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पंजाब उपचुनावः कांग्रेस ने चारों विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की, देखिए सूची

Tue, 24 Sep 2019 09:39 AM IST
खुशबू गोयल हर्ष सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 24 Sep 2019 09:39 AM IST
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Punjab By Poll Election, Congress Declared Candidates on Four Constituency
कांग्रेस के उम्मीदवार - फोटो : अमर उजाला
पंजाब में 21 अक्टूबर को चार विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस हाईकमान ने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उम्मीदवारों के नामों संबंधी प्रस्ताव को सोमवार को मंजूरी दे दी। इसके अनुसार फगवाड़ा रिजर्व विधानसभा सीट से बलविंदर सिंह धालीवाल कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे।
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यह सीट भाजपा के विधायक सोमप्रकाश के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई है। धालीवाल पूर्व आईएएस अधिकारी हैं। मुकेरियां से इंदू बाला को टिकट दिया गया है, जो इस सीट पर कांग्रेस के दिवंगत विधायक रजनीश कुमार बब्बी की पत्नी हैं। बब्बी के निधन के कारण ही यह सीट खाली हुई है।
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दाखा से संदीप सिंह संधू कांग्रेस के प्रत्याशी बनाए गए हैं। यह सीट आम आदमी पार्टी के विधायक एचएस फूलका द्वारा इस्तीफा दिए जाने के कारण खाली हुई है। जलालाबाद सीट से कांग्रेस ने पंजाब यूथ कांग्रेस के पूर्व प्रधान रमिंदर आवला को उम्मीदवार बनाया है। यह सीट अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल के लोकसभा सदस्य चुने जाने के कारण खाली हुई है।
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शिअद ने दाखा से अयाली को बनाया उम्मीदवार
शिरोमणि अकाली दल ने एक बार फिर दाखा हलके से मनप्रीत अयाली पर भरोसा जताया है। पार्टी प्रधान सुखबीर बादल ने सोमवार को अयाली की उम्मीदवारी का एलान किया। अयाली 2012 में यहां से जीते थे, लेकिन 2017 में उन्हें आप के एचएस फूलका से हार मिली थी। शिअद ने जलालाबाद से अपना उम्मीदवार अब तक घोषित नहीं किया है। यह पार्टी का अभेद्य किला माना जाता है। यहां से प्रेम वलेचा और पूरन सिंह दावेदार हैं। पूरन सिंह प्रभावशाली राय सिख बिरादरी से हैं।

बलविंदर सिंह धालीवाल, सीट: फगवाड़ा रिजर्व
टिकट क्यों दिया : 
2005 बैच के आईएएस अधिकारी की छवि बेदाग है, कांग्रेस ने अपने तीन प्रमुख दावेदारों को दरकिनार कर धालीवाल को मैदान में उतारा

इंदू बाला, सीट: मुकेरियां  
टिकट क्यों दिया :
  विधायक रजनीश कुमार बब्बी के बीमार होने पर निर्वाचन क्षेत्र में अपने पति की राजनीतिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। पिछले माह ही बब्बी का निधन हुआ है।

संदीप सिंह संधू, सीट: दाखा
टिकट क्यों दिया:
2002 में नेवी से बतौर कैप्टन रिटायर हुए। 2008 से राजनीतिक सफर शुरू किया। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के सबसे ज्यादा नजदीकी माने जाते हैं।

रमिंदर आवला, सीट: जलालाबाद
क्यों चुना:
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ परिवार से अच्छी दोस्ती। राय सिख और कंबोज बिरादरी के अलावा यूथ में भी अच्छी पकड़ है। वे पंजाब के सबसे अमीर उद्योगपति हैं।

2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं बलविंदर सिंह धालीवाल

2005 बैच के आईएएस अधिकारी बलविंदर सिंह धालीवाल फगवाड़ा से कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे। उनकी छवि बेदाग है, यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने तीन प्रमुख दावेदारों को दरकिनार कर धालीवाल को मैदान में उतारा है। फगवाड़ा विधानसभा सीट पर टिकट को लेकर जोड़-तोड़ चल रहा था।

कांग्रेस से निकाल दिए जाने के बाद दोबारा पार्टी में आ चुके पूर्व विधायक तिरलोचन सिंह सूंढ, पूर्व विधायक जोगिंदर सिंह मान और बलबीर रानी सोढी के साथ-साथ बलविंदर सिंह धालीवाल का नाम भी चर्चा में था। धालीवाल शिअद भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी प्रमुख पदों पर रहे हैं।

अकाली दल की सरकार के समय धालीवाल को जालंधर में निगम कमिश्नर लगाया गया था। तरनतारन के डीसी रहने के बाद वह 2016 में फिरोजपुर के डीसी बने। कैप्टन सरकार बनने के बाद भी धालीवाल को फिरोजपुर में डीसी का अहम पद दिया गया था।

1961 में जन्मे बलविंदर सिंह धालीवाल मूल रूप से लुधियाना के रहने वाले हैं। पंजाब सरकार में बतौर पीसीएस काम कर चुके बीएस धालीवाल लंबे समय तक कई स्थानों पर एसडीएम भी रहे हैं। इसी कड़ी में उनकी पोस्टिंग फगवाड़ा में बतौर एसडीएम हुई थी, जिसके बाद उन्होंने फगवाड़ा के लोगों से अपना गहरा रिश्ता बना लिया था।

 

बाहरी प्रत्याशी संदीप संधू के लिए आसान नहीं होगी जीत की राह

विधानसभा हलका दाखा में होने जा रहे उप चुनाव दिलचस्प हो गए है। कांग्रेस ने रोपड़ से कैप्टन संदीप संधू पर दांव खेला है। कैप्टन संधू सीएम के सलाहकार है। एडवोकेट फूलका के कारण हलका दाखा के लोग के दिल में बाहरी प्रत्याशी के प्रति दिलचस्पी कम हो गई है। ऐसे में कैप्टन संधू के लिए जीत पाना इतनी आसान राह नहीं है। हालांकि संधू के लिए एक चीफ प्लस है कि उनके प्रत्याशी घोषित होने के बाद कांग्रेस के सभी नेताओं को साथ चलकर काम करना होगा। क्योंकि उनकी जीत पर सीधे सीएम की नजर रहेगी।

कांग्रेस प्रत्याशी कैप्टन संधू का पुश्तैनी गांव भाग सिंह वाला (फरीदकोट) में है लेकिन शिक्षा उन्होंने नाभा के स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद वह नेवी में चले गए। 2002 में नेवी से बतौर कैप्टन रिटायर हुए। इसके बाद से वे चंडीगढ़ में रह रहे है। दिसंबर 2008 में उन्होंने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। इस समय कैप्टन अमरिंदर सिंह के सबसे ज्यादा नजदीकी माने जाते हैं। अभी तक पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ाने का काम सौंपा था। यह पहली बार है कि वह खुद हलका चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
 

रमिंदर आवला को जाखड़ परिवार से दोस्ती की बदौलत मिली कांग्रेस की टिकट

रमिंदर आवला का कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ परिवार से पक्का दोस्ताना है, इसलिए रमिंदर को जाखड़ ने कांग्रेस की टिकट देकर जलालाबाद उपचुनाव से मैदान में उतारा है। रमिंदर 2005 से 2008 तक यूथ कांग्रेस पंजाब के अध्यक्ष रहे हैं। रमिंदर आवला परिवार और खेलमंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी परिवार के बीच कट्टर दुश्मनी है, जबकि 2002 में गुरुहरसहाए से सोढ़ी को विधानसभा चुनाव लड़वाने वाला आवला परिवार ही था। रमिंदर आवला यूथ कांग्रेस पंजाब के जनरल सेक्रेटरी भी रह चुके हैं और फिरोजपुर से कांग्रेस प्रधान थे।

रमिंदर की राय सिख और कंबोज बिरादरी के अलावा यूथ में भी अच्छी पकड़ है। वे पंजाब के सबसे अमीर उद्योगपति हैं। देशभर में आवला परिवार के सोलर प्लांट और पराली से बिजली बनाने के कई प्रोजेक्ट लगे हैं, एक प्रोजेक्ट फिरोजपुर में भी लगा है। रमिंदर हमेशा कांग्रेस में रहे हैं। रमिंदर के पिता स्व. हरभजन लाल आवला सेंट्रल वेयर हाउस के दस साल तक डायरेक्टर रहे। इसके अलावा गुरुहरसहाए नगर काउंसिल के चार बार प्रधान रहे।

लेकिन उत्तर प्रदेश में बिजली प्रोजेक्ट और अन्य उद्योग लगाने के खातिर हरभजन लाल आवला बसपा में चले गए थे और फिरोजपुर से लोकसभा का चुनाव बसपा से लड़े थे, जिन्हें बहुत कम वोट मिले थे। जानकारों के मुताबिक, रमिंदर आवला परिवार और जाखड़ परिवार का संयुक्त बिजनेस भी है। चर्चा है कि आवला परिवार का बादल परिवार के साथ भी कई बिजनेस हैं। बता दें कि राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को 2002 में गुरुहरसहाए से विधानसभा चुनाव लड़वाने वाले भी आवला फैमिली थी।

नगर काउंसिल गुरुहरसहाए में आवला परिवार का कब्जा था, लेकिन सोढ़ी ने किसी और को नगर काउंसिल का प्रधान बना दिया, उसी दिन से आवला परिवार और सोढ़ी के बीच कट्टर दुश्मनी पैदा हो गई।
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