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Chandigarh News: भारी घाटे के बाद नई आबकारी नीति की तैयारी, मांगे सुझाव
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चंडीगढ़। वर्तमान वर्ष में भारी घाटे के बाद यूटी प्रशासन ने वर्ष 2024-25 की आबकारी नीति को तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने नीति के लिए सभी शराब ठेकेदारों व अन्य से 30 नवंबर शाम पांच बजे तक सुझाव मांगे हैं।
लोग ईमेल आईडी epolicychd2024.25@ gmail.com पर सुझाव भेज सकते हैं या सेक्टर-17 स्थित आबकारी व कराधान विभाग के दफ्तर के पहले फ्लोर पर भी सुझाव की कॉपी जमा करवा सकते हैं। प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि इन सभी सुझावों पर विचार-विमर्श करने के बाद ही वह सभी हितधारकों के साथ एक बैठक करेंगे और सुझावों को नीति में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
आबकारी विभाग जनवरी माह में नीति को तय करने की प्रक्रिया शुरू करता है और लोगों से सुझाव मांगता है लेकिन इस वर्ष चुनाव के चलते चुनावी आचार संहिता भी लग जाएगी, जिसके चलते उससे पहले ही विभाग नीति को तय कर लेना करना चाहता है।
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इस वर्ष 95 में से सिर्फ 77 ठेके ही बिके
विभाग इस वर्ष कुल 95 ठेकों में से 77 ठेकों की नीलामी करने में सफल रहा है। 18 ठेकों के लिए उसे बोलीदाता नहीं मिले। पूरा साल विभाग ने इन ठेकों को अलॉट करने का प्रयास कर रहा। यहां तक कि आरक्षित मूल्य भी 50 प्रतिशत से अधिक घटा दिया गया लेकिन विभाग को खरीदार नहीं मिले। इसके चलते ही विभाग को मौजूदा ठेकेदारों को बचा कोटा अलॉट करने का फैसला लेना पड़ा। विभाग ने 15 मार्च को पहली नीलामी की थी, जिसमें 43 ठेके नीलाम हुए थे जबकि 21 मार्च को दूसरी नीलामी में विभाग 11 ठेकों को नीलाम करने में सफल रहा था। विभाग ने नीलामी में असफल होने के लिए इस बार पंजाब की आबकारी नीति को जिम्मेदार ठहराया है।
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आबकारी विभाग जनवरी माह में नीति को तय करने की प्रक्रिया शुरू करता है और लोगों से सुझाव मांगता है लेकिन इस वर्ष चुनाव के चलते चुनावी आचार संहिता भी लग जाएगी, जिसके चलते उससे पहले ही विभाग नीति को तय कर लेना करना चाहता है।
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इस वर्ष 95 में से सिर्फ 77 ठेके ही बिके
विभाग इस वर्ष कुल 95 ठेकों में से 77 ठेकों की नीलामी करने में सफल रहा है। 18 ठेकों के लिए उसे बोलीदाता नहीं मिले। पूरा साल विभाग ने इन ठेकों को अलॉट करने का प्रयास कर रहा। यहां तक कि आरक्षित मूल्य भी 50 प्रतिशत से अधिक घटा दिया गया लेकिन विभाग को खरीदार नहीं मिले। इसके चलते ही विभाग को मौजूदा ठेकेदारों को बचा कोटा अलॉट करने का फैसला लेना पड़ा। विभाग ने 15 मार्च को पहली नीलामी की थी, जिसमें 43 ठेके नीलाम हुए थे जबकि 21 मार्च को दूसरी नीलामी में विभाग 11 ठेकों को नीलाम करने में सफल रहा था। विभाग ने नीलामी में असफल होने के लिए इस बार पंजाब की आबकारी नीति को जिम्मेदार ठहराया है।