{"_id":"8b703702c0b23b64657992cfe3614b69","slug":"pseb-grant-audit-education-department-chandigarh","type":"story","status":"publish","title_hn":" 9 दिन में देना होगा ग्रांटों के खर्चे का हिसाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
9 दिन में देना होगा ग्रांटों के खर्चे का हिसाब
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 17 Dec 2013 05:17 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिक्षा विभाग ने जिले के सरकारी स्कूलों पर शिकंजा कस दिया है। विभाग ने स्कूलों को नोटिस जारी कर सालभर में जारी की ग्रांटों का हिसाब मांगा है।
स्कूलों को नौ दिनों के अंदर-अंदर ग्रांटों के प्रयोग का सर्टिफिकेट डीईओ कार्यालय में जमा करना होगा। वरना स्कूल प्रिंसिपलों के खिलाफ विभाग द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले के प्रत्येक स्कूल को सालाना 50 हजार रुपये ग्रांट जारी की गई थी। माइनर रिपेयर ग्रांट 25 हजार रुपये जारी हुई थी।
साल खत्म होने को आ गया। इसके बाद भी स्कूलों ने ग्रांटों के खर्च का कोई हिसाब शिक्षा विभाग को नहीं दिया है। विभाग ने कड़ा नोटिस लेते हुए स्कूलों का सालाना ग्रांटों के खर्च का हिसाब देने को कहा है।
विज्ञापन
स्कूलों को 25 दिसंबर तक डीईओ ऑफिस में ग्रांटों के खर्च का सर्टिफिकेट जमा करवाना होगा। जबकि माइनर रिपेयर ग्रांट का हिसाब स्कूल जनवरी तक दे पाएंगे।
विभाग ने साफ किया है कि जो प्रिंसिपल ग्रांटों का हिसाब नहीं देंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ये आदेश डीजीएसई की तरफ से जारी किए गए हैं। जिक्र योग है कि जिले में 400 के करीब सरकारी स्कूल हैं। जिन्हें इस समय अवधि में ग्रांटों के खर्च का हिसाब देना होगा।
ग्रांटों का नहीं हो रहा सही काम में प्रयोग
शिक्षा विभाग की जांच में सामने आया है कि कई स्कूलों में जारी हुई ग्रांटों का सही प्रयोग नहीं हो रहा है। जिस काम के लिए ग्रांट भेजी जा रही है, उसे उन कामों में प्रयोग ही नहीं किया जा रहा है। विभाग ने स्कूलों को साफ किया है कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर भविष्य में किसी स्कूल में ग्रांटों का दुरुपयोग होता है तो दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
स्कूलों को नौ दिनों के अंदर-अंदर ग्रांटों के प्रयोग का सर्टिफिकेट डीईओ कार्यालय में जमा करना होगा। वरना स्कूल प्रिंसिपलों के खिलाफ विभाग द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले के प्रत्येक स्कूल को सालाना 50 हजार रुपये ग्रांट जारी की गई थी। माइनर रिपेयर ग्रांट 25 हजार रुपये जारी हुई थी।
विज्ञापन
साल खत्म होने को आ गया। इसके बाद भी स्कूलों ने ग्रांटों के खर्च का कोई हिसाब शिक्षा विभाग को नहीं दिया है। विभाग ने कड़ा नोटिस लेते हुए स्कूलों का सालाना ग्रांटों के खर्च का हिसाब देने को कहा है।
विज्ञापन
स्कूलों को 25 दिसंबर तक डीईओ ऑफिस में ग्रांटों के खर्च का सर्टिफिकेट जमा करवाना होगा। जबकि माइनर रिपेयर ग्रांट का हिसाब स्कूल जनवरी तक दे पाएंगे।
विभाग ने साफ किया है कि जो प्रिंसिपल ग्रांटों का हिसाब नहीं देंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ये आदेश डीजीएसई की तरफ से जारी किए गए हैं। जिक्र योग है कि जिले में 400 के करीब सरकारी स्कूल हैं। जिन्हें इस समय अवधि में ग्रांटों के खर्च का हिसाब देना होगा।
ग्रांटों का नहीं हो रहा सही काम में प्रयोग
शिक्षा विभाग की जांच में सामने आया है कि कई स्कूलों में जारी हुई ग्रांटों का सही प्रयोग नहीं हो रहा है। जिस काम के लिए ग्रांट भेजी जा रही है, उसे उन कामों में प्रयोग ही नहीं किया जा रहा है। विभाग ने स्कूलों को साफ किया है कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर भविष्य में किसी स्कूल में ग्रांटों का दुरुपयोग होता है तो दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।