Punjab: सीएम भगवंत मान ने गवर्नर को भेजा 47 हजार करोड़ के कर्ज का विवरण, फिर उठाई आरडीएफ की मांग
मुख्यमंत्री भगवंत मान व राज्यपाल के बीच चल रहा विवाद सोमवार को अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की पटियाला की रैली में भी उठा था। रैली में मान ने कहा था कि राज्यपाल को 50 हजार करोड़ रुपये के कर्ज का हिसाब-किताब जल्द दिया जाएगा। पैसे खाना हमारी फितरत में नहीं है।
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पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित की ओर से हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान को भेजे पत्र में राज्य सरकार द्वारा डेढ़ साल के कार्यकाल में लिए गए 50 हजार करोड़ रुपये के कर्ज का हिसाब मांगे जाने के जवाब में मंगलवार को मुख्यमंत्री मान ने पत्र लिखकर अपनी सरकार द्वारा 47107 करोड़ रुपये के कर्ज का पूरा हिसाब राज्यपाल को भेज दिया।
पत्र में मुख्यमंत्री ने जहां कर्ज ली गई राशि के एक-एक पैसे का हिसाब गिनाया है, वहीं राज्यपाल से आग्रह किया है कि वह केंद्र सरकार की ओर बकाया 5630 करोड़ रुपये का ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) रिलीज कराएं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से पिछली सरकारों द्वारा लिए कर्ज का ब्याज माफ करवाने में भी मदद की गुहार लगाई।
मुख्यमंत्री की ओर से राज्यपाल को भेजे पत्र में बताया कि एक अप्रैल 2022 से 31 अगस्त 2023 तक उनकी सरकार द्वारा 47107 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया। इसमें नाबार्ड का कर्ज भी शामिल है, जो भारत सरकार की ओर से विशेष सहायता के रूप में राज्यों को दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एक अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 तक कुल 32447.12 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया, जिसमें से 19905 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में और 8435 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च में इस्तेमाल हुए। इसके अलावा पिछली सरकारों के बकाए भी इस कर्ज से चुकाए गए, जिनमें पनसप को बेलआउट के 350 करोड़, पीएससीएडीबी को बेलआउट के लिए 798 करोड़, आरडीएफ को बेलआउट के लिए 300 करोड़, पिछली सरकारों का बिजली सब्सिडी का बकाया 1804 करोड़, सिंकिंग फंड में निवेश 3000 करोड़, गन्ना किसानों का बकाया 724 करोड़ और केंद्रीय योजनाओं का लंबित बकाया 1750 करोड़ रुपये यानी कुल 37066 करोड़ रुपये चुकाए गए।
मुख्यमंत्री ने पत्र में बताया कि एक अप्रैल 2023 से 31 अगस्त 2023 तक राज्य सरकार ने 14464 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में लिए गए, जिसमें से 7111 करोड़ रुपये ब्याज के तौर पर और 1773 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के रूप में इस्तेमाल हुए। कर्ज की इस रकम से पिछली सरकारों के बकाए भी चुकाए गए, जिनमें आरडीएफ के लिए बेलआउट 545 करोड़, बिजली सब्सिडी का बकाया 752 करोड़, सिंकिंग फंड में निवेश 1000 करोड़, गन्ना किसानों का बकाया 284 करोड़ यानी कुल 11464 करोड़ खर्च किए गए।
'पिछली सरकारों के कर्ज का ब्याज हमने चुकाया'
मुख्यमंत्री ने पत्र में राज्यपाल को जानकारी दी कि उनकी सरकार ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में जितना कर्ज लिया, उसमें से 27016 करोड़ रुपये पिछली सरकारों द्वारा लिए गए कर्ज का ब्याज चुकाने में ही दे दिए। पिछली सरकारें कर्ज तो लेती रहीं लेकिन उन्होंने किसी भी मद में कर्ज की एवज में कोई भुगतान नहीं किया और ब्याज सहित कर्ज का सारा बोझ आप सरकार पर आ गया है। पिछली सरकारों ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू तो कर दिया लेकिन उसके लिए धन की व्यवस्था नहीं की। इसी तरह कॉलेजों में यूजीसी स्कूल, बिजली सब्सिडी, आटा-दाल योजना, गन्ना किसानों के बकाए आदि भी पिछली सरकारें छोड़ गई हैं, जिन्हें अब आप सरकार ने चुकाया है। आप सरकार ने सिंकिंग फंड में डेढ़ साल में 4000 करोड़ रुपये का निवेश किया है जबकि पिछली सरकारों ने इसमें केवल 2988 करोड़ रुपये ही डाले थे।
आप सरकार ने आमदनी के स्त्रोत भी बढ़ाए: मान
मुख्यमंत्री ने माना कि उनकी सरकार ने कर्ज लिया है लेकिन आमदनी के अपने स्त्रोतों में भी बढ़ोतरी की है। उन्होंने बताया कि साल 2022-23 में जीएसटी 18128 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है जो साल 2021-22 में 15542 करोड़ रुपये था। इस तरह जीएसटी कलेक्शन में 16.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। एक्साइज से 8437 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो बीते साल इस मद में केवल 6157 करोड़ रुपये मिल सके थे। वाहनों पर टैक्स से 2674 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि इससे पहले यह आमदनी 2359 करोड़ रुपये थी। पेपर और रजिस्ट्रेशन से 4227 करोड़ रुपये जुटाए गए जो उससे पिछले साल से 3308 करोड़ ही थे।