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Chandigarh News: करोड़ों की भूमि पर हेरफेर करने पर पंजाब सरकार से किया जवाब तलब
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बनूड़ नगर परिषद की सैकड़ों करोड़ रुपये की भूमि को लेकर कथित तौर पर हेरफेर और बदली गई राजस्व प्रविष्टियों से जुड़े आरोपों पर पंजाब सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि मोहाली के डिप्टी कमिश्नर के 5 अगस्त 2024 को पारित आदेश पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
एडवोकेट सुनीना ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि मोहाली के बनूड़ में स्थित करीब 156 बीघा 9 बिस्वा जमीन राजस्व रिकॉर्ड में नगर परिषद बनूड़ की संपत्ति के रूप में दर्ज है। यह जमीन नगर सीमा के भीतर आती है और इसकी अनुमानित कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये है। इस जमीन के स्वामित्व और कब्जे को पहले ही सिविल अदालतों द्वारा मान्यता दी जा चुकी है। वर्ष 1981 में हाईकोर्ट की ओर से रेगुलर सेकेंड अपील खारिज होने के बाद मामला अंतिम रूप से तय हो गया था। इसके बाद 25 अप्रैल 2017 को राजस्व और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में नगर परिषद बनूड़ को जमीन का कब्जा भी सौंप दिया गया था।
इसके बाद 31 अगस्त 2017 को एक रपट रोजनामचा के जरिए संबंधित पटवारी ने अवैध रूप से गिरदावरी प्रविष्टि बदलकर जमीन की खेती का अधिकार पंचकूला के बरवाला निवासी जगतार चंद के नाम दर्ज कर दिया, जबकि इसके लिए कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद डीसी ने विस्तृत जांच कराई। सभी राजस्व रिकॉर्ड और अधिकारियों की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 5 अगस्त 2024 को एक विस्तृत आदेश पारित कर कहा गया कि यह राजस्व प्रविष्टि गलत और अवैध तरीके से दर्ज की गई थी और यह सरकारी निर्देशों तथा पंजाब लैंड रिकॉर्ड्स मैनुअल के प्रावधानों का उल्लंघन है। आदेश में संबंधित कानूनगो और पटवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी आवश्यकता बताई गई। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने मांग की कि मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय विशेष जांच दल गठित किया जाए और डिप्टी कमिश्नर के आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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एडवोकेट सुनीना ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि मोहाली के बनूड़ में स्थित करीब 156 बीघा 9 बिस्वा जमीन राजस्व रिकॉर्ड में नगर परिषद बनूड़ की संपत्ति के रूप में दर्ज है। यह जमीन नगर सीमा के भीतर आती है और इसकी अनुमानित कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये है। इस जमीन के स्वामित्व और कब्जे को पहले ही सिविल अदालतों द्वारा मान्यता दी जा चुकी है। वर्ष 1981 में हाईकोर्ट की ओर से रेगुलर सेकेंड अपील खारिज होने के बाद मामला अंतिम रूप से तय हो गया था। इसके बाद 25 अप्रैल 2017 को राजस्व और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में नगर परिषद बनूड़ को जमीन का कब्जा भी सौंप दिया गया था।
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इसके बाद 31 अगस्त 2017 को एक रपट रोजनामचा के जरिए संबंधित पटवारी ने अवैध रूप से गिरदावरी प्रविष्टि बदलकर जमीन की खेती का अधिकार पंचकूला के बरवाला निवासी जगतार चंद के नाम दर्ज कर दिया, जबकि इसके लिए कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद डीसी ने विस्तृत जांच कराई। सभी राजस्व रिकॉर्ड और अधिकारियों की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 5 अगस्त 2024 को एक विस्तृत आदेश पारित कर कहा गया कि यह राजस्व प्रविष्टि गलत और अवैध तरीके से दर्ज की गई थी और यह सरकारी निर्देशों तथा पंजाब लैंड रिकॉर्ड्स मैनुअल के प्रावधानों का उल्लंघन है। आदेश में संबंधित कानूनगो और पटवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी आवश्यकता बताई गई। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने मांग की कि मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय विशेष जांच दल गठित किया जाए और डिप्टी कमिश्नर के आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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