इस मुद्दे पर गर्माई प्रदेश कांग्रेस की मीटिंग
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लोकसभा चुनाव के बाद पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पहली बैठक में गुटबाजी और आपसी फूट का मुद्दा छाया रहा। मीटिंग के दौरान बहुत कम लोगों को बोलने का मौका दिया गया।
पर उनमें से ज्यादातर वक्ताओं ने प्रदेश प्रभारी शकील अहमद से कहा कि पहले गुटबाजी दूर करें। एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि मर्ज कहीं है और आप इलाज कहीं और कर रहे हैं।
उम्मीद की जा रही थी कि चुनाव में हार के बाद होने वाली पहली बैठक में प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा विरोधी हंगामा कर सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। दिखावे के लिए ही सही, पर बैठक के दौरान बाजवा एकजुटता दिखाने में कामयाब रहे।
शकील बोले, मर्ज कहीं है और इलाज कहीं हो रहा
मीटिंग के दौरान सबसे पहले बाजवा ने स्वागत भाषण दिया। उसके बाद सह-प्रभारी हरीश चौधरी और सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ बोले। आखिर में शकील अहमद को बोलना था। इससे पहले तीन प्रस्ताव रखे गए और तीन लोगों ने उनका अनुमोदन किया। जाहिर है, ये सभी बाजवा गुट के लोग थे। इन छह में से पांच लोगों ने प्रस्ताव के साथ-साथ आपसी गुटबाजी का मुद्दा उठाया।
कैप्टन अमरिंदर सिंह इनके निशाने पर रहे। ब्रह्म मोहिंद्रा ने कहा कि पार्टी के अंदर ही कुछ लोग नुकसान कर रहे हैं, उन्हें रोका जाए। हरमिंदर गिल ने कहा कि पार्टी ने मुझे टिकट दिया, पर लोग मेरा हलका ही छोड़कर चले गए। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। सुरिंदर पाल सिंह सिबिया ने शकील से कहा कि मर्ज कहीं है, आप इलाज कहीं और कर रहे हैं। लोग हमें जिताना चाहते थे, पर पार्टी के अंदर की फूट केचलते हम हारे।
एक वक्ता ने कहा कि न तो लोगों ने हमें हराया, न सरकार ने, पहले फूट का इलाज करो। लोगों को मीडिया में जाने से रोका जाए। शकील को भी अगर कोई समस्या है तो पार्टी प्लेटफार्म पर रखें। जिले से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक बात रखी जाए, लेकिन मीडिया में न जाएं।
एकजुटता दिखाने में कामयाब रहे बाजवा
प्रताप बाजवा ने पीपीसीसी की मीटिंग की पटकथा इतने शानदार ढंग से लिखी कि उन्हें कामयाबी मिली। मीटिंग में एक भी विरोधी सुर नहीं उठा। पहले तो मीटिंग का समय विधानसभा सत्र शुरू होने से ऐन पहले रखा गया।
उसके बाद ही प्रेस कांफ्रेंस भी रख ली गई। आम मीटिंग में मंच संचालन बाजवा केभाई फतेहजंग बाजवा करते हैं पर बेहद एहतियात बरतते इस बार संचालन की जिम्मेदारी एक सीनियर नेता को दी गई, जो हालात को संभाल सके।
मीटिंग का एजेंडा बाजवा ने तय किया था। कौन तीन लोग प्रस्ताव रखेंगे, कौन अनुमोदन करेंगे, यह भी उन्होंने ही तय किया था। उन्होंने अपने विरोधियों के बोलने के लिए कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी थी। फिर भी आशंका थी कि बीच में खड़े होकर कुछ लोग बोल सकते हैं।
इसलिए शुरू से ही माहौल बनाया गया कि प्रेस कांफ्रेंस और सेशन है, टाइम कम है। चार नेताओं के अलावा छह लोग बोले, वह बाजवा के हक में थे। लोकसभा चुनाव में हार पर मंथन को बाजवा ने बड़ी सफाई के साथ सरकार के खिलाफ आंदोलन के प्रस्तावों में टाल दिया। साथ ही अपना संभावित विरोध भी टाल दिया।
कैप्टन गुट रहा साइलेंट
पीपीसीसी मीटिंग केदौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट पूरी तरह साइलेंट रहा। जिन दो विधायकों केवल ढिल्लों और राणा गुरमीत सोढी ने सबसे पहले बाजवा का इस्तीफा मांगा था, वे दोनों मीटिंग में मौजूद थे।
कैप्टन गुट के और नेता भी थे, पर किसी ने भी बाजवा का विरोध नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक हाईकमान ने कैप्टन गुट को संकेत दे दिए हैं कि फिलहाल बाजवा ही प्रधान रहेंगे। विरोध कर पार्टी का नुकसान न करें। जिसकेचलते कैप्टन के करीबी मीटिंग में तो थे, पर कोई विरोध नहीं किया।