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Chandigarh News: गैर संचारी रोग से पीड़ित गर्भवतियों में हृदय रोग का खतरा ज्यादा

Sun, 10 Mar 2024 03:49 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 10 Mar 2024 03:49 AM IST
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Pregnant women suffering from non-communicable diseases have higher risk of heart disease
चंडीगढ़। गैर संचारी रोग (एनसीडी) से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में हृदय रोग का खतरा सबसे अधिक रहता है। अगर समय रहते इलाज नहीं किया गया तो मातृ मृत्यु का कारण बन सकता है। ऐसी गर्भवती महिलाओं में मातृ मृत्यु दर के कारणों में 50 प्रतिशत से भी ज्यादा हृदय रोग बड़े कारण के रूप में सामने आ रहा है। यह हकीकत पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में एनसीडी ग्रस्त गर्भवती महिलाओं पर किए गए शोध में सामने आई है। इस शोध को इंटरनेशनल जनरल ऑफ़ गायनोकोलॉजी एंड ऑब्स्टैट्रिक्स में प्रकाशित किया गया है। यह जानकारी पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की तरफ से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में शनिवार को विभाग की प्रमुख डॉ. वनिता जैन ने दी।उन्होंने बताया कि विभाग की डॉ. नेहा कुमारी, डॉ. एस कथिरवेल, डॉ. आशिमा अरोड़ा, डॉ. पूजा सिक्का के साथ मिलकर किए गए इस शोध में एक साल के दौरान पीजीआई में आई 1003 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया। उनमें से 894 महिलाएं एनसीडी ग्रस्त पाई गईं। उनमें से 309 महिलाओं में दीर्घकालीन उच्च रक्तचाप था, जबकि 169 महिलाएं हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रस्त थीं। वहीं 80 महिलाओं को रूमैटीक हृदय रोग था और 56 को जन्मजात हृदय संबंधी बीमारियां थीं। अध्ययन में इसकी पुष्टि हुई कि सभी मातृ मृत्यु में से आधे मामलों के लिए हृदय संबंधी बीमारियां जिम्मेदार हैं।
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100 में 3 मामले
प्रो. पूजा ने बताया कि पीजीआई की ओपीडी में आने वाली 100 में से लगभग तीन महिलाएं एनसीडी की किसी न किसी समस्या से पीड़ित हैं। इस समस्या को नियंत्रित करके मातृ मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हृदय रोग बढ़ने से कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे में उन महिलाओं को इससे बचाव के लिए दवाइयां देना काफी कठिन होता है क्योंकि उन दवाओं का दुष्प्रभाव बच्चे और मां दोनों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि डीप वेन थ्रांबोसिस से पीड़ित गर्भवती महिला को बेहद सावधान रहने की जरूरत होती है क्योंकि कई बार उसकी नसों में हुए खून के जमाव के कारण उसके हृदय में भी खून का जमाव होने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए उसे ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है क्योंकि पानी की कमी होने के कारण व गर्भावस्था के दौरान ज्यादा क्रियाशीलता न होने के कारण भी डीप वेन थ्रांबोसिस की परेशानी बढ़ने का खतरा रहता है।
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