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Punjab Politics : पंजाब सरकार और राज्यपाल में बढ़ा विवाद, मान की नाराजगी पर पुरोहित ने पत्र लिखकर बताए नियम

Sun, 25 Sep 2022 04:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 25 Sep 2022 04:19 AM IST
सार

Punjab :पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। हालांकि शनिवार को दोनों पक्षों ने अपने स्तर पर एक-दूसरे का सम्मान बनाए रखने का प्रयास भी किया लेकिन आम आदमी पार्टी राज्यपाल पर लगातार हमलावर बनी रही और उन पर भाजपा के इशारे पर काम करने के आरोप लगाए।

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Punjab : Controversy escalates between Punjab Government and Governor
सीएम भगवंत मान, स्पीकर कुलतार संधवां और गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित... file pic - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। हालांकि शनिवार को दोनों पक्षों ने अपने स्तर पर एक-दूसरे का सम्मान बनाए रखने का प्रयास भी किया लेकिन आम आदमी पार्टी राज्यपाल पर लगातार हमलावर बनी रही और उन पर भाजपा के इशारे पर काम करने के आरोप लगाए।

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राज्यपाल की ओर से शुक्रवार रात पंजाब सरकार से 27 सितंबर के प्रस्तावित विधानसभा सत्र में कामकाज का ब्योरा मांगे जाने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर एतराज जताते हुए कहा था कि यह तो हद हो गई है। शनिवार सुबह राज्यपाल ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजकर लिखा कि ‘शायद आप मुझसे बहुत ज्यादा नाराज हैं।’
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राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को संविधान के अनुच्छेद 167 और 168 में दर्ज प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रस्तावित सत्र के कामकाज की जानकारी मांगे जाने को भी सही ठहराया। इसके कुछ देर बाद पंजाब सरकार ने भी विधानसभा के सचिव के जरिये राज्यपाल को पत्र भेजते हुए वह जानकारी उपलब्ध करा दी, जिसकी मांग उन्होंने शुक्रवार रात पत्र भेजकर की थी। अब प्रस्तावित सत्र के बारे में अगला फैसला राज्यपाल की ओर से लिया जाना है।
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उधर, आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शनिवार को उन पर राजनीति करने के गंभीर आरोप लगाए। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने पार्टी मुख्यालय में बुलाई प्रेस कांफ्रेंस में राज्यपाल पर आरोप लगाया कि वह पंजाब में ऑपरेशन लोटस सफल बनाने के लिए भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं और आप सरकार के खिलाफ भाजपा और कांग्रेस के साथ मिलकर साजिश रची गई है। एक अन्य प्रेस कांफ्रेंस में कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी आरोप लगाया कि राज्यपाल पंजाब सरकार के कामकाज में दखल दे रहे हैं।

राज्यपाल का सीएम को पत्र- शायद आप मुझसे नाराज हैं...
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा, वह इस तरह है- आज के अखबारों में आपके बयान पढ़ने के बाद मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि शायद आप मुझसे बहुत ज्यादा नाराज हैं। मुझे लगता है कि आपके कानूनी सलाहकार आपको सही जानकारी नहीं दे रहे हैं, इसलिए मैं आपको संविधान के अनुच्छेद 167 और 168 के प्रावधानों को पढ़ने के लिए भेज रहा हूं। इसे पढ़कर निश्चित रूप से मेरे बारे में आपकी राय बदल जाएगी।

अनुच्छेद 167 : राज्यपाल आदि को सूचना देने के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य निम्न होंगे- (यह प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री का कर्तव्य होगा)
अ) राज्य के प्रशासनिक मामले और कानून के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों के बारे में राज्य के राज्यपाल को सूचित करना।
ब) राज्य के प्रशासनिक मामलों और कानून के प्रस्तावों से संबंधित ऐसी जानकारी पेश करना, जो राज्यपाल ने मांगी है।

सरकार ने एतराज के साथ भेजा सत्र का एजेंडा
पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा सचिव के माध्यम से राज्यपाल को 27 सितंबर के प्रस्तावित विधानसभा सत्र का एजेंडा तो भेज दिया, लेकिन पत्र में यह भी जताया कि कोई सत्र बुलाने के लिए यह कोई शर्त नहीं है। पत्र में लिखा गया - 

एजेंडे और विवरण की मांग, बिना किसी पूर्वाग्रह के भेजी जा रही है। हालांकि किसी सत्र को बुलाने/आयोजित करने या सत्र के आयोजन में देरी की यह शर्त नहीं हो सकती है, मंत्रिपरिषद द्वारा एक बार फैसला लेने के बाद माननीय राज्यपाल पर वह फैसला बाध्यकारी हो जाता है। इस संबंध में कानून की अनभिज्ञता, संविधान से परे, उदाहरण, अभ्यास और परंपरा के विपरीत होना और कोई भी विपरीत दृष्टिकोण कानूनी रूप से समर्थन योग्य नहीं है। फिर भी सरकार का विधायी/सरकारी कार्य करने का प्रस्ताव है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ राज्य विधानमंडल के विचारार्थ जीएसटी, पराली जलाने, बिजली आदि के ज्वलंत मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा सदस्यों से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार विभिन्न मुद्दों पर कामकाज भी सत्र के दौरान ‘पंजाब विधानसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम’ के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार किया जा सकता है। अत: अनुरोध है कि राज्यपाल 27 सितंबर को राज्य विधानसभा को बुलाने की अनुमति प्रदान करें।

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