वैसे भी अब इस लक्ष्य को पाना नामुमकिन ही लग रहा है, क्योंकि धान की कटाई भी पूरी हो चुकी है। जल्द ही पराली जलाने की सैटेलाइट के जरिये मॉनिटरिंग भी बंद होने वाली है।
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दिल्ली तक पहुंचता है धुआं
पंजाब में धान की कटाई के बाद पराली जलाने से सूबे की आबो-हवा तो दूषित होती ही है, साथ ही दिल्ली तक इसका धुआं पहुंचने से वहां के लोगों की सांसों पर भी आफत बन आती है। इस समस्या के समाधान के लिए मान सरकार ने इस बार बीते साल की तुलना में पराली जलाने के केसों में 50 फीसदी तक कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। 

इसे पाने के लिए सरकार ने विभिन्न विभागों पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खेतीबाड़ी विभाग से लेकर रेवन्यू विभाग और जिला स्तरों पर डिप्टी कमिश्नरों व उनकी टीम को पराली जलाने से रोकने के लिए फील्ड में उतार रखा है। करीब 8000 अधिकारी व मुलाजिम फील्ड में जहां लगातार किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसानों के बारे में जागरूक करते रहे हैं, वहीं कड़ी मॉनिटरिंग भी की जाती रही है। सख्ती करते हुए किसानों के खिलाफ पर्चे दर्ज किए गए। लैंड रिकार्ड में रेड एंट्रियां की गईं और लाखों रुपये के जुर्माने लगाए गए। बावजूद इसके सरकार अपने लक्ष्य को पाने में नाकाम रही है। 

आंकड़ों के मुताबिक बीते साल 2022 में जहां 22 नवंबर तक पराली जलाने के 49604 मामले रिपोर्ट हो चुके थे, वहीं इस साल अब तक पराली जलाने के 36118 मामले सामने आ चुके हैं। बीते साल की तुलना में पराली जलाने के मामलों में तकरीबन 30 फीसदी की ही कमी दर्ज की गई है।

पीपीसीबी के चेयरमैन आदर्श पाल विग ने कहा कि भले ही पिछले साल के मुकाबले इस बार तय लक्ष्य के मुताबिक पराली जलाने के मामलों में 50 फीसदी की कमी नहीं की जा सकी है, लेकिन यह समस्या इतनी बड़ी है कि इस पर इतनी जल्द अंकुश लगाना आसान नहीं है। इस बार पराली जलाने में 30 फीसदी की कमी आई है। उम्मीद है कि अगले साल मामलों में और कमी आएगी।


प्रति एकड़ मिले 3000-5000 रुपये मुआवजा
भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा कि पंजाब में 70 फीसदी छोटे व गरीब किसान हैं। सरकार दावों के विपरीत इन सभी किसानों को पराली प्रबंधन की मशीनें उपलब्ध नहीं करा सकी। जिनको मिली भी, वह इन मशीनों को चलाने के लिए बड़े ट्रैक्टर महंगे किराये पर कहां से लाते। सरकार को चाहिए कि पराली प्रबंधन के लिए किसानों को प्रति एकड़ 3000 से 5000 रुपये तक मुआवजा दिया जाए। वर्ना यह समस्या ऐसे ही बनी रहेगी। उन्होंने साफ कहा कि इस समस्या का हल डर पैदा करने से नहीं होगा।

खेतीबाड़ी विभाग के डायरेक्टर जसवंत सिंह के मुताबिक कोआप्रेटिव सोसाइटियों व विभाग के जिला दफ्तरों के जरिये छोटे व गरीब किसानों तक भी पराली प्रबंधन मशीनें पहुंचाई गई हैं। इसके अलावा इस बार पराली के प्रबंधन के लिए 23500 मशीनें सब्सिडी पर दी जानी थीं, जिसमें से करीब 18800 मशीनें दी गई हैं।

बीते साल के मुकाबले जिला वाइज मामले, संगरूर दोनों साल टॉप पर
जिला                  2022                  2023

संगरूर                5237                    5565
फिरोजपुर             4275                    3322
मानसा                2791                     2235
मोगा                3583                       2596
मुक्तसर              3767                    1563
तरनतारन            3180                     2012
बठिंडा               4550                     2900
बरनाला             2904                     2266
अमृतसर            1538                     1567
पटियाला            3333                     1859
फरीदकोट           2680                     1955
जालंधर             1378                     1172
लुधियाना            2667                     1770

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