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बेअंत सिंह के पोते के लिए पंजाब सरकार ने अपनी पालिसी को ही किया दरकिनार

Wed, 27 Sep 2017 11:03 PM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 27 Sep 2017 11:03 PM IST
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Private university policy-2010, punjab government
गुरइकबाल ने तमिलनाडु की पेरियार यूनिवर्सिटी से दो साल में की ग्रेजुएशन
पंजाब सरकार ने आतंकवाद पीड़ित परिवार के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते गुरइकबाल सिंह को राज्य पुलिस में डीएसपी लगाने के लिए अपने ही नियमों को दरकिनार कर दिया। गौरतलब है कि बाहरी शिक्षण संस्थान के संबंध में पंजाब प्राइवेट यूनिवर्सिटी पालिसी-2010 का हवाला देकर ही वर्ष 2016 में क्लर्क पद पर सूबे के 192 नौजवानों की भर्ती रद्द कर दी गई थी। 
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आरटीआई के तहत हुए इस खुलासे के बाद अब इस मामले को अदालत में ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है। अगले दो दिन में इस संबंध में एक जनहित याचिका दायर की जा सकती है। हालांकि जिन 192 नौजवानों को क्लर्क की नौकरी के वंचित किया गया था, उनकी याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई पहले से जारी है। 
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आरटीआई के तहत मिली सूचना के अनुसार, गुरइकबाल सिंह ने तमिलनाडु की पेरियार यूनिवर्सिटी से दो वर्षीय ग्रेजुएशन की। इसके लिए उन्होंने यूनिवर्सिटी के दिल्ली सेंटर में परीक्षा दी। आरटीआई के तहत सूचना पाने वाले युवक ने पर्सोनल विभाग के सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि इस तरह गुरइकबाल की डिग्री पंजाब प्राइवेट यूनिवर्सिटी पालिसी 2010 के तहत नौकरी के लिए मान्य नहीं है। ऐसे में क्लर्क पद पर भर्ती होने वाले नौजवानों से भेदभाव किया गया है। इस संबंध में अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड पंजाब के सचिव कमल गर्ग ने कहा कि पूरे दस्तावेज देखने के बाद हर केस के हिसाब से फैसला लिया जाएगा।
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इस नियमों का दिया हवाला

Private university policy-2010, punjab government
गुरइकबाल ने तमिलनाडु की पेरियार यूनिवर्सिटी से दो साल में की ग्रेजुएशन
इस नियमों का दिया हवाला
14 जुलाई 2016 को पर्सोनल विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड पंजाब द्वारा बाहरी यूनिवर्सिटियों से डिग्री प्राप्त करने वाले 192 नौजवानों को पदों पर नियुक्ति नहीं देने का फैसला लिया गया था। लेकिन इसमें राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एक पालिसी का हवाला देते हुए अड़ंगा लगा दिया। पर्सोनल विभाग की बैठक में उच्चतर शिक्षा विभाग के विशेष सचिव ने बताया कि विभाग द्वारा जारी पंजाब प्राइवेट यूनिवर्सिटी पालिसी 2010 के अनुसार, प्राइवेट यूनिवर्सिटी का एक सिंगल कैंपस ही हो सकता है। वह अपने मुख्य कैंपस के अलावा बाहर के किसी कालेज/संस्था को एफिलेटिड नहीं कर सकती। यूनिवर्सिटी डिस्टेंस एजुकेशन के मामले में भी कोई स्टडी सेंटर शुरू नहीं कर सकती। ऐसे मामलों में पाई गई डिग्री यूजीसी के मानदंडों के अनुसार नहीं है। 

2008 में की मैट्रिक और 2007-08 में पायलट का कोर्स :
पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते गुरइकबाल सिंह ने डीएसपी पद पर भर्ती के लिए डीजीपी को भेजे पत्र के साथ अपना बायोडाटा अटैच किया है। उसके अनुसार गुरइकबाल ने मई, 2008 में सीबीएसई से मैट्रिक पास की। लेकिन उससे पहले 2007-08 में उन्होंने कमर्शियल पायलट (एफएए) (यूएसए) की ट्रेनिंग पूरी कर ली थी। 2009 में उन्होंने डीजीसीए इंडिया के अधीन रेगुलेशन एग्जाम पास किया और 2010 में कम्पोजिट एग्जाम (नेविगेशन व मेट्रोलाजी) क्लीयर कर लिया। वर्ष 2011-12 में उन्होंने बैचलर आफ कामर्स की डिग्री सेकंड क्लास में पास की।
 
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