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Punjab: पंजाब में सरकारी स्कूल से एनओसी का प्रावधान रद्द, पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में गलती मानी
Wed, 09 Apr 2025 09:46 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 09 Apr 2025 09:46 PM IST
सार
सरकार ने उस नियम को हटा दिया है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों में सीट भरने के बाद ही उनकी एनओसी के साथ निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश किया जा सकता था। पंजाब सरकार की ओर से गलती मानने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है।
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भगवंत मान
- फोटो : फाइल
विस्तार
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत पंजाब के निजी स्कूलों में पढ़ने के लिए अब अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की जरूरत नहीं होगी। आर्थिक पिछड़ा वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पंजाब सरकार ने नियमों में बदलाव किया है।
सरकार ने उस नियम को हटा दिया है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों में सीट भरने के बाद ही उनकी एनओसी के साथ निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश किया जा सकता था। पंजाब सरकार की ओर से गलती मानने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है।
जनहित याचिका दाखिल करते हुए केएस राजू लीगल ट्रस्ट ने हाईकोर्ट को बताया कि बच्चों को शिक्षा का मुफ्त व अनिवार्य अधिकार के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें रखने का प्रावधान है।
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प्राप्त आंकड़ों और विधानसभा में सौंपी गई जानकारी के अनुसार पूरे पंजाब में एक भी विद्यार्थी को इस कोटे का लाभ नहीं मिला है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि नियम के अनुसार इस कोटे का लाभ तभी लिया जा सकता है, जब सरकारी स्कूल में सीटें न बची हों।
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सरकार ने उस नियम को हटा दिया है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों में सीट भरने के बाद ही उनकी एनओसी के साथ निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश किया जा सकता था। पंजाब सरकार की ओर से गलती मानने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है।
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जनहित याचिका दाखिल करते हुए केएस राजू लीगल ट्रस्ट ने हाईकोर्ट को बताया कि बच्चों को शिक्षा का मुफ्त व अनिवार्य अधिकार के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें रखने का प्रावधान है।
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प्राप्त आंकड़ों और विधानसभा में सौंपी गई जानकारी के अनुसार पूरे पंजाब में एक भी विद्यार्थी को इस कोटे का लाभ नहीं मिला है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि नियम के अनुसार इस कोटे का लाभ तभी लिया जा सकता है, जब सरकारी स्कूल में सीटें न बची हों।