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कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के लिए नीति तैयार, मंजूरी के लिए प्रशासक को भेजा

Tue, 15 Jun 2021 10:46 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 10:46 PM IST
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Policy prepared for children orphaned by Corona, sent to administrator for approval
चंडीगढ़। शहर में 110 बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने कोरोना की वजह से अपने माता-पिता में से किसी एक या फिर दोनों को खो दिया है। यूटी प्रशासन ने ऐसे बच्चों तक तुरंत राहत पहुंचाने के लिए एक नीति तैयार कर ली है, जिसे आखिरी मंजूरी के लिए प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को भेजा गया है। इसमें बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ उनके रहने की व्यवस्था, अन्य खर्चों के लिए राशि व एक निश्चित उम्र होने पर सहायता राशि देने जैसे कुछ फैसले लिए गए हैं।
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प्रशासन के समाज कल्याण विभाग ने शहर के सभी सरकारी व निजी स्कूलों को अपने-अपने इलाके में ऐसे बच्चों की पहचान करने के निर्देश दिए थे। कई दिनों के सर्वे के बाद सरकारी व निजी स्कूलों ने ऐसे 110 बच्चों की सूची विभाग को सौंपी है। इस सूची में कुछ बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने कोरोना की वजह से माता-पिता दोनों को खो दिया है, जबकि ज्यादातर बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने कोरोना की वजह से माता या पिता में से किसी एक को खोया है। समाज कल्याण विभाग की सचिव नितिका पवार ने बताया कि ऐसे बच्चों तक राहत पहुंचाने के लिए ही विभाग की तरफ से नीति का प्रारूप बनाकर मंजूरी के लिए भेजा गया है। उन्हें उम्मीद है कि मंजूरी मिलने के बाद कोरोना की वजह से माता-पिता को खोने वाले बच्चों को कुछ राहत जरूर पहुंचेगी।
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बता दें कि ऐसे बच्चों के प्रति संवेदना का भाव रखते हुए ही बीते दिनों पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने ऐसे बच्चों की पहचान और उनकी सहायता करने का आदेश दिया था।
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पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन से अलग है चंडीगढ़ की ये नीति
नितिका पवार ने बताया कि केंद्र सरकार की पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन से यह नीति अलग होगी। बताया कि चंडीगढ़ की नीति में बच्चों तक तुरंत राहत पहुंचाने की कोशिश की गई है। उन्होंने बताया कि विभाग ने परिवार की आय को देखते हुए ही बच्चों का चयन किया है। आर्थिक रूप से जरूरतमंद बच्चों व परिवार को चिह्नित किया गया है, जिन्हें मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों ने कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। कई राज्यों ने बच्चों की मुफ्त पढ़ाई के साथ उन्हें मासिक खर्च, 21 वर्ष की उम्र पर परिपक्वता राशि और 23 साल उम्र होने पर 10 लाख रुपये की सहायता आदि का एलान किया है। चंडीगढ़ प्रशासन ने भी विभिन्न राज्यों की तर्ज पर बच्चों के लिए नीति बनाई है।
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