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मोबाइल टावरों के विरोध पर सियासत

Sat, 15 Feb 2014 11:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला,पंचकूला Updated Sat, 15 Feb 2014 11:40 AM IST
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politics on mobile towers

नियमों की अनदेखी कर लगाए गए मोबाइल टावरों पर विरोध शुरू हुआ तो नेता भी इस पर राजनीतिक रोटियां सेंकने लगे।

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विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि स्थानीय कांग्रेसी विधायक टावर के मसले पर राजनीति कर रहे हैं तो विधायक का कहना है कि यह मामला सोशल जस्टिस एंड इंपावरमेंट कमेटी में चल रहा है। यदि विपक्षी दलों के नेताओं को इतनी ही चिंता है तो वे खुद क्यों नहीं खुलकर सामने आते हैं।

वहीं, पार्कों में टावर लगाने की अनुमति के बाद पैदा हुए विवादों के बाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) ने पार्कों में टावर लगाने को तो प्रतिबंधित कर दिया, लेकिन पहले से रिहायशी इलाकों के इर्द-गिर्द लगे टावरों में बायलॉज की अनदेखी पर किसी का ध्यान नहीं है।
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हुडा और राजनीतिक दलों का रुख देखकर लोगों में भी यही चर्चा बनी है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने तक इस मामले को इसी तरह लटकाया जाएगा और बाद में आचार संहिता का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया जाएगा।
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नए टावरों के लिए आदेश, पुराने पर ध्यान नहीं
हुडा ने एक निजी कंपनी को पार्कों में टावर लगाने की अनुमति दे दी थी, जिससे विवाद पैदा हुआ। इसके बाद हुडा ने पार्कों में टावर लगाने पर रोक लगा दी।

नगर निगम और हुडा को आदेश भी मिले कि टावर लगाने के लिए आवेदन मिलने पर सभी औपचारिकताएं पूरा करने वाली कंपनी को ही अनुमति दी जाए।

लेकिन, पहले से रिहायशी क्षेत्रों में ऐसे टावर भी लगे हैं, जो मानकों को पूरा नहीं करते। इसके बावजूद इनके लिए न तो नए आदेश जारी हुए और न ही इन कंपनियों पर कार्रवाई की गई।


मोबाइल टावरों के नाम पर स्थानीय विधायक राजनीति कर रहे हैं। सरकार में होने के बावजूद अगर विधायक इसे हल करने में सक्षम नहीं है तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
विशाल सेठ, भाजपा जिलाध्यक्ष

टावरों के मामले को उठाकर विधायक डीके बंसल लगातार सुर्खियाें में बने रहना चाहते हैं। उनसे पूछा जाना चाहिए कि पहले से जो टावर लगे हैं, जिनमें नियमों की अनदेखी की गई, पिछले साढ़े चारे साल में उस तरफ नजर क्यों नहीं गई? अगर आम जनता के हितों के लिए सत्ता पक्ष में रहते हुए भी कुछ करवा नहीं सकते तो उन्हें तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए।
अनिल पंगोत्रा, हजकां, पूर्व डिप्टी सीएम के राजनीतिक सचिव

टावरों के मसले को सुलझाने के लिए अब तक सार्थक पहल नहीं की गई। पार्कों के अलावा भी कई जगहों पर नियमों की अनदेखी की गई, लेकिन मौजूदा विधायक का इस तरफ ध्यान नहीं है। इस मामले में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अलावा कानूनी राय लेते हुए फैसला लिया जाना चाहिए।

मनोज अग्रवाल, जिला शहरी प्रधान, इनेलो

मोबाइल टावरों का मामला सोशल जस्टिस एंड इंपावरमेंट कमेटी में चल रहा है। पार्कों में टावर किसी सूरत में नहीं लगाने दिया जाएगा। यदि विपक्षी दलों को आम लोगों की इतनी ही चिंता है तो वे खुलकर सामने क्यों नहीं आते?
डीके बंसल, स्थानीय विधायक

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