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Alert: सबसे ज्यादा पानी बर्बाद कर रहे पंजाब और हरियाणा, खड़ा हो सकता है जल संकट
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 09 Nov 2018 03:39 PM IST
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जल दोहन के मामले में पंजाब देश में सबसे आगे है। यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में यह राज्य बहुत बड़े जल संकट की चपेट में आ जाएगा। हरियाणा में भी काफी पानी बर्बाद किया गया है। यह खुलासा भूगर्भ जल बोर्ड के हालिया सर्वे में हुआ है। भूगर्भ जल बोर्ड ने पंजाब में 300 मीटर गहराई तक जल का सर्वेक्षण कराया है। सर्वे में पाया गया है कि कृषि प्रधान राज्य होने के कारण पंजाब ने जल दोहन के मामले में देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
राज्य के लगभग सभी जिलों में भूजल दोहन समान रूप से हो रहा है। इससे भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। मोगा और कपूरथला जैसे जिलों में तो किसान भूजल रिचार्ज की मात्रा से दो गुना अधिक पानी निकाल लेते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में करीब 80 फीसदी पानी जमीन के नीचे से और 20 फीसदी नदियां या फिर नालों से निकालकर कृषि कार्यों में प्रयोग किया जा रहा है।
इससे भूजल स्तर में अब तक 24 मीटर तक की गिरावट आ चुकी है, जोकि किसी राज्य के वॉटर लेवल के हिसाब से काफी खतरनाक है। पंजाब में इस समय 14.1 लाख ट्यूबवेल हैं। हरियाणा में भी कमोबेश जल दोहन की यही स्थिति है। यदि हरियाणा में किसी स्थान पर 100 क्यूबिक जल जमीन के अंदर संचित हो रहा है, तो उसमें 130 क्यूबिक लीटर पानी कृषि कार्यों के प्रयोग के लिए निकाला जा रहा है। चंडीगढ़ की बात करें तो यहां वर्ष 2005 में औसतन भूगर्भ जलस्तर 34 मीटर था, जोकि अब 10 मीटर नीचे गिरकर 42 मीटर हो गया।
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‘पंजाब और हरियाणा में भूगर्भ जल सर्वेक्षण का काम लगभग पूरा हो चुका है। चंडीगढ़ में सर्वे का काम अंतिम दौर में है। इनमें पंजाब के आंकड़े भयावह हैं।’
- अनूप भटनागर (क्षेत्रीय निदेशक केंद्रीय भूगर्भ बोर्ड, चंडीगढ़)
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राज्य के लगभग सभी जिलों में भूजल दोहन समान रूप से हो रहा है। इससे भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। मोगा और कपूरथला जैसे जिलों में तो किसान भूजल रिचार्ज की मात्रा से दो गुना अधिक पानी निकाल लेते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में करीब 80 फीसदी पानी जमीन के नीचे से और 20 फीसदी नदियां या फिर नालों से निकालकर कृषि कार्यों में प्रयोग किया जा रहा है।
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इससे भूजल स्तर में अब तक 24 मीटर तक की गिरावट आ चुकी है, जोकि किसी राज्य के वॉटर लेवल के हिसाब से काफी खतरनाक है। पंजाब में इस समय 14.1 लाख ट्यूबवेल हैं। हरियाणा में भी कमोबेश जल दोहन की यही स्थिति है। यदि हरियाणा में किसी स्थान पर 100 क्यूबिक जल जमीन के अंदर संचित हो रहा है, तो उसमें 130 क्यूबिक लीटर पानी कृषि कार्यों के प्रयोग के लिए निकाला जा रहा है। चंडीगढ़ की बात करें तो यहां वर्ष 2005 में औसतन भूगर्भ जलस्तर 34 मीटर था, जोकि अब 10 मीटर नीचे गिरकर 42 मीटर हो गया।
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‘पंजाब और हरियाणा में भूगर्भ जल सर्वेक्षण का काम लगभग पूरा हो चुका है। चंडीगढ़ में सर्वे का काम अंतिम दौर में है। इनमें पंजाब के आंकड़े भयावह हैं।’
- अनूप भटनागर (क्षेत्रीय निदेशक केंद्रीय भूगर्भ बोर्ड, चंडीगढ़)