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पंजाब में आया कैप्टन राज, अब पूरी हो सकती है चंडीगढ़ की ये ख्वाहिश
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 12 Mar 2017 09:16 AM IST
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VP singh badnaur
- फोटो : Amar Ujala
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पंजाब में राजनीतिक बदलाव की धमक चंडीगढ़ में भी सुनाई पड़ सकती है। राजनीतिक पार्टियों पर तो असर पड़ेगा ही, साथ ही राजनीतिक गलियारों में चंडीगढ़ के लिए अलग से प्रशासक नियुक्त करने की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। भाजपा शुरू से ही चंडीगढ़ के लिए अलग से प्रशासक नियुक्त करने की मांग करती रही है।
स्थानीय नेताओं ने भाजपा हाईकमान सेे इस संबंध में अपनी इच्छा जाहिर भी कर दी है। यदि स्थानीय नेताओं की बातों को हाईकमान गंभीरता से लेता है तो जल्द ही यूटी के लिए अलग से प्रशासक की नियुक्ति की जा सकती है। अभी इसका चार्ज पंजाब के गवर्नर वीपी सिंह बदनौर के पास है। हालांकि इस बात को लेकर पंजाब की नई सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव भी हो सकता है।
बादल के दबाव में बदल दिया था फैसला
भाजपा की केंद्र सरकार शुरू से ही ऐसा बदलाव चाहती थी। पिछले साल पंजाब के गवर्नर की नियुक्ति के दौरान ही चंडीगढ़ के लिए अलग से प्रशासक के लिए रिटायर्ड आईएएस अफसर केजे अल्फोंस की नियुक्ति कर दी थी। लेकिन बादल सरकार के दबाव के आगे केंद्र ने 24 घंटे के भीतर अपने फैसले को पलट दिया था। बादल सरकार नहीं चाहती थी कि चंडीगढ़ के लिए अलग से प्रशासक नियुक्त किया जाए। दरअसल पंजाब सरकार का मानना था कि यदि ऐसा होता है तो पंजाब में संदेश जाएगा कि चंडीगढ़ से पंजाब का दबदबा कम हो रहा है।
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स्थानीय नेताओं ने भाजपा हाईकमान सेे इस संबंध में अपनी इच्छा जाहिर भी कर दी है। यदि स्थानीय नेताओं की बातों को हाईकमान गंभीरता से लेता है तो जल्द ही यूटी के लिए अलग से प्रशासक की नियुक्ति की जा सकती है। अभी इसका चार्ज पंजाब के गवर्नर वीपी सिंह बदनौर के पास है। हालांकि इस बात को लेकर पंजाब की नई सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव भी हो सकता है।
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बादल के दबाव में बदल दिया था फैसला
भाजपा की केंद्र सरकार शुरू से ही ऐसा बदलाव चाहती थी। पिछले साल पंजाब के गवर्नर की नियुक्ति के दौरान ही चंडीगढ़ के लिए अलग से प्रशासक के लिए रिटायर्ड आईएएस अफसर केजे अल्फोंस की नियुक्ति कर दी थी। लेकिन बादल सरकार के दबाव के आगे केंद्र ने 24 घंटे के भीतर अपने फैसले को पलट दिया था। बादल सरकार नहीं चाहती थी कि चंडीगढ़ के लिए अलग से प्रशासक नियुक्त किया जाए। दरअसल पंजाब सरकार का मानना था कि यदि ऐसा होता है तो पंजाब में संदेश जाएगा कि चंडीगढ़ से पंजाब का दबदबा कम हो रहा है।
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अलग से प्रशासक नियुक्त होने से क्या होगा
VP singh badnaur
- फोटो : File Photo
शहरवासी भी यही चाहते है कि शहर का अलग से प्रशासक हो जो कि सिर्फ शहर के कार्यों को ही देखे। आतंकवाद से पहले शहर का अलग चीफ कमिश्नर होता था।
26 साल से चली आ रही परंपरा
चंडीगढ़ अशांत क्षेत्र की अधिसूचना पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश से रद्द कर चुका है। 26 साल पहले पंजाब सहित चंडीगढ़ को डिस्टर्ब एरिया घोषित करते हुए शहर में चीफ कमिश्नर का पद खत्म करके पंजाब के गवर्नर को शहर का प्रशासक बनाया गया था। लेकिन अब चंडीगढ़ अशांत क्षेत्र में नहीं आता है।
अलग से प्रशासक नियुक्त होने से क्या होगा
अगर शहर में अलग से प्रशासक नियुक्त हो जाए तो हर मामलों को शहर में निपटाया जा सकेगा। इस समय प्रशासन हर मामला एमएचए को निर्णय लेने के लिए भेज देता है जिस कारण मामले कई साल तक केंद्र में ही लटके रहते हैं। इसके साथ ही सचिवालय से हर फाइल गवर्नर हाउस जाती है जिस कारण निर्णय होने में कई बार देरी हो जाती है। प्रशासक अलग से नियुक्त होने पर उनका कार्यालय यूटी सचिवालय में ही होगा ऐसे में वह काफी आसानी से प्रशासक को मिल पाएंगे।
26 साल से चली आ रही परंपरा
चंडीगढ़ अशांत क्षेत्र की अधिसूचना पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश से रद्द कर चुका है। 26 साल पहले पंजाब सहित चंडीगढ़ को डिस्टर्ब एरिया घोषित करते हुए शहर में चीफ कमिश्नर का पद खत्म करके पंजाब के गवर्नर को शहर का प्रशासक बनाया गया था। लेकिन अब चंडीगढ़ अशांत क्षेत्र में नहीं आता है।
अलग से प्रशासक नियुक्त होने से क्या होगा
अगर शहर में अलग से प्रशासक नियुक्त हो जाए तो हर मामलों को शहर में निपटाया जा सकेगा। इस समय प्रशासन हर मामला एमएचए को निर्णय लेने के लिए भेज देता है जिस कारण मामले कई साल तक केंद्र में ही लटके रहते हैं। इसके साथ ही सचिवालय से हर फाइल गवर्नर हाउस जाती है जिस कारण निर्णय होने में कई बार देरी हो जाती है। प्रशासक अलग से नियुक्त होने पर उनका कार्यालय यूटी सचिवालय में ही होगा ऐसे में वह काफी आसानी से प्रशासक को मिल पाएंगे।
केंद्र सरकार पहले से ही तैयार, अल्फोंस के नाम की घोषणा भी की थी
केंद्र सरकार का जो भी फैसला होगा वह मान्य होगा। हालांकि चंडीगढ़ के निवासी तो चाहते ही है कि पंजाब के गवर्नर के पास प्रशासक का चार्ज नहीं होना चाहिए। शहर के लिए अकेला प्रशासक नियुक्त होना केंद्र शासित शब्द को और उजागर करता है।
संजय टंडन, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
शहर के लोगों की तो शुरू से ही यह मांग रही है कि केंद्र सरकार यूटी के लिए अलग से प्रशासक या चीफ कमिश्नर लगाए। अब ऐसा होना चाहिए।
हरमोहन धवन, पूर्व केंद्रीय मंत्री व सीनियर बीजेपी नेता
यह काफी चर्चा का विषय है । लेकिन मेयर इन काउंसिल और मेट्रो पोलिटन काउंसिल का गठन जरूर होना चाहिए । इनकेप्रमुख राजनेता होंगे, जिससे लोगों के अधिकार मजबूत होंगे क्योंकि लोगों की जनप्रतिनिधियों से ज्यादा उम्मीद होती है। सलाहकार की जगह मुख्य सचिव का पद होना चाहिए।
पवन बंसल, पूर्व रेल मंत्री व कांग्रेस नेता
पंजाब के साथ चंडीगढ़ का टैग हटना चाहिए। यह सिर्फ तभी हो सकता है कि जब शहर का अलग से प्रशासक हो। इस समय शहरवासियों से प्रशासक को मिलने के लिए गवर्नर हाउस जाना पड़ता है। प्रोटोकाल के कारण गवर्नर से मिलना आसान नहीं है लेकिन अगर प्रशासक अलग से नियुक्त होगा तो अन्य अधिकारियों की तरह उनसे कभी भी मिला जा सकता है। फैसले भी जल्दी होंगे।
सुरेंद्र शर्मा, मुख्य प्रवक्ता फासवेक
संजय टंडन, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
शहर के लोगों की तो शुरू से ही यह मांग रही है कि केंद्र सरकार यूटी के लिए अलग से प्रशासक या चीफ कमिश्नर लगाए। अब ऐसा होना चाहिए।
हरमोहन धवन, पूर्व केंद्रीय मंत्री व सीनियर बीजेपी नेता
यह काफी चर्चा का विषय है । लेकिन मेयर इन काउंसिल और मेट्रो पोलिटन काउंसिल का गठन जरूर होना चाहिए । इनकेप्रमुख राजनेता होंगे, जिससे लोगों के अधिकार मजबूत होंगे क्योंकि लोगों की जनप्रतिनिधियों से ज्यादा उम्मीद होती है। सलाहकार की जगह मुख्य सचिव का पद होना चाहिए।
पवन बंसल, पूर्व रेल मंत्री व कांग्रेस नेता
पंजाब के साथ चंडीगढ़ का टैग हटना चाहिए। यह सिर्फ तभी हो सकता है कि जब शहर का अलग से प्रशासक हो। इस समय शहरवासियों से प्रशासक को मिलने के लिए गवर्नर हाउस जाना पड़ता है। प्रोटोकाल के कारण गवर्नर से मिलना आसान नहीं है लेकिन अगर प्रशासक अलग से नियुक्त होगा तो अन्य अधिकारियों की तरह उनसे कभी भी मिला जा सकता है। फैसले भी जल्दी होंगे।
सुरेंद्र शर्मा, मुख्य प्रवक्ता फासवेक