महंगाई के खिलाफ हल्ला बोल: प्रदर्शन में खुली पंजाब कांग्रेस की पोल, नवजोत सिद्धू और बरिंदर ढिल्लों आपस में भिड़े
पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को चंडीगढ़ में महंगाई के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्व पार्टी प्रधान नवजोत सिद्धू ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
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महंगाई के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ चंडीगढ़ में धरना देने बैठे पंजाब के कांग्रेसी अपनी अंदरूनी लड़ाई में ही उलझ गए। पार्टी के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू के एक बयान पर यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बरिंदर सिंह ढिल्लों ने खुले तौर पर सवाल पूछ लिया तो विवाद खड़ा हो गया। हालात यह हुए कि धरने में बैठे कई कार्यकर्ता उठकर चले गए।
धरने के दौरान नवजोत सिद्धू ने अपने संबोधन के दौरान किसी का नाम लिए बिना पार्टी के कई सीनियर नेताओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि वह तो पूरी तरह ईमानदार हैं लेकिन पार्टी के कई नेता बेईमान हैं। इस पर बरिंदर ढिल्लों खड़े हो गए। उन्होंने सिद्धू से बेईमान नेताओं के नाम बताने को कहा। उन्होंने कहा कि खुले तौर पर नाम बताएं या इस तरह की ड्रामेबाजी बंद करें। ढिल्लों बार-बार सिद्धू से कह रहे थे कि बेईमान नेताओं के नाम बताएं क्योंकि सिद्धू का यह भी कहना था कि वह उन कांग्रेस नेताओं के साथ नहीं खड़े होंगे, जिनके घरों से पैसे मिले हैं और वह सिर्फ कार्यकर्ता के साथ ही खड़े रहेंगे।
धरनास्थल पर पार्टी के दो नेताओं के इस तरह भिड़ जाने से वहां मौजूद बाकी सीनियर नेताओं की स्थिति भी विचित्र हो गई। वह खामोशी साधे मामला रफा-दफा हो जाने का इंतजार करने लगे लेकिन सिद्धू और ढिल्लों के बीच हुआ विवाद बहस के रूप में काफी देर तक चला। ढिल्लों द्वारा लगातार मांग उठाने के बाद सिद्धू ने अपने समर्थकों के साथ वहां से निकलने में ही भलाई समझी और राजभवन की तरफ बढ़े। बीच रास्ते में चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें रोक लिया तो वह बैरिकेड के निकट कुछ देर रुके और फिर अपनी गाड़ी में बैठकर चले गए।
दूसरी ओर, विधायक राजा वड़िंग काफी देर तक बरिंदर ढिल्लों को मनाते रहे। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ढिल्लों ने कहा कि नवजोत सिद्धू द्वारा दोहरी बात कही जा रही है, जो मुझे गलत लगी और मैंने उनसे सवाल पूछ लिया। हाईकमान को भी ऐसे नेताओं का पता लगाना चाहिए जिन्होंने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है, पार्टी को हराया है और पार्टी में धड़ेबंदी को हवा दी है। ऐसे नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। धरनास्थल पर एक तरफ तो सिद्धू और ढिल्लों के बीच विवाद चल रहा था, वहीं पार्टी के बाकी सीनियर नेता पत्रकारों से बातचीत में व्यस्त रहे। उन्होंने सिद्धू और ढिल्लों के बीच विवाद टालने की कोई कोशिश नहीं की।
जिस काम को आए थे, वह नहीं किया
कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ऐसे मौके पर अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ ऐसी टिप्पणी करना सही नहीं है। हम जिस काम के लिए आए थे, वह नहीं किया। हमें महंगाई को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए थी। विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा भी इस प्रकरण से काफी नाराज दिखाई दिए, उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा तमाशा ओर क्या किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि जो भी हुआ, गलत हुआ। सबको अनुशासन में रहना चाहिए था लेकिन आज तो अनुशासनहीनता की हद हो गई। कांग्रेसी नेता मदन लाल जलालपुर ने कहा कि चुनाव के दौरान भी एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी होती रही, जिसके चलते पार्टी इस कगार पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि हाईकमान को कड़ा कदम उठाना चाहिए।