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जाट आरक्षण हिंसा: प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट पर विपक्षी दलों के सवाल

Sun, 15 May 2016 05:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 15 May 2016 05:55 PM IST
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Prakash Singh Committee report on Jat reservation, questioned of opposition
randeep surjewala - फोटो : ani

हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान पुलिस की भूमिका को लेकर की गई जांच रिपोर्ट उत्तरप्रदेश और असम के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने मुख्यमंत्री को सौंप दिया है। रिपोर्ट के सामने आते ही इस पर राजनीति भी तेज हो गई है। जानिए रिपोर्ट पर क्या कहना है हरियाणा के प्रमुख राजनीति दलों का 

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खोदा पहाड़ निकली चुहिया : सुरजेवाला 
रणदीप सिंह सुरजेवाला, मीडिया प्रभारी, एआईसीसी के मुताबिक प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट सही मायनों में ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’ साबित हुई। यह रिपोर्ट हरियाणा के लोगों की आंखों में धूल झोंकने का एक कुत्सित प्रयास है। बिना किसी वैधानिक आधार और अधिकार के नियुक्त की गई इस कमेटी की रिपोर्ट पूरी तरह सरकार के इशारे पर तैयार की है। रिपोर्ट में भाजपाई मंत्रियों और नेताओं की भूमिका व ‘खट्टर सरकार’ की विफलता पर पूरी तरह चुप्पी साधी गई है। दंगों के दौरान बुरी तरह नाकाम रहे सीआईडी विभाग को भी अप्रत्याशित तौर से क्लीन चिट दे दी गई है।
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रिपोर्ट के औचित्य पर इनेलो ने उठाए सवाल
अभय सिंह चौटाला, इनेलो के वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि न्यायिक आयोग के गठन के बाद प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट कोई मायने नहीं रखती। न्यायिक आयोग के गठन के बाद भी प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट क्यों तैयार करवाई गई, यह बात समझ से परे है। इस रिपोर्ट से किसे बचाया जा रहा है और किसे फंसाया जाएगा, इसका पता नहीं। सरकारी तौर तैयार करवाई गई इस रिपोर्ट के जरिये सरकार बिना मतलब लोगों को परेशान करने के साथ ही अपने लोगों को बचाने और उन्हें बेकसूर साबित करने की भी कोशिश करेगी। हरियाणा विधानसभा के पिछले सत्र में जब फैसला हो गया था कि आरक्षण आंदोलन मामलों की जांच रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग करेगा तो ऐसे में अन्य किसी से जांच करवाने का क्या मतलब था।  
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 अफसरों को बली का बकरा न बनाएं: नवीन जयहिंद
नवीन जयहिंद, प्रदेश अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी, हरियाणा के अनुसार 90 अफसर नहीं बल्कि 90 विधायक दोषी हैं। अफसरों को बली का बकरा न बनाया जाए। प्रकाश सिंह कमेटी की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट खुद इसकी व्यवहारिकता पर सवाल उठा चुका है। कमेटी की रिपोर्ट में नेताओं को बचाया गया है। इस पूरे मामले में विधायकों के साथ-साथ सभी दस सांसदों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। अधिकारी तो वही काम करेंगे जो मुख्यमंत्री कार्यालय कहेगा।

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