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बड़ा झटकाः अब गांव वालों को भी भरना पड़ेगा ये टैक्स, चंडीगढ़ प्रशासन ने जारी किए आदेश

Fri, 21 Sep 2018 11:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 21 Sep 2018 11:29 PM IST
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Property tax levied on five villages in chandigarh
income tax - फोटो : फाइल फोटो

चंडीगढ़ प्रशासन ने अब पांच गांवों पर प्रापर्टी टैक्स लगा दिया है। प्रशासन ने नगर निगम के फैसले के खिलाफ पलसौरा, हल्लोमाजरा, मलोया, कजेहड़ी और डड्डूमाजरा की कामर्शियल इमारतों पर प्रापर्टी टैक्स लगा दिया है। प्रशासन ने 20 सितंबर को अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, अधिसूचना पर आपत्तियां और सुझाव दर्ज करवाने के लिए प्रशासन के स्थानीय निकाय सचिव ने 10 दिनों का समय दिया है। प्रशासन ने नगर निगम को अगस्त माह में इन गांवों पर टैक्स लगाने का फैसला लेने का अंतिम नोटिस भेजा था, लेकिन सदन ने यह प्रस्ताव स्थगित कर दिया था। 

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उस समय पार्षदों ने कहा था कि पहले इन गांवों को शहर के बराबर लाया जाए। गांवों की जमीन पर ही शहर बने हैं। शहर में पार्क बने हैं, लेकिन गांवों में पार्क नहीं बने हैं। गांवों के मार्केट में कोई टायलेट्स नहीं हैं ऐसे में गांवों में टैक्स नहीं लगना चाहिए, लेकिन प्रशासन ने नगर निगम के इन सुझावों को मानने से साफ इनकार करते हुए इन गांवों पर टैक्स लगाने की अधिसूचना जारी कर दी है। मालूम हो कि इससे पहले भी नगर निगम चार बार प्रशासन के टैक्स लगाने के नोटिस को खारिज कर चुका है। 
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प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार एक्ट के मुताबिक नगर निगम के अधीन आने वाले एरिया में टैक्स लगाना जरूरी है। बता दें कि शहर में साल 2015 में भी हाउस टैक्स प्रशासन ने ही थोपा था, जब नगर निगम यह टैक्स लगाने के लिए तैयार नहीं था। प्रशासन के पास यह अधिकार है कि अगर नगर निगम कोई शहर के हित में फैसला नहीं लेता है तो प्रशासन इसके लिए आदेश जारी कर सकता है।
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ये वे गांव हैं, जो साल 2006 में प्रशासन से नगर निगम में शामिल हुए थे, लेकिन अभी तक नगर निगम की ओर से इन गांवों की कामर्शियल इमारतों और दुकानों में प्रापर्टी टैक्स नहीं लगाया था। अगस्त माह में प्रशासन की ओर से जो नगर निगम को पत्र भेजा गया था, उसमें कहा गया था कि नगर निगम अपनी जिम्मेवारी नहीं निभा रहा है, इसलिए म्युनिसिपल एक्ट के सेक्शन 405(ए) के तहत निर्देश दिए जाते हैं कि वह इन पर प्रापर्टी टैक्स लगाए, लेकिन नगर निगम ने टैक्स लगाने से इनकार कर दिया। 

जिन 5 गांवों में प्रापर्टी टैक्स लगाने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें पलसौरा, हल्लोमाजरा, मलोया, कजेहड़ी और डडूमाजरा शामिल हैं, जहां पर चार हजार से ज्यादा कॉमर्शियल एरिया और दुकानें हैं। शहर में प्रापर्टी टैक्स साल 2003 से लागू है, लेकिन यह गांव साल 2006 में नगर निगम में शामिल हुए।


भाजपा कर रही है खिलवाड़
कांग्रेस पार्षद दल के नेता देवेंद्र सिंह बबला का कहना है कि भाजपा गांव वालों को गुमराह कर रही है। पहले ही शहर में कई नए तरह के टैक्स लगा दिए गए हैं और अब भाजपा ने राजनीति कर खुद टैक्स लगाने की बजाय प्रशासन से अधिसूचना जारी करवा दी। लेकिन कांग्रेस पार्टी अगली सदन की बैठक में इस अधिसूचना का विरोध करेगी। पहले गांव वालों को शहर के बराबर सुविधाएं मिलनी चाहिएं, उसके बाद टैक्स लगाना चाहिए। गांवों को सेक्टर की तरह बनाना चाहिए।

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