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फीजियोथेरेपिस्ट मामले में पीजीआई पर सख्त हुआ कैट, फरमान जारी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 02 May 2016 01:10 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
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अनदेखी के शिकार पीजीआई के फीजियोथेरेपिस्टों को आखिर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। कैट ने पीजीआई को फटकार लगाते हुए कहा है कि निर्धारित समय में फीजियोथेरेपिस्ट की समस्याओं का निवारण करें वरना अगली सुनवाई पर केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के सेक्रेटरी को साथ लेकर आएं।
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अगली सुनवाई 11 जुलाई को होनी है। इससे पहले भी कैट ने फिजियोथेरेपिस्ट के पक्ष में आर्डर सुनाया था, लेकिन पीजीआई ने उसे नहीं माना। फीजियोथेरेपिस्टों की समस्याएं दूर नहीं होने से उसका सीधा असर पीजीआई में आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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ऐसे नियम कि कभी कंसल्टेंट नहीं बन सकते
पीजीआई में फीजियोथेरेपिस्टो के नियम ऐसे हैं कि कोई भी सीनियर पोस्ट पर प्रमोट नहीं हो सकता। फीजियोथेरेपिस्ट के तौर पर भरती हुए तो सीनियर फीजियोथेरेपिस्ट के पद से रिटायर हो जाएंगे। न तो सुपरिंटेंडेंट बन पाएंगे और न ही कंसलटेंट। पिछले 20 सालों से पीजीआई का कोई भी फीजियोथेरेपिस्ट न तो सुपरिंटेंडेंट पद पर प्रमोट हो पाया और न ही कंसलटेंट के पद पर। पीजीआई ने प्रमोशन के लिए जो नियम-कानून बनाए हैं, उससे ज्यादा पीजीआई के फीजियोथेरेपिस्ट क्वालिफाई हैं।
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अलग डिपार्टमेंट नहीं, मरीजों को लगानी पड़ रही है तीन लाइनें
पीजीआई में फीजियोथेरेपिस्ट का पहले अलग से डिपार्टमेंट होता था, लेकिन आठ साल पहले डिपार्टमेंट आफ फिजीकल एंड रीहैबिलिटेशन मेडिसिन में मर्ज कर दिया गया। इसका नुकसान सीधे तौर पर मरीजों को उठाना पड़ रहा है। जब अलग डिपार्टमेंट था तो आरथोपेडिक्स से मरीज को सीधे फीजियोथेरेपिस्ट के पास रेफर कर दिया जाता था, लेकिन अब मरीज को पहले आरथोपेडिक्स।
र फिजिकल एंड रीहैबिलिटेशन में रेफर कर किया जाता। उसके बाद वहां से फीजियोथेरेपिस्ट के पास रेफर किया जाता है। इससे मरीजों का चक्कर बढ़ गया है और वे परेशान हो रहे हैं। डिपार्टमेंट की प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट पिछले सात साल से खाली है।
फीजियोथेरेपिस्ट की नहीं है टीचिंग पोस्ट
पीजीआई में साढ़े चार साल से बैचलर आफ फीजियोथेरेपिस्ट का कोर्स करवाया जा रहा है, लेकिन उनकी कोई टीचिंग पोस्ट नहीं है। फीजियोथेरेपिस्ट को ही स्टूडेंट को पढ़ाना पढ़ता है। इसकी भी मांग पिछले कई दिनों से चल रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द टीचिंग पोस्ट भी भरी जाए।