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किसानों की दुर्दशा पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, शादी का खर्च ले रहा किसानों की जान

Wed, 19 Jul 2017 09:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 19 Jul 2017 09:39 AM IST
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Punjab and haryana highcourt on Farmer suicide in punjab
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
किसानों के सुसाइड मामले में जनहित याचिका के माध्यम से उठाए गए इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि खेती का लोन लेकर किसान बच्चों की शादी करवाता है। इसके बाद कर्ज न चुका पाने के चलते आत्महत्या को मजबूर हो जाता है। सरकार ने इस बारे में क्यों आंखें मूंदी हैं और क्यों नहीं खर्च और मेहमानों की संख्या को सीमित किया जाता। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी किसानों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की। 
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए पंजाब में किसानों और खेत मजदूरों की आत्महत्याओं का सिलसिला खत्म न होने की बात कही गई थी। याची ने कहा था कि सरकार बदलने पर भी फर्क नहीं पड़ा और कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के पहले महीने 16 तो दूसरे महीने 26 किसान आत्महत्या को मजबूर हुए।
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याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने वर्ष 2015 में भी राज्य में किसानों द्वारा की जा रही आत्म-हत्याओं को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याची मलकीत सिंह की ओर से कहा गया था कि पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना व अन्य संस्थानों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब में सन 2000 से लेकर अब तक कुल 10 हजार से ज्यादा किसान और खेत मजदूर आत्महत्या कर चुके हैं। ऐसे में इस मामले में यह देखा जाना चाहिए कि ऐसे कौन से कारक हैं जिनके चलते किसानों और खेत मजदूरों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 
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स्थिति नहीं सुधरने पर एक बार फिर से दाखिल हुई है याचिका

Punjab and haryana highcourt on Farmer suicide in punjab
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
जुलाई 2015 में हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब सरकार को मामले को गंभीरता से लेते हुए इसके हल के लिए ठोस नीति बनाने के आदेश दिए थे। अब दोबारा अर्जी दायर कर कहा है कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई नीति ही नहीं बनाई। जबकि इसके लिए उन्होंने सरकार को मांगपत्र भी सौंपा था।

 याचिका पर हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा, किसानों की आत्म-हत्याओं को लेकर हर कोई चिंतित है। रोज अखबारों और मीडिया में इसकी खबरे आ रही हैं। लेक्चर दिए जा रहे हैं। लेकिन इस समस्या को लेकर एक भी ढंग की स्टडी नहीं की गई है। यह भी देखने में आता है कि किसान को लोन लेते हैं । कई बार कर्ज की उस राशि को शादियों और ट्रैक्टरों पर खर्च किया जाता है।  क्यों सरकार इस दिशा में कार्रवाई नहीं करती है। इस पर सरकारी वकील ने कहा की वह इस पर कुछ नहीं कह सकते हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार इतना तो कर ही सकती है कि शादियों पर किए जाने वाले खर्च को सीमित करने के निर्देश और मेहमानों की संख्या तय कर दे। हाईकोर्ट ने कहा कि यह समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। लिहाजा सरकार को इस दिशा में ठोस नीति बनाकर कार्रवाई करनी होगी। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई पर सरकार को इस दिशा में की जा रही कार्रवाई की जानकारी देने के आदेश दे दिए हैं।
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