किसान आंदोलन में तीन अन्नदाताओं की और मौत, धरने पर जा रहे युवक की भी जान गई
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कृषि कानूनों के खिलाफ कुंडली बॉर्डर पर जारी धरने में शामिल होने पंजाब से आए किसान का शव प्याऊ मनियारी के पास ड्रेन नंबर-आठ में मिला है। वह तड़के घूमने गए तो इसी दौरान संदिग्ध अवस्था में ड्रेन में गिरने से उनकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर साथियों ने उनके शव को बाहर निकलवाया और पुलिस को सूचित किया गया।
कुंडली पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद ग्रामीणों के हवाले कर दिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट व बिसरा जांच के बाद ही मौत के कारणों का पता लगने की बात कही है। वहीं बहादुरगढ़ में दो युवा किसानों की भी मौत हो गई है। कुंडली बॉर्डर के धरनास्थल पर जहां अब तक छह किसानों की मौत हो चुकी है तो वहीं बहादुरगढ़ में आठ किसान जान गंवा चुके हैं।
संगरूर के रहने वाले थे भीम सिंह
मूलरूप से पंजाब के जिला संगरूर के भवानीगढ़ तहसील के गांव चिन्हरा के भीम सिंह नंबरदार (38) फिलहाल पटियाला में रहते थे। वह कुंडली बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन को समर्थन दे रहे थे। वह लगातार धरनास्थल पर खानपान का सामान लेकर आ जा रहे थे। उनके गांव के रहने वाले गुरमीत सिंह ने बताया कि वह किसानों के धरना देने के बाद से कई बार सामान लेकर पंजाब से आवागमन कर चुके थे।
वह फिलहाल प्याऊ मनियारी के पास खड़ी ट्रैक्टर-ट्रालियों में रुके थे। बताया गया है कि वह गुरुवार तड़के घूमने ड्रेन की तरफ गए थे। वहां पर गड्ढ़े में पैर गिरने से या अन्य कारण के चलते वह ड्रेन में गिर गए। बाद में सुबह जब अन्य साथी गए तो उन्हें ड्रेन में पड़ा देखा। उन्हें बाहर निकाला तो मौत हो चुकी थी।
दो बेटियों के पिता थे भीम सिंह
सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने पहुंचे भीम सिंह के गांव के गुरमीत सिंह ने कहा कि भीम सिंह के दो बेटियां हैं। वह लंबे समय से भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के साथ काम कर रहे थे। किसानों की लड़ाई लड़ते हुए उनकी जान गई है। उनकी मौत प्रशासन की लापरवाही से हुई है। उन्होंने हरियाणा और पंजाब सरकार से किसान के परिवार के लिए मुआवजा राशि व सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
बहादुरगढ़ में दो और किसानों की मौत
बहादुरगढ़ में आंदोलन में शामिल दो और किसानों की गुरुवार को मौत हो गई। दोनों किसान युवा थे। एक किसान पंजाब का तो दूसरा हरियाणा का रहने वाला है। इनमें से एक की मौत किसी बीमारी के चलते हुई है तो दूसरे की मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। एक किसान के शव को पीजीआई रोहतक में रखा गया तो दूसरे का बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल के शव गृह में।
पोस्टमार्टम के बाद ही दोनों की मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। दूसरी तरफ धरना दे रहे किसानों ने साथियों की मौत पर मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यहां पर अब तक आठ किसानों की मौत हो चुकी है। मरने वाले किसानों की पहचान 37 वर्षीय जय सिंह पुत्र कुलदीप निवासी गांव टुंगवाली जिला बठिंडा और 38 वर्षीय देवेंदर सिंह निवासी जींद के रूप में हुई है।
- 5 दिसंबर को पंजाब के नवांशहर के गांव हसनपुर खुर्द के सुरेंद्र सिंह की सड़क हादसे में जान गई।
- 8 दिसंबर को गांव बरोदा के किसान अजय की जान गई। (हार्ट अटैक से)
- 14 दिसंबर को पंजाब के जिला मोगा के गांव भिंडर कलां के मक्खन खान की जान गई (हार्ट अटैक से)
- 15 दिसंबर को पंजाब के जिला मोहाली के गांव कंड़ाला के किसान गुरमीत सिंह की जान गई। (हार्ट अटैक से)
- 15 दिसंबर को पंजाब के जिला पटियाला के गांव सौहली के किसान पाल सिंह की जान गई। (हार्ट अटैक से)
- 17 दिसंबर को भीम सिंह नंबरदार का शव ड्रेन में मिला।
गुरुवार सुबह दस बजे किसान का शव ड्रेन में मिलने की सूचना मिली थी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराकर उसके ग्रामीणों के हवाले कर कर दिया है। पोस्टमार्टम व बिसरा रिपोर्ट में मौत के कारणों से पर्दा उठ सकेगा। - रवि कुमार, थाना प्रभारी, कुंडली।
दिल्ली धरने में जा रहे युवक की सड़क हादसे में मौत
मानसा के गांव फत्ता मालोका से किसान धरने में जा रहे नौजवान जतिंदर सिंह (26) पुत्र सुखपाल सिंह की बुधवार की शाम हिसार के नजदीक सड़क हादसे में मौत हो गई है। जतिंदर का कुछ माह पहले की विवाह हुआ था। उसकी मौत से गांव में शोक की लहर है। किसान जतिंदर सिंह बुधवार सुबह दिल्ली सीमा पर किसानों के धरने में शामिल होने को निकला था। हरियाणा के हिसार के पास उसके ट्रैक्टर को एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इससे जतिंदर सिंह ट्रैक्टर से नीचे गिर गया और उसकी मौत हो गई।
पटियाला : मृतक किसानों के परिवार को मिलेंगे पांच-पांच लाख
करनाल के नजदीक सड़क हादसे में मरने वाले पटियाला के सन्नौर के गांव सफेड़ा के रहने वाले किसानों के परिवारों से मिलने गुरुवार को डिवीजनल कमिश्नर चंद्र गैंद पहुंचे। उन्होंने पंजाब सरकार की तरफ से इन परिवारों को पांच-पांच लाख की अनुग्रह राशि देने का एलान किया।
बता दें है कि पटियाला के गांव सफेड़ा के 22 साल के नौजवान किसान गुरप्रीत सिंह और 68 साल के किसान लाभ सिंह की दिल्ली के सिंघु बार्डर से लौटते वक्त सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद डिवीजनल कमिश्नर भादसों गांव सहौली के 60 साल के किसान पाल सिंह के घर पहुंचे और उनकी 102 साल की बुजुर्ग माता बचन कौर से मिलकर शोक व्यक्त किया। पाल सिंह की दिल्ली के कुंडली बार्डर पर चल रहे धरने के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई है।