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आखिर पानी पर घमासान क्यों: हर साल 35 अरब घन मीटर पानी के बंटवारे ने बढ़ाई पंजाब की चिंता, नया नहीं है ये विवाद
Mon, 05 May 2025 01:06 PM IST
शाहरुख खान
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 05 May 2025 01:06 PM IST
सार
Ravi Beas Sutlej Water Issue: पंजाब में पानी की मांग बढ़ रही है। नहरी पानी का उपयोग बढ़ गया है। हर साल 35 अरब घन मीटर पानी के बंटवारे ने पंजाब की चिंता बढ़ा दी है।
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Punjab water dispute
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
SYL Canal Dispute: पंजाब और हरियाणा के बीच पानी के लिए शुरू हुआ सियासी घमासान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जल विवाद को लेकर दोनों राज्यों की सरकारें आमने-सामने हैं। सीएम भगवंत मान ने जहां हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने से इन्कार कर दिया है, वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री का आरोप है कि पंजाब वादे के मुताबिक उसे 8500 क्यूसेक पानी जारी नहीं कर रहा है।
विशेषज्ञों की माने तो राजनीतिक के साथ ही इस विवाद के अन्य कारण भी हैं, जिससे यह और गहराता जा रहा है। रावी, ब्यास और सतलुज से हर साल पंजाब को 35 अरब घन मीटर के करीब पानी मिलता है, जिसका आगे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच बंटवारा होता है।
पंजाब को प्रमुख रूप से सिंचाई के लिए सबसे अधिक पानी चाहिए। पिछले कुछ समय से सूबे में नहरी पानी का उपयोग बढ़ा है, जिस कारण दूसरे राज्यों को जाने वाले अतिरिक्त पानी पर सूबे ने रोक लगानी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों की माने तो पंजाब को 40 अरब घन मीटर से ऊपर पानी सिंचाई के लिए चाहिए।
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केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य 26.24 अरब घन मीटर भूजल का उपयोग हर साल सिंचाई के लिए कर रहा है। इस कारण भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यही कारण है कि पंजाब सरकार नहरी पानी का अधिकतम उपयोग सिंचाई के लिए करना चाहती है, जिस कारण वह हरियाणा को अतिरिक्त पानी को देने के लिए तैयार नहीं हो रही है।
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विशेषज्ञों की माने तो राजनीतिक के साथ ही इस विवाद के अन्य कारण भी हैं, जिससे यह और गहराता जा रहा है। रावी, ब्यास और सतलुज से हर साल पंजाब को 35 अरब घन मीटर के करीब पानी मिलता है, जिसका आगे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच बंटवारा होता है।
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पंजाब को प्रमुख रूप से सिंचाई के लिए सबसे अधिक पानी चाहिए। पिछले कुछ समय से सूबे में नहरी पानी का उपयोग बढ़ा है, जिस कारण दूसरे राज्यों को जाने वाले अतिरिक्त पानी पर सूबे ने रोक लगानी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों की माने तो पंजाब को 40 अरब घन मीटर से ऊपर पानी सिंचाई के लिए चाहिए।
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केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य 26.24 अरब घन मीटर भूजल का उपयोग हर साल सिंचाई के लिए कर रहा है। इस कारण भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यही कारण है कि पंजाब सरकार नहरी पानी का अधिकतम उपयोग सिंचाई के लिए करना चाहती है, जिस कारण वह हरियाणा को अतिरिक्त पानी को देने के लिए तैयार नहीं हो रही है।
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रिपोर्ट के अनुसार राज्य का वार्षिक जल पुनर्भरण 19.19 अरब घन मीटर है और इस तरह वार्षिक भूजल निष्कर्षण 17.63 अरब घन मीटर तक हो सकता है। लेकिन वार्षिक भूजल निष्कर्षण 27.66 अरब घन मीटर दर्ज किया गया है, जो 156.87 प्रतिशत है। इसी पर सरकार रोक लगाना चाहती है।
इन कारणों से पंजाब में बढ़ रहा नहरी पानी का उपयोग
पंजाब सरकार ने 2022 से 2025 तक नहरों और खालों को बहाल करने और अन्य बुनियादी ढांचे के कार्यों पर 4557 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 545 किलोमीटर लंबी 79 नहरों को दोबारा शुरू किया है, जिससे 41135 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे नहरी पानी का उपयोग बढ़ा है और पहले जो पानी दूसरे राज्यों को जा रहा था, उस पर रोक लगी है। पंजाब ने सरहिंद नहर व पटियाला फीडर की क्षमता बढ़ाई है।
पंजाब सरकार ने 2022 से 2025 तक नहरों और खालों को बहाल करने और अन्य बुनियादी ढांचे के कार्यों पर 4557 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 545 किलोमीटर लंबी 79 नहरों को दोबारा शुरू किया है, जिससे 41135 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे नहरी पानी का उपयोग बढ़ा है और पहले जो पानी दूसरे राज्यों को जा रहा था, उस पर रोक लगी है। पंजाब ने सरहिंद नहर व पटियाला फीडर की क्षमता बढ़ाई है।
सरहिंद फीडर नहर की रिलाइनिंग का प्रोजेक्ट पूरा किया गया है। देवीगढ़ डिवीजन की नौ नई नहरें तैयार की गई है, जिससे कृषि भूमि की सिंचाई का रास्ता साफ हुआ है। मालवा नहर बनने के बाद नहरी पानी का उपयोग और बढ़ जाएगा। यही कारण है कि पंजाब पानी के मामले पर हरियाणा की सहायता करने के लिए तैयार नहीं हो रहा है।
9 नई नहरें
देवीगढ़ डिवीजन की नौ नहरें तैयार करने से पटियाला, राजपुरा, देवीगढ़ व बहादुरगढ़ के 1 लाख 35 हजार 319 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई का रास्ता साफ हुआ है। साथ ही इससे 100 गांवों में भी नहरी पानी की आपूर्ति होगी। पहले इस डिवीजन से हरियाणा को अतिरिक्त पानी चला जाता था। इसी तरह मालेरकोटला, पठानकोट, मालवा, अमृतसर और अन्य क्षेत्रों में 9 नई नहरों का निर्माण किया जा रहा है।
देवीगढ़ डिवीजन की नौ नहरें तैयार करने से पटियाला, राजपुरा, देवीगढ़ व बहादुरगढ़ के 1 लाख 35 हजार 319 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई का रास्ता साफ हुआ है। साथ ही इससे 100 गांवों में भी नहरी पानी की आपूर्ति होगी। पहले इस डिवीजन से हरियाणा को अतिरिक्त पानी चला जाता था। इसी तरह मालेरकोटला, पठानकोट, मालवा, अमृतसर और अन्य क्षेत्रों में 9 नई नहरों का निर्माण किया जा रहा है।
मालवा नहर परियोजना पर चल रहा काम
पांच जिलों में दो लाख एकड़ क्षेत्र की सिंचाई के लिए 2300 करोड़ की लागत वाली मालवा नहर परियोजना पर काम शुरू किया गया है। 150 किलोमीटर यह नहर होगी। इससे बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, फिरोजपुर और श्री मुक्तसर साहिब के करीब दो लाख एकड़ क्षेत्र की सिंचाई में लाभ मिलेगा। यह नहर बनने के बाद पानी की मांग और बढ़ेगी। अभी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
पांच जिलों में दो लाख एकड़ क्षेत्र की सिंचाई के लिए 2300 करोड़ की लागत वाली मालवा नहर परियोजना पर काम शुरू किया गया है। 150 किलोमीटर यह नहर होगी। इससे बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, फिरोजपुर और श्री मुक्तसर साहिब के करीब दो लाख एकड़ क्षेत्र की सिंचाई में लाभ मिलेगा। यह नहर बनने के बाद पानी की मांग और बढ़ेगी। अभी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
21 मई से अगले साल के 20 मई तक लागू रहता बंटवारा
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) हर साल पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी का बंटवारा करता है, जो 21 मई से अगले साल के 20 मई तक लागू रहता है। पंजाब का तर्क है कि हरियाणा अपने हिस्से का पानी 31 मार्च तक इस्तेमाल कर चुका है, लेकिन बावजूद इसके सरकार ने उदारता दिखाते हुए 6 मार्च, 2025 से हरियाणा को प्रतिदिन 4000 क्यूसेक पानी देना शुरू कर दिया। सीएम मान के अनुसार, हरियाणा की आबादी तीन करोड़ है और उस हिसाब से राज्य के लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1700 क्यूसेक पर्याप्त है। हरियाणा अतिरिक्त 8500 क्यूसेक पानी प्रतिदिन की मांग कर रहा है। साफ है कि अतिरिक्त पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाएगा।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) हर साल पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी का बंटवारा करता है, जो 21 मई से अगले साल के 20 मई तक लागू रहता है। पंजाब का तर्क है कि हरियाणा अपने हिस्से का पानी 31 मार्च तक इस्तेमाल कर चुका है, लेकिन बावजूद इसके सरकार ने उदारता दिखाते हुए 6 मार्च, 2025 से हरियाणा को प्रतिदिन 4000 क्यूसेक पानी देना शुरू कर दिया। सीएम मान के अनुसार, हरियाणा की आबादी तीन करोड़ है और उस हिसाब से राज्य के लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1700 क्यूसेक पर्याप्त है। हरियाणा अतिरिक्त 8500 क्यूसेक पानी प्रतिदिन की मांग कर रहा है। साफ है कि अतिरिक्त पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाएगा।
इस तरह हो सकता विवाद का निपटारा
बीबीएमबी के पूर्व सचिव सतीश सिंगला के अनुसार पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। इसके समाधान के लिए तुरंत बोर्ड की बैठक बुलाई जानी चाहिए, जिसमें तीनों राज्यों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाए। मौजूदा हालात के हिसाब से हरियाणा को अतिरिक्त पानी दिया जा सकता है, क्योंकि पहले ऐसे हालातों में अतिरिक्त पानी दिया जाता रहा है। पंजाब की सहमति जरुरी है।
बीबीएमबी के पूर्व सचिव सतीश सिंगला के अनुसार पंजाब और हरियाणा के बीच पानी को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। इसके समाधान के लिए तुरंत बोर्ड की बैठक बुलाई जानी चाहिए, जिसमें तीनों राज्यों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाए। मौजूदा हालात के हिसाब से हरियाणा को अतिरिक्त पानी दिया जा सकता है, क्योंकि पहले ऐसे हालातों में अतिरिक्त पानी दिया जाता रहा है। पंजाब की सहमति जरुरी है।
पंजाब को गारंटी दी जा सकती है कि आगे भविष्य में अगर उसे पानी की जरुरत पड़ेगी तो बोर्ड की तरफ से उसे भी अतिरिक्त पानी प्रदान किया जाएगा। हर साल पंजाब को 35 अरब घन मीटर पानी मिलता है, जिसका आगे बंटवारा होता है। कई बार ऐसे हालात भी पैदा हुए, जब 40 अरब घन मीटर पानी आया और पाकिस्तान की तरफ अतिरिक्त पानी छोड़ना पड़ा। इस प्रकिय्रा पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए पानी का अधिकतम इस्तेमाल तीनों राज्यों में ही होना चाहिए।
गिर गया तीन बांधों को जलस्तर
| बांध | मौजूदा जलस्तर (फीट) | पिछले साल जलस्तर 26 अप्रैल 2024 तक |
| भाखड़ा बांध | 1557 | 1569 |
| पौंग बांध | 1293 | 1325 |
| रणजीत सागर बांध | 1642 | 1663 |