विस चुनाव में SGPC, HSGMC में होगी टक्कर
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में सिख राजनीति का पूरा वर्चस्व दिखाई देगा। पहले भी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के इनेलो के साथ बरसों पुराने रिश्तों और कांग्रेस की ओर से भी सिखों को समय-समय पर वाजिब प्रतिनिधित्व दिए जाने की वजह से हरियाणा में सिख वर्ग का प्रभाव दिखाई देता रहा है, लेकिन इस बार मसला उससे कहीं आगे निकल गया है।
इसकी मुख्य वजह एचएसजीएमसी का गठन है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एचएसजीएमसी के रूप में हरियाणा के लिए अलग सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का गठन करवाकर (मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन) प्रदेश के सिखों के एक वर्ग को अपने साथ करने में कामयाबी हासिल की है।
हुड्डा के खिलाफ हुआ कमेटी विरोधी वर्ग
अलग कमेटी के गठन का विरोध कर रहा वर्ग एकदम से हुड्डा के खिलाफ खड़ा हो गया है। ऐसे में सियासी माहिर जहां एचएसजीएमसी के गठन को हुड्डा व कांग्रेस की सिख वोट बैंक में सेंध लगाने की एक सोची-समझी चाल करार दे रहे हैं, वहीं इससे हरियाणा के सिख मतदाताओं में स्ट्रेट डिवीजन होती भी नजर आ रही है।
एचएसजीएमसी पदाधिकारी इस चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करने का फैसला ले चुके हैं, तो एसजीपीसी समर्थक सीधे तौर पर इनेलो-शिअद गठबंधन का साथ देंगे। इस प्रकार हरियाणा के रण में सिख वर्ग काफी प्रभावशाली तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने जा रहा है।
चार लोकसभा सीटों के 31 विधानसभा हलकों पर प्रभाव
राजनेताओं का दावा है कि हरियाणा में सिख वोटरों की गिनती लगभग 15 लाख है। इनका प्रभाव अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल और सिरसा लोकसभा क्षेत्रों के 36 में से 31 विधानसभा हलकों में अधिक माना जाता है।
वहीं, गुड़गांव और फरीदाबाद के विधानसभा क्षेत्रों में भी सिख आबादी की प्रभावशाली उपस्थिति है। यही वजह है कि कांग्रेस ने अलग गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का गठन करके सिखों के एक वर्ग को अपने पक्ष में लाने की कोशिश की है।
हम अस्तित्व बचाने को करेंगे कांग्रेस की मदद
एचएसजीएमसी के उपाध्यक्ष दीदार सिंह नलवी का कहना है कि वह अपना अस्तित्व बचाने के लिए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करेंगे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हड्डा की अगुवाई वाली हरियाणा सरकार ने उनकी 14 वर्ष पुरानी मांग को स्वीकार करते हुए अलग कमेटी का गठन कर उन्हें उनका हक दिया।
वहीं, इनेलो और भाजपा की ओर से साफ कहा जा रहा है कि उनकी सरकार बनने पर एचएसजीएमसी को समाप्त कर दिया जाएगा। नलवी ने कहा कि इन परिस्थितियों में उनकी कमेटी के अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया है। उन्हें लगता है कि केवल कांग्रेस ही उनके अस्तित्व को कायम रख सकती है, इसलिए वह और उनके समर्थक हुड्डा की हर मदद करेंगे।
इनेलो-शिअद का समर्थन करेंगे
एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ का कहना है कि उनके सदस्य शिरोमणि अकाली दल से संबंध रखते हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव में शिअद-इनेलो गठबंधन का ही समर्थन करेंगे।
यदि उन्हें भी बुलाया जाएगा तो वह भी हरियाणा में जाकर शिअद-इनेलो उम्मीदवारों के हक में प्रचार करेंगे। इसके साथ ही कहा कि कांग्रेस ने अलग कमेटी का गठन करके सिख पंथ के साथ अन्याय किया है, जिसका जवाब उसे हरियाणा की सिख संगत विधानसभा चुनाव में देगी।