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पंजाब में सरकार बदली तो देखिए चंडीगढ़ पर क्या असर पड़ेगा
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 11 Mar 2017 01:14 AM IST
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पंजाब विस चुनाव
- फोटो : File Photo
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एग्जिट पोल के अनुसार अगर पंजाब में कांग्रेस या आप की सरकार बनती है तो उसका चंडीगढ़ की राजनीति पर भी असर पड़ेगा। केंद्र सरकार शहर के लिए अलग से प्रशासक की नियुक्ति भी कर सकती है।
पिछले साल अगस्त माह में केंद्र सरकार ने पंजाब के गवर्नर को शहर के प्रशासक के चार्ज से मुक्त कर दिया था। केजे अल्फोंस को शहर का प्रशासक नियुक्त किया था जबकि वीपी सिंह बदनौर को सिर्फ पंजाब का गवर्नर बनाया गया था। लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के हस्तक्षेप के बाद केंद्र सरकार को फैसला पलटना पड़ा और पंजाब के गवर्नर को ही प्रशासक का चार्ज भी दे दिया गया।
केंद्र सरकार के अलावा चंडीगढ़ की भाजपा भी शहर के लिए अलग से प्रशासक चाहती है। ऐसे में पंजाब में अगर कांग्रेस और आप की सरकार बनती है तो यह बदलाव होने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि विपक्ष की सरकार बनने पर पंजाब अकाली और भाजपा को इससे कोई मतलब नहीं रह जाएगा कि पंजाब के गवर्नर के पास ही शहर के प्रशासक का चार्ज हो।
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अफसरशाही में भी होगा बदलाव
पंजाब में कांग्रेस या आप की सरकार बनने के बाद शहर की अफसरशाही में भी बदलाव होगा, क्योंकि चंडीगढ़ में पंजाब को 60 और हरियाणा 40 प्रतिशत अधिकारी नियुक्त करवाने का हक है। इस समय वित्त सचिव, एसएसपी, स्पेशल सेक्रेटरी फाइनेंस का पद खाली पड़ा है। इन पदों पर पंजाब के अधिकारी नियुक्त होंगे। ऐसे में नई सरकार अपने पसंदीदा अधिकारी को शहर में भेजेगी। जबकि अकाली सरकार के करीबी कई अधिकारी सालों से चंडीगढ़ में डटे हैं। उनकी वापसी हो सकती है।
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पिछले साल अगस्त माह में केंद्र सरकार ने पंजाब के गवर्नर को शहर के प्रशासक के चार्ज से मुक्त कर दिया था। केजे अल्फोंस को शहर का प्रशासक नियुक्त किया था जबकि वीपी सिंह बदनौर को सिर्फ पंजाब का गवर्नर बनाया गया था। लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के हस्तक्षेप के बाद केंद्र सरकार को फैसला पलटना पड़ा और पंजाब के गवर्नर को ही प्रशासक का चार्ज भी दे दिया गया।
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केंद्र सरकार के अलावा चंडीगढ़ की भाजपा भी शहर के लिए अलग से प्रशासक चाहती है। ऐसे में पंजाब में अगर कांग्रेस और आप की सरकार बनती है तो यह बदलाव होने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि विपक्ष की सरकार बनने पर पंजाब अकाली और भाजपा को इससे कोई मतलब नहीं रह जाएगा कि पंजाब के गवर्नर के पास ही शहर के प्रशासक का चार्ज हो।
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अफसरशाही में भी होगा बदलाव
पंजाब में कांग्रेस या आप की सरकार बनने के बाद शहर की अफसरशाही में भी बदलाव होगा, क्योंकि चंडीगढ़ में पंजाब को 60 और हरियाणा 40 प्रतिशत अधिकारी नियुक्त करवाने का हक है। इस समय वित्त सचिव, एसएसपी, स्पेशल सेक्रेटरी फाइनेंस का पद खाली पड़ा है। इन पदों पर पंजाब के अधिकारी नियुक्त होंगे। ऐसे में नई सरकार अपने पसंदीदा अधिकारी को शहर में भेजेगी। जबकि अकाली सरकार के करीबी कई अधिकारी सालों से चंडीगढ़ में डटे हैं। उनकी वापसी हो सकती है।
केंद्र सरकार यूटी में तैनात कर सकती है नया प्रशासक
राजनीति में बदलाव संभव
अगर पंजाब में आप की सरकार बनती है तो चंडीगढ़ में भी आम आदमी पार्टी मजबूत होगी। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा की तरह आप भी शहर में सक्रिय हो जाएगी। इससे पहले लोकसभा चुनाव में आप ने गुल पनाग को उम्मीदवार बनाया था लेकिन चुनाव के बाद से वह शहर के परिदृश्य से गायब हैं। उन्होंने शहर की समस्याओं से संबंधित कोई भी मामला प्रशासन के समक्ष नहीं उठाया हालांकि आप के कुछ कार्यकर्ता जरूर शहर में सक्रिय हैं लेकिन पार्टी ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव से अपनी दूरी बनाई रखी।
अगर पंजाब में आप की सरकार बनी तो चंडीगढ़ के कई कांग्रेसी नेता आप में शामिल हो सकते हैं। दूसरी तरफ अगर पंजाब में कांग्रेस की सरकार आती है तो इससे चंडीगढ़ के कांग्रेस के नेताओं में उत्साह पैदा हो जाएगा, जो कि नगर निगम चुनाव परिणाम आने के बाद ठंडा हो गया था। चंडीगढ़ कांग्रेस यूनिट में एक बार मजबूती आ जाएगी और कांग्रेस ढ़ाई साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर देगी। पंजाब के परिणाम का असर आगामी लोकसभा चुनाव में शहर की सीट पर भी असर पड़ेगा।
अल्फोंस को नई दी कोई जिम्मेवारी
केंद्र सरकार केजे अल्फोंस को अडस्ट करना चाहती है। उनको काफी तजुर्बा है। वह अपनी प्रशासनिक क्षमता को केरल और दिल्ली में साबित कर चुके हैं। अल्फोंस रिटायर्ड आईएएस अधिकारी होने के साथ साथ भाजपा के नेता भी है।
अभी पंजाब के गवर्नर प्रो बीपी सिंह बदनौर शहर के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद अगर केंद्र सरकार की ओर से सिर्फ शहर के लिए ही अलग से प्रशासक लगाया जाता है तो और भी अच्छा हो जाएगा। अलग से प्रशासक नियुक्त होने से हर किसी के लिए मिलना आसान हो जाएगा जिनका कार्यालय यूटी में ही होगा। जिससे फाइल गवर्नर हाउस भेजने से छुटकारा मिल जाएगा।
हितेश पुरी, वाइस चेयरमैन, फासवेक
अगर पंजाब में आप की सरकार बनती है तो चंडीगढ़ में भी आम आदमी पार्टी मजबूत होगी। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा की तरह आप भी शहर में सक्रिय हो जाएगी। इससे पहले लोकसभा चुनाव में आप ने गुल पनाग को उम्मीदवार बनाया था लेकिन चुनाव के बाद से वह शहर के परिदृश्य से गायब हैं। उन्होंने शहर की समस्याओं से संबंधित कोई भी मामला प्रशासन के समक्ष नहीं उठाया हालांकि आप के कुछ कार्यकर्ता जरूर शहर में सक्रिय हैं लेकिन पार्टी ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव से अपनी दूरी बनाई रखी।
अगर पंजाब में आप की सरकार बनी तो चंडीगढ़ के कई कांग्रेसी नेता आप में शामिल हो सकते हैं। दूसरी तरफ अगर पंजाब में कांग्रेस की सरकार आती है तो इससे चंडीगढ़ के कांग्रेस के नेताओं में उत्साह पैदा हो जाएगा, जो कि नगर निगम चुनाव परिणाम आने के बाद ठंडा हो गया था। चंडीगढ़ कांग्रेस यूनिट में एक बार मजबूती आ जाएगी और कांग्रेस ढ़ाई साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर देगी। पंजाब के परिणाम का असर आगामी लोकसभा चुनाव में शहर की सीट पर भी असर पड़ेगा।
अल्फोंस को नई दी कोई जिम्मेवारी
केंद्र सरकार केजे अल्फोंस को अडस्ट करना चाहती है। उनको काफी तजुर्बा है। वह अपनी प्रशासनिक क्षमता को केरल और दिल्ली में साबित कर चुके हैं। अल्फोंस रिटायर्ड आईएएस अधिकारी होने के साथ साथ भाजपा के नेता भी है।
अभी पंजाब के गवर्नर प्रो बीपी सिंह बदनौर शहर के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद अगर केंद्र सरकार की ओर से सिर्फ शहर के लिए ही अलग से प्रशासक लगाया जाता है तो और भी अच्छा हो जाएगा। अलग से प्रशासक नियुक्त होने से हर किसी के लिए मिलना आसान हो जाएगा जिनका कार्यालय यूटी में ही होगा। जिससे फाइल गवर्नर हाउस भेजने से छुटकारा मिल जाएगा।
हितेश पुरी, वाइस चेयरमैन, फासवेक