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हाल-ए-अन्नदाता: मालवा समेत पूरे पंजाब में कपास की 5725 एमएसपी, बिक रही है 4500 रुपये
Mon, 05 Oct 2020 11:44 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 05 Oct 2020 11:44 AM IST
सार
- इस साल 9.7 लाख एकड़ में सूबे में बोई गई थी कपास की फसल
- व्यापारी कह रहे- फसल में नमी के कारण नहीं दे पा रहे हैं अच्छे दाम
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Cotton
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विस्तार
पंजाब की मंडियों में कपास के किसानों को फसल के अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं। कपास की एमएसपी से 1250 रुपये प्रति क्विंटल कम मूल्य मिल रहा है। सूबे में कपाल का कम से कम समर्थन मूल्य 5515 और 5725 निर्धारित की गई है। कपास खरीदने वाले व्यापारियों का कहना है कि किसानों की कपास की फसल में नहीं होने के कारण अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं।
इस बार पंजाब सूबे में 9.7 लाख एकड़ में कपास की फसल बोई गई थी। अब फसल तैयार है, किसान फसल को लेकर मंडी पहुंच रहा है, लेकिन फसल के अच्छे दाम नहीं मिलने के कारण उन्हे मजबूरी में कम दाम पर ही फसल बेचनी पड़ रही है। कपास के लिए कम से कम समर्थन मूल्य 5515 और 5725 प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन फसल को 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जा रहा है।
कपास की खरीद करने वाले कुछ व्यापारियों का कहना है कि फसल में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ किसानों ने बताया कि यही कारण है कि वह रवायती फसलें गेहूं और धान को पहल देने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि सरकारी खरीद होने के कारण यह फसलें तय मूल्य पर लगभग बिक ही जाती हैं।
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इस बार पंजाब सूबे में 9.7 लाख एकड़ में कपास की फसल बोई गई थी। अब फसल तैयार है, किसान फसल को लेकर मंडी पहुंच रहा है, लेकिन फसल के अच्छे दाम नहीं मिलने के कारण उन्हे मजबूरी में कम दाम पर ही फसल बेचनी पड़ रही है। कपास के लिए कम से कम समर्थन मूल्य 5515 और 5725 प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन फसल को 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जा रहा है।
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कपास की खरीद करने वाले कुछ व्यापारियों का कहना है कि फसल में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ किसानों ने बताया कि यही कारण है कि वह रवायती फसलें गेहूं और धान को पहल देने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि सरकारी खरीद होने के कारण यह फसलें तय मूल्य पर लगभग बिक ही जाती हैं।
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मालवा का भी यही हाल
मालवा क्षेत्र की मंडियों में कपास की फसल का दाम 4,000 रुपये से 5,000 रुपये ही मिल रहा है। जबकि केंद्र सरकार की ओर से लंबे रेशे वाले कपास का भाव 5,825 रुपये और बीच वाले रेशे वाले कपास की कीमत 5500 से अधिक बताई गई है। कपास की कम कीमत मिलने से खेती किसानी पर आश्रित मालवा के किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
किसानों की आय दोगुनी करने वाली केंद्र सरकार दावे चाहें जो भी कर रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ ओर ही है। राज्य सरकार भी कुछ नहीं कर रही है। इसी कारण से कपास की फसल मंडियों में पहुंचने के बाद भी कॉटन निगम ऑफ इंडिया द्वारा खरीद शुरू नहीं की गई है।
- प्रो. बलजिंदर कौर, विधायक, आप, पंजाब
केंद्र हो या राज्य सभी सरकारें किसान आंदोलन के नाम पर अपना-अपना स्वार्थ सिद्ध कर रही हैं। कोई भी किसानों की मूल समस्याओं को नहीं सुन रहा है। मजबूरी में किसानों को सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
- मोहन सिंह धमाना, उपाध्यक्ष, जमूहरी किसान सभा, पंजाब
किसानों की आय दोगुनी करने वाली केंद्र सरकार दावे चाहें जो भी कर रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ ओर ही है। राज्य सरकार भी कुछ नहीं कर रही है। इसी कारण से कपास की फसल मंडियों में पहुंचने के बाद भी कॉटन निगम ऑफ इंडिया द्वारा खरीद शुरू नहीं की गई है।
- प्रो. बलजिंदर कौर, विधायक, आप, पंजाब
केंद्र हो या राज्य सभी सरकारें किसान आंदोलन के नाम पर अपना-अपना स्वार्थ सिद्ध कर रही हैं। कोई भी किसानों की मूल समस्याओं को नहीं सुन रहा है। मजबूरी में किसानों को सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
- मोहन सिंह धमाना, उपाध्यक्ष, जमूहरी किसान सभा, पंजाब