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पीयू ने शौचालय पर लाखों खर्च किए.. फिर भी कई वर्षों से लगा है ताला
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय भले ही अपना खजाना खाली होने का राग अलाप रहा हो लेकिन पैसे ऐसी जगहों पर खर्च किए जा रहे हैं जिनका कोई उपयोग नहीं। 16 लाख रुपये से अधिक लागत से शौचालय का निर्माण करवाया गया लेकिन जब से बना है, तब से ताला लगा हुआ है। सवाल खड़ा हुआ है कि आखिरी पीयू ने इतनी बड़ी रकम इस पर खर्च क्यों की थी।
पीयू के सेक्टर-14 स्थित बाजार के दुकानदारों की सुविधाओं के लिए यह बनाया गया था। इसका बाकायदा प्रस्ताव पास हुआ और निर्माण पूरा कर दिया गया। उसके बाद यह दुकानदारों को हैंडओवर करना था लेकिन इसकी प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई। पीयू का कहना है कि इसके रखरखाव की जिम्मेदारी दुकानदार लें तो इसका ताला खोला जा सकता है। पीयू का कहना है कि यह दुकानदारों की सुविधाओं के लिए बनाया गया है तो वही रखरखाव करें।
निर्माण करने वाले और पीयू प्रशासन दोनों सवालों के घेरे में
सूत्रों का कहना है कि इसके निर्माण में खेल हुआ है। यदि दुकानदार रखरखाव के लिए मना कर रहे हैं तो यह सवाल निर्माण से पहले उठना चाहिए था। पीयू को पहले ही दुकानदारों से यह बात पूछ लेनी चाहिए थी। यदि दुकानदार उस समय रखरखाव के लिए मना कर देते तो पीयू इतनी बड़ी रकम इस शौचालय पर क्यों खर्च करती। सवालों के घेरे में पीयू प्रशासन भी है और निर्माण करने वाले भी। यह जांच का विषय है। इस प्रकरण को कर्मचारी भी प्रमुखता से उठा रहे हैं।
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पीयू के सेक्टर-14 स्थित बाजार के दुकानदारों की सुविधाओं के लिए यह बनाया गया था। इसका बाकायदा प्रस्ताव पास हुआ और निर्माण पूरा कर दिया गया। उसके बाद यह दुकानदारों को हैंडओवर करना था लेकिन इसकी प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई। पीयू का कहना है कि इसके रखरखाव की जिम्मेदारी दुकानदार लें तो इसका ताला खोला जा सकता है। पीयू का कहना है कि यह दुकानदारों की सुविधाओं के लिए बनाया गया है तो वही रखरखाव करें।
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निर्माण करने वाले और पीयू प्रशासन दोनों सवालों के घेरे में
सूत्रों का कहना है कि इसके निर्माण में खेल हुआ है। यदि दुकानदार रखरखाव के लिए मना कर रहे हैं तो यह सवाल निर्माण से पहले उठना चाहिए था। पीयू को पहले ही दुकानदारों से यह बात पूछ लेनी चाहिए थी। यदि दुकानदार उस समय रखरखाव के लिए मना कर देते तो पीयू इतनी बड़ी रकम इस शौचालय पर क्यों खर्च करती। सवालों के घेरे में पीयू प्रशासन भी है और निर्माण करने वाले भी। यह जांच का विषय है। इस प्रकरण को कर्मचारी भी प्रमुखता से उठा रहे हैं।
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