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हरियाणा सरकार के विरोध में 18 हजार से अधिक निजी स्कूल रहे बंद

Mon, 09 May 2016 10:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक।
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक। Updated Mon, 09 May 2016 10:38 AM IST
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नियम 134 ए के विरोध में सरकार के खिलाफ उतरे स्कूल संचालक मांगे पूरी होने तक बैकफुट पर आने के मूड में नहीं है। निजी स्कूल संचालकों की चारों यूनियनों से जुड़े 18 हजार से अधिक स्कूल शनिवार को बंद रहे। सरकार और स्कूल संचालकों की लड़ाई में लाखों बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है। फिलहाल सरकार ने स्कूल संचालकों की यूनियन से बातचीत के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं, ऐसे में हड़ताल लंबी चलेगी और इसका खमियाजा बच्चों और उनके अभिभावकों को भुगतना पड़ेगा।
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नियम 134 ए को खत्म कर आरटीई लागू करने की मांग सहित पिछले तीन साल की पुनर्भरण राशि की मांग कर रहे स्कूल संचालकों ने सिरसा, झज्जर और भिवानी को छोड़कर सभी जिलों में 90 फीसदी स्कूलों को ताला लगा दिया। प्राइवेट स्कूल संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू का दावा है कि प्रदेश के 21 हजार स्कूलों में से 18 हजार से अधिक बंद रहे। 
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फैडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वैलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा, प्राइवेट स्कूल संघ के अध्यक्ष सत्यवान कुंडू, हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ के अध्यक्ष बिजेंद्र मान और हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस के अध्यक्ष कर्नल प्रताप सिंह ने शुक्रवार को जींद में बैठकर बेमियादी हड़ताल का एलान किया था।
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इसके चलते शनिवार को निजी स्कूल संचालक स्कूलों के ताले लगाकर सड़क  पर उतर गए। कई जिलों में सुबह स्कूल खुले लेकिन बाद में इन्हें बंद करवाकर छुट्टी कर दी गई।  स्कूल संचालकों का कहना है कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को प्रति बच्चा 700 रुपए पढ़ाई खर्च के लिए भुगतान करती है लेकिन निजी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीबों के बच्चों के लिए फीस देने को तैयार नहीं हैं। 

सिरसा और झज्जर और भिवानी में कल से बंद

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हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के बैनर तले प्रदेश भर में छह मई से  प्राइवेट स्कूलों के संचालकों ने हड़ताल शुरू कर दी थी। धीरे-धीरे सभी यूनियन एक मंच पर आ गई। सोमवार से झज्जर, भिवानी और सिरसा में स्कूल बंद रहेंगे। 

आरटीई के तहत प्रवेश को राजी
प्राइवेट स्कूल संचालकों ने कहा है कि सरकार 134 ए नियम के तहत उनके साथ गलत कर रही है। हमें गरीब बच्चों को पढ़ाने में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन एडमिशन 134ए के तहत नहीं, बल्कि आरटीई योजना के तहत हो। लिहाजा सरकार प्रदेश भर से 134ए नियम को तुरंत प्रभाव से कैंसिल करें।

राज्यपाल से मिलने का फैसला
स्कूल संचालकों ने साफ कहा है कि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना, तो हड़ताल लंबी चलेगी। इसकी जिम्मेवारी मौजूदा सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि वे अपनी बात राज्यपाल तक पहुंचाएंगे। इससे पहले 10 मई को करनाल में धरना देंगे। 14 मई को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का अंबाला में और जनस्वास्थ्य मंत्री घनश्याम सर्राफ का भिवानी में घेराव किया जाएगा। इसके बाद 15 मई को शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा और वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु का घेराव होगा।

जब तक मांगें पूरी नहीं होती, जारी रहेगा आंदोलन:कुंडू
हिसार। प्राइवेट स्कूल संघ हरियाणा के तत्वावधान में प्रदेश के हजारों स्कूल संचालक दस मई को करनाल में धरना देते हुए सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजाएंगे। प्राइवेट स्कूल संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा है कि प्राइवेट स्कूलों के हड़ताल पर जाने से बच्चों की पढ़ाई का जो नुकसान हो रहा है, उसके लिए सरकार जिम्मेदार है। क्योंकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार गरीब
बच्चों के लिए पैसा देने के लिए तैयार नहीं है। 

कुंडू ने कहा कि प्रदेश सरकार एक बच्चे पर सरकारी स्कूलों में लगभग 28 हजार रुपये सालाना खर्च कर रही है और प्राइवेट स्कूलों में लगभग नर्सरी से 12वीं तक 50 लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्राइवेट स्कूल बंद हो जाएं तो सरकार का दिवालिया निकल जाएगा।

हाईकोर्ट ने कहा: निजी स्कूल दाखिला देने के लिए बाध्य
हरियाणा एंड पंजाब हाईकोर्ट ने नियम 134ए मामले में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि कोई भी गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल हो, वह नियम 134ए के तहत दाखिला देने के लिए बाध्य है। दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन के संयोजक एडवोकेट सत्यवीर सिंह हुड्डा ने बताया कि निजी स्कूल इस आधार पर दाखिला देने से मना नहीं कर सकते हैं कि उन्हें प्रदेश सरकार की ओर से बच्चों का दाखिला खर्च (रिइंबर्समेंट) नहीं मिला है। अगर सरकार के पास बच्चों के दाखिला खर्च से संबंधित कोई राशि बकाया भी है तो वह केस दायर कर सकता है।
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