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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा: बुजुर्ग मां-बाप की देखभाल करना नैतिक ही नहीं बल्कि बाध्य कर्तव्य भी है

Thu, 22 Jul 2021 01:41 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 22 Jul 2021 01:41 AM IST
सार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 76 साल की विधवा मां के खिलाफ दाखिल बेटे की याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना बाध्य कर्तव्य है। इसके लिए हाईकोर्ट ने मेंटीनेंस ऑफ पेरेंट्स एंड वेलफेयर ऑफ सीनियर सिटीजन एक्ट का हवाला दिया। 

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Punjab and Haryana High Court said taking care of elderly parents is bounden duty
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एकल बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए बेटे द्वारा 76 वर्षीय मां के खिलाफ दाखिल याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि बुजुर्ग अभिभावकों की देखभाल करना नैतिक ही नहीं बल्कि मेंटीनेंस ऑफ पेरेंट्स एंड वेलफेयर ऑफ सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत बाध्य कर्तव्य भी है।

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याचिका दाखिल करते हुए बेटे ने बताया कि फतेहाबाद में उसकी मां ने मेंटीनेंस ऑफ पेरेंट्स एंड वेलफेयर ऑफ सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि याची ने उससे दुकान ट्रांसफर करने को कहा था लेकिन धोखे से मकान भी ट्रांसफर करवा लिया और अब वह न तो उनकी देखभाल करता है और उल्टा उसे प्रताड़ित किया जाता है। 
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शिकायत पर एसडीएम ने मां द्वारा बेटे के नाम की गई मकान और दुकान की ट्रांसफर डीड को खारिज कर दिया था और याची को आदेश दिया था कि वह अपनी मां को हर माह 2 हजार रुपये गुजारा भत्ता दे। अपील पर सुनवाई करते हुए डीसी ने एसडीएम के आदेश को खारिज करते हुए याची को राहत दे दी। 
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याची की मां ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की तो सिंगल बेंच ने डीसी के फैसले को खारिज करते हुए एसडीएम के आदेश को ही बरकरार रखा। अपील दाखिल करते हुए अब याची ने सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा कि याची की यह दलील की एसडीएम ने याची की मां को मांग से ज्यादा दिया जो अधिकार क्षेत्र के बाहर है सही नहीं है, क्योंकि एक्ट के तहत उसे संज्ञान लेने का अधिकार है। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि एसडीएम के आदेश में कोई खामी नहीं है। ऐसे में याची को कोई राहत नहीं दी जा सकती।

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