तारीख पर तारीख: इंसाफ के इंतजार में बीत गए तीन दशक, अब भी 1065 मामले विचाराधीन
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जजों का संकट है। कुल 85 पद स्वीकृति मगर 57 जज ही मौजूद हैं। इस साल छह जजों को सेवानिवृत्त होना है। जजों की कम संख्या का असर मामलों की सुनवाई पर पड़ रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जजों की अपर्याप्त संख्या के कारण मिल रही तारीख पर तारीख के कारण 1065 मामले ऐसे हैं जो 30 वर्ष से अधिक का समय बीतने के बावजूद विचाराधीन हैं। इसके साथ ही कुल लंबित मामलों का 4.7 प्रतिशत यानी 20618 मामले ऐसे हैं जो 20 से 30 वर्ष से विचाराधीन हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में कुल 4,41,188 मामले विचाराधीन हैं और इनमें से 1,65,386 आपराधिक मामले जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े हैं।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जजों के 85 स्वीकृत पद हैं जबकि वर्तमान में केवल 57 जज ही कार्यरत हैं। ऐसे में हाईकोर्ट फिलहाल 28 जजों की कमी झेल रहा है। इस साल इन 57 में से 6 हाईकोर्ट जज सेवानिवृत्ति होने जा रहे हैं, जिससे जजों की कमी का संकट और गहरा सकता है। जजों की कमी का ही नतीजा है कि बीते वर्ष जहां 20 से 30 वर्ष पुराने मामलों की संख्या 16633 थी। वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 20,618 हो गई।
वर्तमान में हरियाणा व पंजाब के नौ जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को हाईकोर्ट के जज के तौर पर पदोन्नत किया जाना है लेकिन इन नियुक्तियों में लंबी प्रक्रिया के चलते समय लगने की संभावना है। जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया लंबी और समय लेने वाली है। हाईकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद प्रस्तावित नामों को राज्य और राज्यपालों की मंजूरी मिलती है। इसके बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के साथ प्रस्तावित नाम सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के समक्ष पहुंचते हैं और वहां से मजूरी मिलने के बाद इन्हें केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेजा जाता है। कानून मंत्रालय से मंजूरी के बाद राष्ट्रपति के पास नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर को भेजा जाता है। यह प्रक्रिया पूरी करने में अक्सर महीनों का समय लग जाता है।
लंबित मामलों का प्रतिशत
नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड के अनुसार 14.4 प्रतिशत यानी 63,515 मामले पिछले एक से तीन साल से विचाराधीन हैं। पिछले तीन से पांच वर्षों से विचाराधीन मामलों की संख्या 55,909 (12.68 प्रतिशत) है। पिछले 5 से 10 साल से विचाराधीन मामलों की संख्या 1,26,893 या 28.77 है। पिछले 10 से 20 साल के बीच 99,243 या 22.5 प्रतिशत मामले विचाराधीन हैं। वरिष्ठ नागरिकों की ओर से दायर 31,534 मामले विचाराधीन है जिनमें से 23,240 दीवानी और 8,294 आपराधिक हैं। वहीं महिलाओं की ओर से दायर 22,676 मामलों में 15,033 दीवानी और 7,643 आपराधिक मामले विचाराधीन हैं। हाईकोर्ट में संभवत सबसे पुराना मामला 1976 में रछपाल सिंह द्वारा गुरदासपुर क्षेत्र से संबंधित एक भूमि मामले में सोहन सिंह के खिलाफ दायर की गई नियमित दूसरी अपील है।