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बेअंत सिंह मर्डरः CBI के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के बयान दर्ज, ये थी घटना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 23 Sep 2016 11:53 AM IST
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पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हत्यारा जगतार सिंह हवारा
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में हाईकोर्ट की ओर से केस का ट्रायल तेजी से चलाने के आदेश के तहत वीरवार को इसकी सुनवाई हुई। आरोपी जगतार सिंह तारा के खिलाफ बुड़ैल जेल में बनी स्पेशल ट्रांजिट कोर्ट में केस का ट्रायल चल रहा है। वीरवार को केस के जांचकर्ता रहे सीबीआई दिल्ली में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) सुरेंद्र पाल के बयान दर्ज किए गए।
बचाव पक्ष के वकील के अनुसार उन्होंने केस में 31 अगस्त, 1995 को हुए बम ब्लास्ट के बाद घटनास्थल का दौरा करने से लेकर वारदात में इस्तेमाल एंबेसडर कार से लिए फिंगर प्रिंट्स और मौके की फोटोग्राफ्स की जानकारी कोर्ट को दी। साथ ही 13 सितंबर 1995 को जगतार सिंह तारा की गिरफ्तारी की भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वातदात में कौन-कौन शामिल था और कैसे तारा को गिरफ्तार किया गया था। उनका अभी चीफ बचा है जो अगली तारीख पर होगा। वहीं केस की अगली सुनवाई पर सीबीआई के एक अन्य गवाह को समन जारी किए गए हैं। बचाव पक्ष के वकील सिमरनजीत सिंह ने बताया कि जगतार सिंह तारा का पक्ष उसकी सीआरपीसी 313 की स्टेटमेंट में सामने आएगा।
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बचाव पक्ष के वकील के अनुसार उन्होंने केस में 31 अगस्त, 1995 को हुए बम ब्लास्ट के बाद घटनास्थल का दौरा करने से लेकर वारदात में इस्तेमाल एंबेसडर कार से लिए फिंगर प्रिंट्स और मौके की फोटोग्राफ्स की जानकारी कोर्ट को दी। साथ ही 13 सितंबर 1995 को जगतार सिंह तारा की गिरफ्तारी की भी जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि वातदात में कौन-कौन शामिल था और कैसे तारा को गिरफ्तार किया गया था। उनका अभी चीफ बचा है जो अगली तारीख पर होगा। वहीं केस की अगली सुनवाई पर सीबीआई के एक अन्य गवाह को समन जारी किए गए हैं। बचाव पक्ष के वकील सिमरनजीत सिंह ने बताया कि जगतार सिंह तारा का पक्ष उसकी सीआरपीसी 313 की स्टेटमेंट में सामने आएगा।
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1995 में बम ब्लास्ट से की थी सीएम की हत्या
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की मौत हो गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलवार सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था।
इस हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा को पटियाला जेल में 31 मार्च 2012 को फांसी देने के वारंट अदालत ने जारी किए थे। हालांकि किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी।
छह को हो चुकी है सजा
मामले में 27 जुलाई 2007 को कुल 9 में से 6 दोषियों को तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवि कुमार सोंधी ने दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। सजा पाने वालों में जगतार सिंह हवारा, शमशेर सिंह, लखविंदर सिंह, नसीब सिंह, बलवंत सिंह व गुरमीत सिंह शामिल थे।
इन्हें हत्या, हत्या के प्रयास, आत्महत्या के लिए उकसाना, आपराधिक साजिश रचने और एक्सप्लोसिव एक्ट की धारा 4, 5 व 6 के तहत दोषी पाया गया था। वहीं नसीब सिंह को एक्सप्लोजिव एक्ट की धारा-5 में दोषी ठहराया था। केस में नवजोत सिंह को बरी कर दिया गया था। वहीं वर्ष 2004 में बुड़ैल जेल ब्रेक कर फरार हुए परमजीत सिंह भ्यौरा को बाद में सजा हुई थी।
इस हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा को पटियाला जेल में 31 मार्च 2012 को फांसी देने के वारंट अदालत ने जारी किए थे। हालांकि किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी।
छह को हो चुकी है सजा
मामले में 27 जुलाई 2007 को कुल 9 में से 6 दोषियों को तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवि कुमार सोंधी ने दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। सजा पाने वालों में जगतार सिंह हवारा, शमशेर सिंह, लखविंदर सिंह, नसीब सिंह, बलवंत सिंह व गुरमीत सिंह शामिल थे।
इन्हें हत्या, हत्या के प्रयास, आत्महत्या के लिए उकसाना, आपराधिक साजिश रचने और एक्सप्लोसिव एक्ट की धारा 4, 5 व 6 के तहत दोषी पाया गया था। वहीं नसीब सिंह को एक्सप्लोजिव एक्ट की धारा-5 में दोषी ठहराया था। केस में नवजोत सिंह को बरी कर दिया गया था। वहीं वर्ष 2004 में बुड़ैल जेल ब्रेक कर फरार हुए परमजीत सिंह भ्यौरा को बाद में सजा हुई थी।