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पंजाब विस चुनावः ‘ब्रांड कैप्टन’ स्थापित करने में जुटे प्रशांत किशोर
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 15 Apr 2016 01:05 PM IST
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प्रशांत किशोर का अभियान कॉफी विद कैप्टन
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब में चुनावी पारा चढ़ने लगा है। सत्ताधारी शिअद-भाजपा गठबंधन हो या आम आदमी पार्टी, सभी अपनी रणनीति बनाने में लगे हैं। वहीं इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी की टीम भी चुपचाप कांग्रेस को सत्ता के गलियारे तक पहुंचाने की कवायद में जुट चुकी है।
आई-पैक के प्रमुख और मास्टर पॉलिटिकल स्ट्रेटेजिस्ट प्रशांत किशोर अपनी चुनावी रणनीति के पहले चरण में ‘ब्रांड कैप्टन’ को स्थापित करने में लगे हुए हैं। इसकी शुरुआत ‘कॉफी विद कैप्टन’ से की गई है। हालांकि शुरुआत में इसकी आलोचना हुई कि पंजाब में कॉफी नहीं चल सकेगी। फिर भी आई-पैक ने खास रणनीति के तहत इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस कैंपेन का टारगेट सिर्फ स्टूडेंट वर्ग था। दूसरे वर्गों के लिए अलग कैंपेन की योजना है।
पीएम नरेंद्र मोदी की चाय पर चर्चा की तर्ज पर शुरू किए गए इस कैंपेन के लिए कहा जा रहा था कि अपने लोग बैठाकर अपनी मर्जी के मुताबिक सवाल करवाए जाएंगे। चाय पर चर्चा में सवाल पहले से आते थे और जवाब भी पहले से तैयार होते थे, लेकिन कॉफी विद कैप्टन में स्टूडेंट्स ने प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह से बेहद तीखे सवाल किए। कैप्टन ने सभी सवालों के जवाब भी दिए।
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आई-पैक के प्रमुख और मास्टर पॉलिटिकल स्ट्रेटेजिस्ट प्रशांत किशोर अपनी चुनावी रणनीति के पहले चरण में ‘ब्रांड कैप्टन’ को स्थापित करने में लगे हुए हैं। इसकी शुरुआत ‘कॉफी विद कैप्टन’ से की गई है। हालांकि शुरुआत में इसकी आलोचना हुई कि पंजाब में कॉफी नहीं चल सकेगी। फिर भी आई-पैक ने खास रणनीति के तहत इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस कैंपेन का टारगेट सिर्फ स्टूडेंट वर्ग था। दूसरे वर्गों के लिए अलग कैंपेन की योजना है।
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पीएम नरेंद्र मोदी की चाय पर चर्चा की तर्ज पर शुरू किए गए इस कैंपेन के लिए कहा जा रहा था कि अपने लोग बैठाकर अपनी मर्जी के मुताबिक सवाल करवाए जाएंगे। चाय पर चर्चा में सवाल पहले से आते थे और जवाब भी पहले से तैयार होते थे, लेकिन कॉफी विद कैप्टन में स्टूडेंट्स ने प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह से बेहद तीखे सवाल किए। कैप्टन ने सभी सवालों के जवाब भी दिए।
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‘पंजाब दा कैप्टन’ स्लोगन के जरिये अवाम का नजरिया बदलने की कवायद
प्रशांत किशोर का अभियान कॉफी विद कैप्टन
- फोटो : फाइल फोटो
आई-पैक का मानना है कि इससे लोगों की आशंका दूर हो गई है। प्रशांत की टीम ने इस कैंपेन के जरिए एक स्लोगन ‘पंजाब दा कैप्टन’ को लोकप्रिय बनाने की कोशिश की है। इसमें किसी पार्टी या व्यक्ति का नाम नहीं है। पूरा फोकस सिर्फ दो की-वर्ल्ड पर दिया गया है, पंजाब और कैप्टन। आई-पैक की कोशिश है कि इससे लोगों के बातचीत का नजरिया बदले, वे इन शब्दों पर बात करना शुरू करें।
कॉफी विद कैप्टन कार्यक्रम में आए स्टूडेंट्स को पेपर बैग दिए गए। उन पर भी एक सिख के स्केच के साथ यही स्लोगन है। मकसद है कि एक स्टूडेंट के घर में चार लोग होंगे, वे सभी इस थीम से जुड़ सकें। आई-पैक की योजना है कि चुनावी माहौल थोड़ा गर्माने के बाद दोबारा इस थीम को लेकर लोगों के बीच जाएंगे। उनसे पूछा जाएगा कि कौन और कैसा होना चाहिए पंजाब का कैप्टन। सभी पार्टियों को मुख्य खतरा आम आदमी पार्टी से नजर आ रहा है।
ऐसे में आप कन्वीनर अरविंद केजरीवाल के जवाब में पंजाबी बनाम बाहरी का मुद्दा उछाला जाएगा। प्रशांत बिहार चुनाव में भी बिहारी बनाम बाहरी के नारे का बखूबी इस्तेमाल कर चुके हैं। केजरीवाल के खिलाफ पंजाबियत का इस्तेमाल करने की भी तैयारी की गई है। स्थानीय भाषा पर भी फोकस करने की तैयारी है। बिहार चुनाव में प्रशांत ने चुनाव सामग्री में नितीश के बजाय स्थानीय बोलचाल का शब्द नितीशे का इस्तेमाल किया था, ताकि लोग जुड़ सकें।
कॉफी विद कैप्टन कार्यक्रम में आए स्टूडेंट्स को पेपर बैग दिए गए। उन पर भी एक सिख के स्केच के साथ यही स्लोगन है। मकसद है कि एक स्टूडेंट के घर में चार लोग होंगे, वे सभी इस थीम से जुड़ सकें। आई-पैक की योजना है कि चुनावी माहौल थोड़ा गर्माने के बाद दोबारा इस थीम को लेकर लोगों के बीच जाएंगे। उनसे पूछा जाएगा कि कौन और कैसा होना चाहिए पंजाब का कैप्टन। सभी पार्टियों को मुख्य खतरा आम आदमी पार्टी से नजर आ रहा है।
ऐसे में आप कन्वीनर अरविंद केजरीवाल के जवाब में पंजाबी बनाम बाहरी का मुद्दा उछाला जाएगा। प्रशांत बिहार चुनाव में भी बिहारी बनाम बाहरी के नारे का बखूबी इस्तेमाल कर चुके हैं। केजरीवाल के खिलाफ पंजाबियत का इस्तेमाल करने की भी तैयारी की गई है। स्थानीय भाषा पर भी फोकस करने की तैयारी है। बिहार चुनाव में प्रशांत ने चुनाव सामग्री में नितीश के बजाय स्थानीय बोलचाल का शब्द नितीशे का इस्तेमाल किया था, ताकि लोग जुड़ सकें।
नीली पगड़ी के पीछे खास रणनीति
प्रशांत किशोर का अभियान कॉफी विद कैप्टन
- फोटो : फाइल फोटो
कॉफी विद कैप्टन कैंपेन के कट आउट्स, होर्डिंग और बैनर में कैप्टन को गहरे नीले रंग की पगड़ी पहने दिखाया गया है। जिसे देखकर हर कोई हैरान हो गया, क्योंकि यह रंग अकालियों का माना जाता है, लेकिन प्रशांत किशोर की इसके पीछे भी खास रणनीति है।
आई-पैक का मानना है कि बहुत से पंथक वोटर जोकि अकाली सरकार से नाराज हैं, वे इस रंग से कनेक्ट हो सकेंगे। बिहार चुनाव में भी प्रशांत ने नीतीश के कैंपेन मैटीयिल में पीला और लाल रंग इस्तेमाल किया। यह उनकी पार्टी के रंग नहीं थे, पर बड़ी संख्या में निम्न मध्यम वर्ग के लोग अपने घरों में इन रंगों का इस्तेमाल करते हैं।
प्रशांत ने तोड़ा कैप्टन का घेरा
प्रशांत किशोर ने पंजाब के नेताओं से फीडबैक लिया था। इसमें सामने आया था कि कैप्टन अमरिंदर के इर्द-गिर्द कुछ लोगों ने घेरा बना रखा है, जो उन्हें आम नेताओं या वर्करों से मिलने ही नहीं देते। मिलना तो दूर, फोन पर बात करना असंभव है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार की यह भी एक वजह थी। इसके बाद प्रशांत ने कैप्टन का घेरा खत्मकर दिया है।
सबसे ज्यादा शिकायतें भरत इंदर सिंह चाहल और मेजर अमरदीप सिंह के खिलाफ मिली थीं। प्रशांत ने कैप्टन से कहा है कि सार्वजनिक मौकों पर यह दोनों उनके साथ नजर न आएं। यह भी सुझाव दिया गया है कि नेताओं और वर्करों के फोन वह खुद रिसीव करें। कैप्टन की टीम से सोशल मीडिया कैंपेन का काम भी प्रशांत की टीम ने ले लिया है।
आई-पैक का मानना है कि बहुत से पंथक वोटर जोकि अकाली सरकार से नाराज हैं, वे इस रंग से कनेक्ट हो सकेंगे। बिहार चुनाव में भी प्रशांत ने नीतीश के कैंपेन मैटीयिल में पीला और लाल रंग इस्तेमाल किया। यह उनकी पार्टी के रंग नहीं थे, पर बड़ी संख्या में निम्न मध्यम वर्ग के लोग अपने घरों में इन रंगों का इस्तेमाल करते हैं।
प्रशांत ने तोड़ा कैप्टन का घेरा
प्रशांत किशोर ने पंजाब के नेताओं से फीडबैक लिया था। इसमें सामने आया था कि कैप्टन अमरिंदर के इर्द-गिर्द कुछ लोगों ने घेरा बना रखा है, जो उन्हें आम नेताओं या वर्करों से मिलने ही नहीं देते। मिलना तो दूर, फोन पर बात करना असंभव है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार की यह भी एक वजह थी। इसके बाद प्रशांत ने कैप्टन का घेरा खत्मकर दिया है।
सबसे ज्यादा शिकायतें भरत इंदर सिंह चाहल और मेजर अमरदीप सिंह के खिलाफ मिली थीं। प्रशांत ने कैप्टन से कहा है कि सार्वजनिक मौकों पर यह दोनों उनके साथ नजर न आएं। यह भी सुझाव दिया गया है कि नेताओं और वर्करों के फोन वह खुद रिसीव करें। कैप्टन की टीम से सोशल मीडिया कैंपेन का काम भी प्रशांत की टीम ने ले लिया है।