{"_id":"5d9f5b0a8ebc3e013371d498","slug":"punjab-and-haryana-high-court-dismissed-petition-of-divorce","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट ने कहा-पति-पत्नी में कभी-कभार झगड़ा और अभद्र भाषा तलाक का आधार नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट ने कहा-पति-पत्नी में कभी-कभार झगड़ा और अभद्र भाषा तलाक का आधार नहीं
Thu, 10 Oct 2019 09:55 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 10 Oct 2019 09:55 PM IST
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि पति से कभी-कभार लड़ाई या पत्नी द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल क्रूरता और तलाक का आधार नहीं है। साथ ही हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवाने को भी क्रूरता की श्रेणी के बाहर करार दिया है। याचिका दाखिल करते हुए सिरसा निवासी पति ने बताया कि उसका विवाह फरवरी 2008 में हुआ था।
विज्ञापन
शादी के बाद से ही पत्नी उससे व उसके घरवालों के साथ बुरा सलूक करने लगी। सार्वजनिक रूप से कई बार उसे बेइज्जत किया गया। इसके बाद भी जब उसे संतोष नहीं हुआ तो वह घर छोड़कर अक्तूबर 2008 में अपने मायके चली गई। इस दौरान उसने घरेलू हिंसा और दहेज से जुड़ा केस भी दर्ज करवाया जिसमें वह निर्दोष साबित हुआ। वहीं पत्नी की ओर से कहा गया कि दहेज की मांग करते हुए विवाह के बाद उसे बहुत परेशान किया गया। बढ़ते अत्याचार के कारण वह अपने मायके लौटने को मजबूर हुई।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक न देने के फैसले को सही मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि कभी कभार लड़ाई वैवाहिक जीवन का हिस्सा है। पत्नी द्वारा पति के खिलाफ केस दर्ज करवाना भी क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता है। ऐसे में तलाक के लिए बनाए गए आधार निराधार हैं।
विज्ञापन