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दुष्कर्म के बाद की थी मासूम की हत्या, हाईकोर्ट ने कहा- 20 साल से पहले दोषी को आजादी नहीं
Mon, 02 Dec 2019 10:22 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 02 Dec 2019 10:22 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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तेरह साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद निर्ममता से हत्या कर शव को नहर में फेंकने के मामले में हाईकोर्ट ने दोषी की सजा माफी की याचिका ठुकरा दी। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराध के लिए दोषी को 20 साल की सजा जेल में काटनी ही होगी। इसके साथ ही यदि छुट्टियां जोड़ी जाएं तो यह सजा 25 वर्ष की बनती है।
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पानीपत निवासी पवन कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए उम्रकैद की सजा की माफी के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। याची ने कहा था कि वह 16 साल तीन माह 16 दिन की सजा काट चुका है। ऐसे में हरियाणा सरकार की नीति के तहत उसका मामला 14 साल के बाद सजा माफी पर विचार का हकदार है। इसके विरोध में हरियाणा सरकार ने कहा कि याची का कृत्य अति क्रूरता वाला है और इसी आधार पर सरकार ने सजा माफी पर विचार न करने का फैसला लिया है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या से जुड़ा है। सुबूत मिटाने के लिए याची ने पीड़िता को नहर में फेंक दिया था। इस प्रकार के मामले जघन्य अपराधों की श्रेणी में आते हैं और ऐसे में याची की दया याचिका पर विचार न करने का फैसला सही है। हाईकोर्ट ने अब स्पष्ट कर दिया कि याची को 20 साल की जेल की सजा काटनी ही होगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याची को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया।
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