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पंजाब सरकार की नाकामी या नेक्सेस की मजबूती, पिछले साल रोजाना 215 पंजाबी फंसे नशे के जाल में

Sat, 08 Aug 2020 02:07 PM IST
खुशबू गोयल नवनीत छिब्बर, मोहाली
नवनीत छिब्बर, मोहाली Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 08 Aug 2020 02:07 PM IST
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Poisonous Wine and Illegal Wine Business, Punjab Government
प्रतीकात्मक तस्वीर
पंजाब का हर घर किसी न किसी रूप में नशे के मक्कड़ जाल को लेकर चिंताग्रस्त है। नशा सियासी मुद्दा बन चुका है, एक बार फिर राज्य में नशे की सियासत गरमाई हुई है। इसी बीच हर पंजाबी के मन में सवाल है कि पंजाब में नशे का नेक्सेस ज्यादा मजबूत है या फिर सरकार की नाकामी बड़ी है। सरकार की नाकामी इसलिए भी बड़ी हो जाती है, क्योंकि सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक ही पिछले साल रोजाना औसतन 215 पंजाबी नशे के मक्कड़ जाल में फंसे थे।
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प्रदेश की उपजाऊ धरती, संपन्नता और बहादुरी के लिए दुनिया भर में जाने जाते पंजाबियों की पहचान पिछले दो दशकों से नशे से होने लगी है। हाल ही में अमृतसर, तरनतारन और बटाला में नकली शराब पीने से हुई मौतों के बाद फिर से राज्य में नशे का मुद्दा गरमा गया है। कांग्रेस ने नशे के मुद्दे पर ही अकालियों को सत्ता से बाहर कर सरकार बनाई थी। सरकार बनने के बाद से इसी मुद्दे पर कांग्रेस खुद ही दिन-ब-दिन घिरती जा रही है।
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सरकार ने ऊपरी कार्रवाई कर अपने आंकड़े भले ही दुरुस्त कर लिए हों, पर जमीनी स्तर पर इसका असर दिखाई नहीं देता। जो नशे के काले कारोबार के पीछे नशे के मजबूत नेक्सेस की तरफ इशारा करता है। इस नेक्सेस को तोड़ने के लिए न तो मजबूत कानून आया और न ही गहराई से जांच हुई। कांग्रेस के अपने ही लोग कैप्टन सरकार को इस मुद्दे पर घेरते रहे हैं। जब-जब भी नशे पर मामला उलझा नेक्सेस की तरफ इशारा हुआ।
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लेकिन पहले अकाली सरकार और अब कांग्रेस सरकार ने इसे तोड़ने की बजाय मुद्दे को छुपाने पर जोर दिया। वहीं, सरकार की नाकामी इसलिए भी बड़ी हो जाती है कि प्रदेश में कोरोना लॉकडाउन के दौरान नशे सप्लाई और नकली शराब फैक्ट्रियों का धंधा जोरों से चलता रहा। इसके बावजूद सरकार ने इनकी कड़ियां उधेड़ने की जरूरत नहीं समझी। जिसका नतीजा अनेकों गरीब परिवारों को अपनों की जान गवां कर भुगतना पड़ा है।

एक मामले में पंजाब पुलिस या सरकार ने कुछ नहीं किया

मई के अंत में दिल्ली पुलिस ने दो लोगों को दिल्ली में ही बुराड़ी चौक से 12 किलो अफीम के साथ गिरफ्तार किया। ये दोनों फिरोजपुर के रहने वाले थे। शान मसीह और चेतन पटियाल नाम के ये दोनों शख्स ई-पास के जरिए लॉकडाउन के दौरान झारखंड पहुंचे और वहां से 50 किलो अफीम पंजाब तक लेकर पहुंचने में भी कामयाब रहे। यह सब इन दोनों ने दिल्ली पुलिस को अपने बयान में बताया था। इनके पास से एसडीएम होशियारपुर से जारी किया गया ई-पास था।

दिल्ली पुलिस को इन दोनों ने बताया था कि प्रवासी मजदूरों को झारखंड छोड़ने के नाम पर तीन बार वहां के नक्सल प्रभावित इलाके हजारीबाग भी जा चुके हैं। वहां से वह दोनों 50 किलो अफीम पंजाब में सप्लाई भी कर चुके हैं। दोनों आरोपियों ने मास्टरमाइंड का नाम भी दिल्ली पुलिस को बताया, जो फिरोजपुर का ही रहने वाला है।

जांच के दायरे में ई-पास की सिफारिश करने वाला शख्स भी था। इस पूरे मामले पर पंजाब पुलिस या सरकार ने कुछ नहीं किया। यह सब कोरोना लॉकडाउन के उस समय में हो रहा था जब राज्य में आने वाले हर वाहन और व्यक्ति की जांच का दावा सरकार कर रही थी। कर्फ्यू और लॉकडाउन के दौरान नशे की यह सप्लाई नेक्सेस की तरफ इशारा करती है या फिर सरकार की नाकामी की तरफ?

दो जगह पकड़े गए नकली शराब के अवैध बॉटलिंग प्लांट

सीएम के जिला पटियाला के शंभू में नकली शराब की फैक्ट्री पकड़े जाने से पहले लॉकडाउन के दौरान खन्ना में भी नकली शराब का प्लांट पकड़ा गया था। जहां बाकायदा ऑटोमैटिक बॉटलिंग प्लांट में केमिकल युक्त नकली शराब तैयार कर उन्हें अंग्रेजी और देसी ब्रांड की बोतलों में भरा जाता था। यहां से करीब दो हजार नकली शराब की पेटियां रोजाना सप्लाई की जा रही थीं।

यहां गिरफ्तार आरोपियों में दो श्री गंगानगर के थे, एक गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी राजस्थान का था। आरोपियों को पकड़ राजस्थान कनेक्शन तो पुलिस ने तलाशना शुरू कर दिया, लेकिन कर्फ्यू और लॉकडाउन के दौरान आखिर कैसे नकली शराब की सप्लाई धड़ल्ले से हो रही थी, इसे तलाशने की कोशिश नहीं की गई। इसके पीछे फिर वही सवाल उठता है... नेक्सेस मजबूत है या सरकार नाकाम?

औसतन रोजाना 215 लोग हो रहे नशे का शिकार, 1500 लड़कियां भी शामिल

सेहत विभाग ने पंजाब में नशे के आदी लोगों के आंकड़े जारी किए थे। जिसमें वर्ष-2019 के दौरान पंजाब में 80 हजार नए लोगों के नशे का आदी होने की बात कही गई है। आंकड़ों के अनुसार पंजाब में हर रोज औसतन 215 नए लोग नशे का शिकार हो रहे हैं। जनवरी से दिसंबर 2019 के दौरान हेरोइन और चिट्टा के आदी होने वाले युवाओं की संख्या में 35 फीसदी इजाफा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि जनवरी 2019 में हेरोइन के 5439 नए मामले आए थे, जो दिसंबर में बढ़कर 8230 पहुंच गए।

चंडीगढ़ पीजीआई एम्स व ड्रग एब्यूज संस्था की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में हर महीने 112 लोग नशे के कारण अपनी जान गवां रहे हैं। वहीं, एनसीबी के आंकड़े बताते हैं कि 2007 से 2017 तक नशे के कारण 25 हजार लोगों ने आत्महत्या की। जिसमें से 74 प्रतिशत मामले पंजाब के थे। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 9 लाख लोग नशे का शिकार हैं। 20 से 25 साल की उम्र की 1500 लड़कियों के मामले भी अभी तक सामने आ चुके हैं। यह सब आंकड़े बताते हैं कि सरकार के नशा मुक्ति के दावे कागजी साबित हो रहे हैं।
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