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Loksabha Election: तकनीकी शिक्षा में पिछड़ रहा पंजाब, इंजीनिरिंग कॉलेजों में भर रही केवल 50 फीसदी सीटें

Thu, 04 Apr 2024 01:28 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 04 Apr 2024 01:28 PM IST
सार

आईके गुजराल पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय, कपूरथला से संबद्ध कॉलेजों में, कुल 81,982 सीटें हैं, लेकिन इसमें सिर्फ 41,590 छात्र ही शिक्षा ले रहे हैं। इसी तरह, महाराजा रणजीत सिंह पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय, बठिंडा से संबद्ध कॉलेजों में आधी सीटें खाली जा रही हैं।

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Punjab constantly lagging behind in Technical education
तकनीकी शिक्षा में पिछड़ रहा पंजाब

विस्तार

कभी तकनीकी शिक्षा में डंका बजाने वाला पंजाब अब लगातार पिछड़ रहा है। पंजाब के तकनीकी शिक्षा कॉलेज वीरान हो रहे हैं। पंजाब के छात्र तकनीकी शिक्षा लेने के लिए छात्र या तो अन्य प्रदेशों का रुख कर रहे हैं या फिर कनाडा, ब्रिटेन आदि के विश्वविद्यालयों की तरफ भाग रहे हैं। 50 फीसदी सीटें ही भर पा रहीं हैं। नतीजन, पंजाब के इंजीनियरिंग कॉलेजों के हाल बेहाल हैं। इससे राज्य के 300 से अधिक तकनीकी कॉलेजों में लगभग 55 प्रतिशत सीटें बेकार हो रही हैं।
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राज्य के दो तकनीकी विश्वविद्यालय-आईके गुजराल पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय और महाराजा रणजीत सिंह पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय, बठिंडा- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रवेश देते हैं। पंजाब में किसी समय इंजीनियरिंग का खासा रुझान था। बाहरी प्रदेशों से भी विद्यार्थी पंजाब में बीटेक, एमबीए, बीसीए, बीबीए आदि में दाखिला लेने के लिए आते थे। पीटीयू में आर्किटेक्चर में 140 सीटें हैं, जबकि इस समय महज 69 विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं। पीटीयू का खुद का कैंपस तो है, साथ ही में 230 इंजीनियरिंग कॉलेज इसके साथ जुड़े हुए हैं।
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अन्य राज्यों पर निर्भरता बढ़ी
पंजाब के तकनीकी कॉलेजों में सीटें न मिलने के कारण बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, उत्तर-पूर्व और यहां तक कि नेपाल जैसे राज्यों के छात्रों पर निर्भरता बढ़ रही है। पंजाब अनएडेड कॉलेज एसोसिएशन को कट-ऑफ तारीख बढ़ाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा। एसोसिएशन का दावा है कि विभिन्न कारणों से जम्मू-कश्मीर, बिहार, हिमाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्व के कई छात्र कट-ऑफ तारीख तक पंजाब के कॉलेजों में सीटें सुरक्षित नहीं कर सके। राज्य के दो तकनीकी विश्वविद्यालय- आईके गुजराल पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय और महाराजा रणजीत सिंह पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय, बठिंडा - अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रवेश देते हैं। 
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एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है कि जहां इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश एआईसीटीई की ओर से विनियमित होते हैं, वहीं पॉलिटेक्निक और आईटीआई में प्रवेश तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग की ओर से आयोजित किए जाते हैं। जिन पाठ्यक्रमों में कम दाखिले हो रहे हैं, उनमें बीटेक, एमबीए, बीसीए, बीबीए, बीएचएम के अलावा अन्य शामिल हैं। 

प्राइवेट आईटीआई एसोसिएशन के अनुसार प्राइवेट आईटीआई में करीब 45 फीसदी सीटें खाली पड़ी हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग के अनुसार निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश एआईसीटीई की ओर से राज्य के दो तकनीकी विश्वविद्यालयों के प्रवेश पोर्टल के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए और मूल्यांकन प्रणाली पारदर्शी और सख्त हो। यहां रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए छात्रों के कौशल में सुधार करने का प्रयास किए जा रहे हैं।

पंजाब से पलायन का असर: सरीन
एचएमवी कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अजय सरीन का कहना है कि पंजाब में युवा शिक्षा ग्रहण करने के स्थान पर विदेश को अधिक तवज्जो देता है। यही कारण है कि इसका असर शिक्षा व तकनीकी शिक्षा संस्थानों पर हो रहा है। पंजाब से भारी संख्या में बच्चे निकल रहे हैं। उनको रोकने के लिए उद्योग लगाए जाने चाहिए।

पंजाब में आईटी व इंजीनियरिंग यूनिट की कमी मुख्य कारण: भाटिया
एचएमवी पत्रकारिता विभाग की डॉ. रमा भाटिया का कहना है कि पंजाब में आईटी इंडस्ट्री नहीं है। पंजाब में उद्योग पलायन कर रहा है। नोएडा, गुड़गांव की तरफ आईटी व इंजीनियरिंग उद्योग स्थापित हो चुके हैं। वहां पर शिक्षा लेना ही विद्यार्थी उचित समझते हैं। वहां पर बड़ी बड़ी कंपनियों में ट्रेनिंग के साथ साथ नौकरी मिल जाती है। यही कारण है पंजाब में विद्यार्थी तकनीकी शिक्षा लेना नहीं चाहते।

असर तो सीधा पंजाब की तरक्की पर: डॉ. धीरज
दिल के रोगों के माहिर डॉ. धीरज भाटिया का कहना है कि पंजाब में तकनीकी शिक्षा संस्थानों में सीटें खाली जाने से सबसे अधिक असर पंजाब की तरक्की पर हो रहा है। यहां से जितने भी विद्यार्थी डिग्री लेते भी हैं, तो वह नौकरी पंजाब में नहीं करते। काफी कम लोगों के लिए पंजाब में नौकरी है। नौकरी के लिए तो फिर साउथ, गुरुग्राम की तरफ ही जाना पड़ता है।

कोर्स                        कुल सीटें           भरी सीट
आर्किटेक्टर                   140                69
बीटेक प्रथम वर्ष             15,559            8044
मास्टर आर्किटेक्चर            20                  0

मौजूदा सरकार की बेरुखी जिम्मेदार: राठौर
पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष राकेश राठौर का कहना है कि मौजूदा सरकार कई झूठे वादे कर सत्ता में आई थी। पंजाब में ज्यादातर कॉलेज भाजपा के शासनकाल में खुले थे, लेकिन बाद में आने वाली सरकारों ने पंजाब के विकास को लेकर बेरुखी दिखाई, जिसका नतीजा सामने है।

सरकार कामकाज से चलती है, बातों से नहीं: परगट सिंह
विधायक परगट सिंह का कहना है कि सरकार बातों से नहीं चलती, जमीनी स्तर पर काम से चलती है। दो सालों से पंजाब की सरकार ने अगर कुछ काम किए होते तो आज पंजाब में आप के उम्मीदवार पार्टी की टिकट छोड़कर नहीं भागते और न ही मंत्रियों को उतारना पड़ता।

पिछली सरकारों ने पंजाब का बेड़ा गर्क किया: राजविंदर थियाड़ा
पंजाब की आप स्टेट सचिव राजविंदर कौर थियाड़ा का कहना है कि पिछली सरकारों ने पंजाब का हाल बेहाल कर दिया था। अब भगवंत मान की सरकार इसको राह पर ला रही है। यह पिछली सरकारों की देन है कि पंजाब की इंडस्ट्री बद्दी और कठुआ शिफ्ट हो गई। पंजाब में पिछली सरकारों में नशा फैला और युवा विदेशों की तरफ निकलने लगा।


बादल के समय के पंजाब को आज कहां पहुंचा दिया: चन्नी
अकाली दल के वरिष्ठ नेता गुरचरण सिंह चन्नी का कहना है कि सीएम बादल के कार्यकाल हमेशा विकास के लिए जाने जाते हैं। नया चंडीगढ़ से लेकर आज तो एक्सप्रेस हाईवे बन रहे हैं। यह सब उनकी देन है। पंजाब में तकनीकी शिक्षा की क्रांति का दौर बादल सरकार के दौर आया, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसका हाल बेहाल कर दिया।
 
 
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