{"_id":"5b4b1ee54f1c1b6f548b4822","slug":"president-ramnath-kovind-visit-kabir-mahakumbh-in-fatehabad-addressed-to-the-public-rally","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कबीर पंथ है निरपेक्षता का मार्ग, संविधान भी है वचनबद्ध : राष्ट्रपति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कबीर पंथ है निरपेक्षता का मार्ग, संविधान भी है वचनबद्ध : राष्ट्रपति
अमित रूखाया, अमर उजाला, फतेहाबाद (हरियाणा)
Updated Sun, 15 Jul 2018 04:26 PM IST
विज्ञापन
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहाबाद में आयोजित संत शिरोमणि कबीर महाकुंभ में रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। मंच में हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी और हरियाणा सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व करने के लिए परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार भी मौजूद रहे। जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि संत कबीरदास किसी एक समाज के नहीं बल्कि सर्वसमाज के पथ प्रदर्शक थे, उनकी वाणी में एक ऐसे समाज की रचना की जिसमें ऊंच-नीच, जात-पात व अन्य किसी भी प्रकार के भेदभाव की कोई जगह नहीं हैं।
संत कबीर ने किसी को भी पंथ, जाति, भाषा इत्यादि में नहीं बांधा। उनकी वाणी में समरसता, सरलता के साथ-साथ सामाजिक न्याय का भाव देखने को मिलता है। उन्हीं की वाणी के अनुरूप भारत देश के संविधान को तैयार किया गया है, जिसमें कार्यपालिका और विधायिका सक्रिय रहती है। उन्होंने कहा कि कबीर पंथ निरपेक्षता का मार्ग है और संविधान भी इसके लिए वचनबद्ध है।
वे रविवार को हरियाणा के जिला फतेहाबाद में संत शिरोमणि कबीर दास के प्रकोटोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित कबीर महाकुंभ को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व भोडिया खेड़ा स्थित खेल स्टेडियम में बनाए गए हैलीपेड पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, प्रदेश के परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर, उपायुक्त डॉ हरदीप सिंह ने पुष्प भेंटकर राष्ट्रपति का स्वागत किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
संत कबीर ने किसी को भी पंथ, जाति, भाषा इत्यादि में नहीं बांधा। उनकी वाणी में समरसता, सरलता के साथ-साथ सामाजिक न्याय का भाव देखने को मिलता है। उन्हीं की वाणी के अनुरूप भारत देश के संविधान को तैयार किया गया है, जिसमें कार्यपालिका और विधायिका सक्रिय रहती है। उन्होंने कहा कि कबीर पंथ निरपेक्षता का मार्ग है और संविधान भी इसके लिए वचनबद्ध है।
विज्ञापन
वे रविवार को हरियाणा के जिला फतेहाबाद में संत शिरोमणि कबीर दास के प्रकोटोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित कबीर महाकुंभ को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व भोडिया खेड़ा स्थित खेल स्टेडियम में बनाए गए हैलीपेड पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, प्रदेश के परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर, उपायुक्त डॉ हरदीप सिंह ने पुष्प भेंटकर राष्ट्रपति का स्वागत किया।
विज्ञापन
पानीपत से हुई बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान की शुरुआत
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
फतेहाबाद की नई अनाज मंडी में आयोजित इस कार्यक्रम में दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से जनसमूह पहुंचा। राष्ट्रपति ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आज का कार्यक्रम तब आयोजित किया जा रहा है, जब पूरे देश में मानसून सक्रिय हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज का दिन इसलिए भी ऐतिहासिक और गौरवशाली दिन है, क्योंकि इसी दिन जिला फतेहाबाद की स्थापना भी हुई थी।
फतेहाबाद के स्थापना के 22 वर्ष पूरे होने पर जिलावासियों को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि एक प्रगतिशील जिला की वर्षगांठ पर आयोजित कबीर महाकुंभ में पहुंचने पर उन्हें हर्ष की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि देश की लोकसभा के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की विधान सभाओं में आने वाले मानसून सत्रों में संविधान के मूलमंत्र को ध्यान में रखते हुए चर्चा, परिचर्चा और संवाद के माध्यम से जनता के हितों को सर्वोपरि रखकर निर्णय लिये जाएंगे।
राष्ट्रपति ने हरियाणा सरकार द्वारा लोगों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं व नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने संत शिरोमणि कबीर की जयंती को प्रत्येक जिला स्तर पर मनाने का प्रशंसनीय निर्णय लिया है। सरकार द्वारा दूसरे महापुरुषों की जयंतियां भी सरकारी स्तर पर मनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत की धरती से बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान की शुरुआत की गई।
फतेहाबाद के स्थापना के 22 वर्ष पूरे होने पर जिलावासियों को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि एक प्रगतिशील जिला की वर्षगांठ पर आयोजित कबीर महाकुंभ में पहुंचने पर उन्हें हर्ष की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि देश की लोकसभा के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की विधान सभाओं में आने वाले मानसून सत्रों में संविधान के मूलमंत्र को ध्यान में रखते हुए चर्चा, परिचर्चा और संवाद के माध्यम से जनता के हितों को सर्वोपरि रखकर निर्णय लिये जाएंगे।
राष्ट्रपति ने हरियाणा सरकार द्वारा लोगों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं व नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने संत शिरोमणि कबीर की जयंती को प्रत्येक जिला स्तर पर मनाने का प्रशंसनीय निर्णय लिया है। सरकार द्वारा दूसरे महापुरुषों की जयंतियां भी सरकारी स्तर पर मनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत की धरती से बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान की शुरुआत की गई।
हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार हुआ
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
इस अभियान से पहले बेटियों की संख्या 1000 लड़कों के प्रति काफी कम थी, लेकिन राज्य सरकार के प्रयासों और लोगों के सहयोग से लिंगानुपात में सुधार हुआ है। इसके लिए हरियाणा सरकार बधाई की पात्र है। उन्होंने हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यपाल समाज के उन वर्गों के प्रति बहुत संवेदनशील हैं जो दिव्यांग या किसी बीमारी से पीडि़त हैं। आपदा पीडि़तों के लिए भी राज्यपाल सदैव सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का भी अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि संत कबीर के अलावा महात्मा गांधी, डा. भीमराव अंबेडकर, दीन दयाल उपाध्याय के साथ-साथ अन्य महापुरुषों ने देश में समरसता, सरलता और ऊंच-नीच व भेदभाव को दूर करने में चेतना जगाने का काम किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आप सभी को पता है कि कबीर के परिवारजन बुनकर का काम करते थे और अपने जीवनयापन के लिए संत कबीर ने भी यह काम किया। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने उस समय समाज के ताने-बाने को एक रास्ता देने के लिए गरीब, उपेक्षित और पीडि़त, जो उस समय अपनी पीड़ा का उल्लेख नहीं कर सकते थे, को एक रास्ता दिखाया और लोग संत कबीर की वाणी सुनने लगे तथा उनके अनुयायी बनने लगे।
उन्होंने कहा कि संत कबीर की सरलता बहुत ही दुलर्भ है और यह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा था कि जो सच्चा है उसके दिल में ईश्वर रहता है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज की यह विडंबना है कि हमें कुल, जाति, क्षेत्र से जाना जाता है जबकि असल में मानव को गुणों और अवगुणों से पहचाना जाना चाहिए, जिसके गुण श्रेष्ठ हैं वह महान हो जाता है। उन्होंने कहा कि संत कबीर इतने महान थे कि गुरु नानक देव जी भी अपने प्रवचनों में उनकी वाणी का उल्लेख करते हैं। इसी प्रकार पश्चिम के कई संतों ने भी संत कबीर का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि संत कबीर की शिक्षा जितनी उनके समय में मान्य थी, उतनी ही आज भी प्रासंगिक है और भविष्य में भी रहेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि संत कबीर के अलावा महात्मा गांधी, डा. भीमराव अंबेडकर, दीन दयाल उपाध्याय के साथ-साथ अन्य महापुरुषों ने देश में समरसता, सरलता और ऊंच-नीच व भेदभाव को दूर करने में चेतना जगाने का काम किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आप सभी को पता है कि कबीर के परिवारजन बुनकर का काम करते थे और अपने जीवनयापन के लिए संत कबीर ने भी यह काम किया। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने उस समय समाज के ताने-बाने को एक रास्ता देने के लिए गरीब, उपेक्षित और पीडि़त, जो उस समय अपनी पीड़ा का उल्लेख नहीं कर सकते थे, को एक रास्ता दिखाया और लोग संत कबीर की वाणी सुनने लगे तथा उनके अनुयायी बनने लगे।
उन्होंने कहा कि संत कबीर की सरलता बहुत ही दुलर्भ है और यह आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा था कि जो सच्चा है उसके दिल में ईश्वर रहता है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज की यह विडंबना है कि हमें कुल, जाति, क्षेत्र से जाना जाता है जबकि असल में मानव को गुणों और अवगुणों से पहचाना जाना चाहिए, जिसके गुण श्रेष्ठ हैं वह महान हो जाता है। उन्होंने कहा कि संत कबीर इतने महान थे कि गुरु नानक देव जी भी अपने प्रवचनों में उनकी वाणी का उल्लेख करते हैं। इसी प्रकार पश्चिम के कई संतों ने भी संत कबीर का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि संत कबीर की शिक्षा जितनी उनके समय में मान्य थी, उतनी ही आज भी प्रासंगिक है और भविष्य में भी रहेगी।
कार्यक्रम के लिए फतेहाबाद चुनने के लिए बधाई
मंच में मौजूद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
राष्ट्रपति ने आए हुए संत कबीर के प्रेमियों व अनुयायियों को इस कार्यक्रम के लिए फतेहाबाद चुनने के लिए बधाई दी और कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजक मध्यप्रदेश के पूर्व सांसद नारायण सिंह केसरी ने कहा था कि आपको फतेहाबाद चलना है। जब उन्होंने उनसे पूछा कि हरियाणा में क्यों, मध्यप्रदेश में क्यों नहीं। इस पर नारायण सिंह केसरी ने कहा कि वे संत कबीर का संदेश और वाणी पूरे देश में पहुंचाना चाहते हैं और उन्हें आज इस समृद्धशाली और मेहनती लोगों के क्षेत्र में आकर खुशी हो रही है। उन्होंने इस कार्यक्रम को कबीर प्रेमियों का महाकुंभ और मिनी इंडिया भी बताया।
इससे पहले हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि आज देश के राष्ट्रपति फतेहाबाद जिला में पहली बार आए हैं और राज्यपाल होने के नाते वे उनसे निवेदन करते हैं कि उनकी यह कृपा दृष्टि हरियाणा पर सदैव बनी रही। उन्होंने महिलाओं की उपस्थिति को देख कर कहा कि आज महिलाओं की उपस्थिति अच्छी है और यह चमत्कारी है, जिस समाज में महिलाएं आगे आती है वह समाज और देश प्रगति और उत्थान के रास्ते पर आगे बढ़ता है। उन्होंने संत कबीर के संबंध में कहा कि वे हर सामान्यजन के अंदर बैठे हैं जो उनसे प्रभावित है और उनके दोहे आज भी प्रासंगिक हैं जिनका हमारे जीवन में प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में आने के लिए इतने उत्साहित थे किवे 30 मिनट पहले ही यहां आ गए लेकिन, उन्होंने यहां आने के बाद कहा कि 11 बजे का समय है तो वे मंच पर 11 बजे ही जाएंगे। राज्यपाल ने कहा कि भारत और संतों का संबंध अटूट है। बिना संतों के देश का मार्गदर्शन नहीं हो सकता और यही कारण है कि एक हजार साल के बाद भी हमारी संस्कृति, सभ्यता, पद्धति और पहचान आज 21वीं सदी में भी वैसे ही खड़ी है जैसी पहले थी, जबकि इस दौरान हमारे देश पर कई आक्रमण कर कई लोगों ने हमारे देश के इस ताने-बाने को तोडऩे की चेष्ठा की है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज हमारे देश के योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर मनाया जाने लगा है।
इससे पहले हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि आज देश के राष्ट्रपति फतेहाबाद जिला में पहली बार आए हैं और राज्यपाल होने के नाते वे उनसे निवेदन करते हैं कि उनकी यह कृपा दृष्टि हरियाणा पर सदैव बनी रही। उन्होंने महिलाओं की उपस्थिति को देख कर कहा कि आज महिलाओं की उपस्थिति अच्छी है और यह चमत्कारी है, जिस समाज में महिलाएं आगे आती है वह समाज और देश प्रगति और उत्थान के रास्ते पर आगे बढ़ता है। उन्होंने संत कबीर के संबंध में कहा कि वे हर सामान्यजन के अंदर बैठे हैं जो उनसे प्रभावित है और उनके दोहे आज भी प्रासंगिक हैं जिनका हमारे जीवन में प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में आने के लिए इतने उत्साहित थे किवे 30 मिनट पहले ही यहां आ गए लेकिन, उन्होंने यहां आने के बाद कहा कि 11 बजे का समय है तो वे मंच पर 11 बजे ही जाएंगे। राज्यपाल ने कहा कि भारत और संतों का संबंध अटूट है। बिना संतों के देश का मार्गदर्शन नहीं हो सकता और यही कारण है कि एक हजार साल के बाद भी हमारी संस्कृति, सभ्यता, पद्धति और पहचान आज 21वीं सदी में भी वैसे ही खड़ी है जैसी पहले थी, जबकि इस दौरान हमारे देश पर कई आक्रमण कर कई लोगों ने हमारे देश के इस ताने-बाने को तोडऩे की चेष्ठा की है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज हमारे देश के योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर मनाया जाने लगा है।
राज्यपाल ने एक भारत-श्रेष्ठ भारत की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे देश में विविधता में एकता है और यही भारत की विशेषता है। उन्होंने कहा संतों में कबीर का नाम सबसे पहले आता है जो एक समाज के नहीं थे, बल्कि समाज से ऊपर थे, जिन्होंने 620 साल पहले ही समरसता, सरलता, मानवता, प्रेम के साथ-साथ एक भारत-श्रेष्ठ भारत का संदेश दिया था। इसी प्रकार हरियाणा में भी हरियाणा एक-हरियाणवी एक को हम चरितार्थ करना चाहते हैं तो हम सबको एक साथ आगे बढऩा होगा, जिससे अन्य राज्यों के साथ-साथ अन्य देशों को भी एक प्रेरणा का संदेश मिलेगा।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ा और कार्यक्रम के आयोजकों व देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों को सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी। परिवहन मंत्री ने मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ते हुए कहा कि संत कबीर का आगमन या जन्म ऐसे समय में हुआ, जब हमारा समाज, रुढि़वादिता और अज्ञानता से ग्रसित था और ऐसे समय में संत कबीर अवतार की तरह लोगों के बीच पहुंचे और उन्होंने लोगों को व्यावहारिक जीवन शैली जीना सिखाया। इसके अलावा उन्होंने लोगों को सामाजिक समरसता का भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार लोंगों के कल्याण पर बल दे रही है और इसी कड़ी में संतों, महापुरुषों के साथ-साथ गुरुओं की जयंतियों को मनाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।
इस मौके पर पलवल जिला परिषद की अध्यक्ष चमेली देवी और कार्यक्रम के आयोजक तथा पूर्व सांसद मध्यप्रदेश दादा नारायण सिंह केसरी ने भी आये हुए लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक जय भगवान कायत व अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यातिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, कार्यक्रम के आयोजक दादा नारायाण सिंह केसरी को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संजय जैन व नोरंग गुप्ता द्वारा तैयार किया गया मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव का बैनर का अनावरण तथा डॉ जय नारायण द्वारा लिखित पुस्तक का भी विमोचन राष्ट्रपति व राज्यपाल द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में मंच का संचालन चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति विजय कायत ने किया। इस मौके पर सहकारिता राज्य मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, सांसद राजकुमार सैनी, अनुसूचित जाति वित एवं विकास निगम की चेयरपर्सन सुनीता दुग्गल, कमलेश कनेरिया, राजेंद्र कुमार धानक, जय भगवान कायत, धमेंद्र खटक, प्रहलाद सिंह सोलंकी, वेद फुलां, इंद्र कुमार निनानियां, बीआर पाटिल, चक्की लाल मास्टर, लक्ष्मण इंदौरिया, डॉ भुक्कल, मुकेश कुमार, जय नारायण खुंडिया, मुकेश सोलंकी, विनोद खनगवाल, जगदीश, भूपेंद्र केसरी, सुधीर, कमलेश, उपायुक्त हरदीप सिंह, पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ा और कार्यक्रम के आयोजकों व देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों को सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी। परिवहन मंत्री ने मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ते हुए कहा कि संत कबीर का आगमन या जन्म ऐसे समय में हुआ, जब हमारा समाज, रुढि़वादिता और अज्ञानता से ग्रसित था और ऐसे समय में संत कबीर अवतार की तरह लोगों के बीच पहुंचे और उन्होंने लोगों को व्यावहारिक जीवन शैली जीना सिखाया। इसके अलावा उन्होंने लोगों को सामाजिक समरसता का भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार लोंगों के कल्याण पर बल दे रही है और इसी कड़ी में संतों, महापुरुषों के साथ-साथ गुरुओं की जयंतियों को मनाने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।
इस मौके पर पलवल जिला परिषद की अध्यक्ष चमेली देवी और कार्यक्रम के आयोजक तथा पूर्व सांसद मध्यप्रदेश दादा नारायण सिंह केसरी ने भी आये हुए लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक जय भगवान कायत व अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यातिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, कार्यक्रम के आयोजक दादा नारायाण सिंह केसरी को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संजय जैन व नोरंग गुप्ता द्वारा तैयार किया गया मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव का बैनर का अनावरण तथा डॉ जय नारायण द्वारा लिखित पुस्तक का भी विमोचन राष्ट्रपति व राज्यपाल द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में मंच का संचालन चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति विजय कायत ने किया। इस मौके पर सहकारिता राज्य मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, सांसद राजकुमार सैनी, अनुसूचित जाति वित एवं विकास निगम की चेयरपर्सन सुनीता दुग्गल, कमलेश कनेरिया, राजेंद्र कुमार धानक, जय भगवान कायत, धमेंद्र खटक, प्रहलाद सिंह सोलंकी, वेद फुलां, इंद्र कुमार निनानियां, बीआर पाटिल, चक्की लाल मास्टर, लक्ष्मण इंदौरिया, डॉ भुक्कल, मुकेश कुमार, जय नारायण खुंडिया, मुकेश सोलंकी, विनोद खनगवाल, जगदीश, भूपेंद्र केसरी, सुधीर, कमलेश, उपायुक्त हरदीप सिंह, पुलिस अधीक्षक दीपक सहारण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।